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टीबी के खिलाफ लड़ाई मिलकर कर काम करने की जरुरत- डॉ. हर्ष वर्धन

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24 Jun 20
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  -नीति गोपेंद्र भट्ट-

टीबी के खिलाफ लड़ाई मिलकर कर काम करने की जरुरत- डॉ. हर्ष वर्धन

नई दिल्ली, केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने टीबी उन्मूलन के कार्य में जुटे सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, ‘भारत सरकार, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में देश में 2025 तक टीबी के उन्मूलन के टिकाऊ विकास लक्ष्य को हासिल करने को संकल्पबद्ध हैं, इस तरह हम वैश्विक लक्ष्य से 5 वर्ष पहले यह लक्ष्य हासिल करने हेतु जुटे हैं। महत्वाकांक्षी लक्ष्य के मद्देनजर हमने संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) का नाम बदलकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) रखा गया है।’

डॉ हर्ष वर्धन ने आज नई दिल्ली में परिवार और स्वास्थ्य कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे की उपस्थिति में आयोजित एक वर्चुअल समारोह में टीबी की 2020 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की। उन्होंने इसके साथ ही ज्वाइंट मॉनिटरिंग मिशन की रिपोर्ट, टीबी के रोगियों को निकक्षय (एनआईकेएसएचएवाई) प्रणाली के अंतर्गत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के मैनुअल, प्रशिक्षण मॉड्यूल और त्रैमासिक निकक्षय पत्रिका भी जारी की।

वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, ‘वार्षिक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि देश में टीबी के नियंत्रण के विभिन्न मानदंडों को सराहनीय बताया गया है। रिपोर्ट में दी गई रैंकिंग निश्चित रूप से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को लक्ष्य हासिल करने में अपने कार्य प्रदर्शन को सुधारने में प्रोत्साहित करेगी। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का विस्तार प्रयोगशाला नेटवर्क और नैदानिक सुविधाओं दोनों के लिए किया गया है, ताकि समूचे देश को कवर किया जा सके। 2025 तक टीबी के उन्मूलन के लिए, टीबी सेवाओं के विस्तार और आवश्यकता होने पर बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण के जरिए स्वास्थ्य से इतर टीबी के निर्धारकों का देश में विस्तार किया गया है। इन सभी प्रयासों से महत्वपूर्ण परिणाम मिल रहे हैं।’

देश में टीबी रोगियों के अपमान के पहलु पर प्रकाश डालते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, ‘इससे रोग के खिलाफ संघर्ष में बाधा उत्पन्न हो रही है। हमें एक राष्ट्र के रूप में टीबी के खिलाफ मिलकर संघर्ष करने की जरूरत है और इसी तरह इस रोग से जुड़े अपमान को दूर करना है, ताकि प्रत्येक टीबी रोगी गरिमा के साथ और बिना किसी भेदभाव के उपचार और देखभाल करा सके। हमारे समाज को इन रोगियों के आराम और सहयोग के लिए काम करना चाहिए।’

अनिवार्य टीबी नोटिफिकेशन और गुणवत्तापूर्ण टीबी रोगियों की देखभाल प्रदान करने से निजी क्षेत्र राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि देश ने सामूहिक और नियामक कदम उठाकर 2019 में निजी क्षेत्र में 6,64,584 टीबी मरीजों का पंजीकरण किया है, जो 2018 के मुकाबले 22 प्रतिशत अधिक बनता है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘देश में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा टीबी उन्मूलन के प्रयासों की त्रैमासिक रैंकिंग केन्द्रीय टीबी डिविजन ने शुरू की है। दवा प्रतिरोधी टीबी मरीजों के उपचार की लिंकेज, टीबी मरीजों की एचआईवी जांच, निकक्षय पोषण योजना में डीबीटी के माध्यम से टीबी रोगियों को पोषण सहायता, पंजीकृत टीबी मरीजों की कवरेज के लिए सार्वभौम दवा संवेदनशील जांच, टीबी से बचाव की थेरेपी की कवरेज और वित्तीय खर्च को मूल्यांकन मानदंड में शामिल किया गया है।’

आज जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट में निम्नलिखित प्रमुख उपलब्धियां शामिल हैं-

·        2019 में लगभक 24.04 लाख मरीज पंजीकृत किए गए। यह संख्या पिछले वर्ष 2018 के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक है।
·        निकक्षय प्रणाली के माध्यम से टीबी रोगियों के ऑनलाइन नोटिफिकेशन के कार्य को लगभग पूरा किया गया।
·        लापता मामलों में कमी आई और यह 2.9 लाख रह गए, जबकि 2017 में यह संख्या 10 लाख से अधिक थी।
·        निजी क्षेत्र में पंजीकरण में 35 प्रतिशत वृद्धि हुई और इस वर्ष 6.78 लाख रोगियों का पंजीकरण हुआ।
·        मॉलिक्यूलर डाइग्नोस्टिक के कारण बच्चों के टीबी निदान की संख्या 2019 में 8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 2018 में यह 6 प्रतिशत बढ़ी थी।
·        सभी पंजीकृत टीबी मरीजों की एचआईवी जांच 2018 में 67 प्रतिशत हुई थी, जो 2019 में बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई।
·        पंजीकृत रोगियों के सफल उपचार की दर में 12 प्रतिशत का सुधार हुआ, जिसका कारण उपचार सेवाओं का विस्तार है। 2019 में यह 81 प्रतिशत रहा, जबकि 2018 में यह 69 प्रतिशत था।
·        4.5 लाख से अधिक डॉट (डीओटी) केन्द्रों ने देश भर में लगभग प्रत्येक गांव में उपचार प्रदान किया।
·        निकक्षय ने निम्नलिखित स्कीमों के लिए डीबीटी के प्रावधान को लागू किया।
Ø टीबी के मरीजों के लिए निकक्षय पोषण योजना
Ø उपचार में सहायक व्यक्तियों के लिए प्रोत्साहन
Ø निजी सेवा प्रदाताओं के लिए प्रोत्साहन
Ø अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में टीबी रोगियों के लिए परिवहन प्रोत्साहन

इस मौके पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा, ‘सरकार ने अब तक पहुंच और सहायता से बाहर रहे टीबी के मरीजों तक पहुंचने के लिए समुदाय आधारित रिस्पॉन्स को टीबी की एक प्रमुख रणनीति को शामिल किया है। देश में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों और जिला स्तर पर सभी पक्षों को शामिल करके 700 से अधिक मंच (फोरम) स्थापित किए गए हैं। ये मंच टीबी की चुनौती से निपटने के लिए बहु-क्षेत्रीय और समाज का सहयोग प्रदान करेंगे।’

50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को श्रेष्ठ कार्य प्रदर्शन वाले राज्य का सम्मान दिया गया। छोटे राज्यों की श्रेणी में 50 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों त्रिपुरा और नगालैंड को सम्मानित किया गया। केन्द्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में दादरा नगर हवेली और दमन दीव को श्रेष्ठ कार्य प्रदर्शन के लिए चुना गया।

समारोह में मंत्रालय की सचिव श्रीमती प्रीति सूदन, विशेष कार्याधिकारी श्री राजेश भूषण, अपर सचिव सुश्री आरती आहूजा, अपर सचिव और वित्तीय सलाहकार डॉ. धर्मेन्द्र सिंह गंगवार, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के निदेशक श्री राजीव गर्ग और मंत्रालय तथा केन्द्रीय टीबी डिविजन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। रिपोर्ट जारी करने के समारोह में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेश स्तर के अधिकारियों, भागीदारी संगठनों, सामाजिक संगठनों और टीबी चैम्पियन वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे।


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