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2035 तक होगा भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन

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29 Aug 25
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2035 तक होगा भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन

उदयपुर, अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरड़ा (उदयपुर) में आयोजित दो दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी ने छात्रों और शोधकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। इस आयोजन के मुख्य अतिथि इसरो (ISRO) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, अहमदाबाद के निदेशक डॉ. निलेश एम. देसाई रहे, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े वर्तमान प्रयासों और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन – 2035 का लक्ष्य

डॉ. देसाई ने कहा कि भारत ने अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) स्थापित करने का लक्ष्य 2035 तक निर्धारित किया है। इसके लिए 2028 से 2035 तक पाँच मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे। प्रथम चरण के लिए लगभग 22,000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है। इस परियोजना की शुरुआत भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के साथ होगी, जिसके तहत पहले तीन मानवरहित उड़ानें और उसके बाद दो मानवयुक्त उड़ानें प्रस्तावित हैं।

चंद्रयान-4 और भविष्य की योजनाएँ

उन्होंने बताया कि चंद्रयान-4 का प्रक्षेपण 2028-29 तक संभव है। इसके साथ ही 2025 से 2040 तक भारत 103 उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा। इनमें से 40–45 पर कार्य प्रगति पर है, जबकि शेष उपग्रह समय और आवश्यकता के अनुसार विकसित किए जाएंगे। इस अभियान में निजी क्षेत्र की भी सक्रिय भागीदारी होगी।

नाविक – भारत का अपना GPS

डॉ. देसाई ने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम ‘नाविक’ की चर्चा करते हुए बताया कि यह भारत का खुद का GPS होगा, जो अगले डेढ़ वर्ष में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। इसके उपयोग से नागरिकों को बेहतर दिशा-निर्देशन मिलेगा, वहीं सेना को भी विशेष लाभ होगा। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सैनिकों की कलाई पर एक डिवाइस लगाई जा सकेगी, जिससे उनकी वास्तविक लोकेशन तुरंत ज्ञात हो सकेगी और खोज-बचाव अभियान सरल बन जाएंगे।

मोबाइल की जगह लेगी नई डिवाइस

उन्होंने भविष्य की तकनीक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मोबाइल फोन की जगह एक हल्की, छोटी और उपग्रह-आधारित डिवाइस ले लेगी। इस डिवाइस के लिए बार-बार चार्जिंग की आवश्यकता नहीं होगी और दुनिया के किसी भी कोने से नेटवर्क की समस्या के बिना बातचीत संभव हो सकेगी। अमेरिका इस दिशा में अग्रसर है और भारत भी इसी तकनीक पर कार्य कर रहा है।

उदयपुर में अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी

अरावली इंस्टीट्यूट में आयोजित दो दिवसीय विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी में इसरो की अनेक उपलब्धियाँ प्रस्तुत की गईं।

पीएसएलवी व जीएसएलवी रॉकेट के मॉडल

चंद्रयान और मंगलयान की प्रतिकृतियाँ

उपग्रहों के कार्यशील मॉडल

अंतरिक्ष मिशनों पर वीडियो और डॉक्यूमेंट्री

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और शोध की भावना को प्रोत्साहित करना था।

छात्रों की भागीदारी

उदयपुर संभाग के सरकारी व निजी विद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों से आए 2700 से अधिक छात्रों ने पहले ही दिन प्रदर्शनी का अवलोकन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. हेमंत धाभाई ने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नए आयामों से परिचित कराएगा और उन्हें शोध के लिए प्रेरित करेगा।

 

इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की गहराई से अवगत कराया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, नाविक, चंद्रयान-4 और उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।


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