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महिलाओं के साथ आज भी सभी स्तरों पर भेदभाव पर हुआ बहुत बदलाव: शुचिशर्मा

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09 Mar 21
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महिलाओं के साथ आज भी सभी स्तरों पर भेदभाव पर हुआ बहुत बदलाव: शुचिशर्मा

(मुनेश अरोड़ा) | भारत में आज भी महीलाओं के साथ सभी स्तरों पर भेदभाव किया जाता है चाहे वह शिक्षा का क्षैत्र हो या नौकरी का क्षैत्र हो नारी को कभी न कभी जरूर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह बात उदयपुर आयी पूर्व उच्च शिक्षा सचिव शुचिशर्मा ने विशेष भेंट के दौरन कही। शुचि शर्मा ने कहा कि आज जरूर बदलते दौर में भेदभाव की स्तर जरूर कम हुआ है इसके लिए जिस प्रकार महीलाऐं आगे आ रही है हर क्षैत्र में नये र्कीतिमान स्थापित कर रही है उससे समाज में उनके प्रति सोच में अन्तर आया है और आगे महिलाऐं अपनी उपलब्धियों से समाज के क्षैत्र में अपना परचम लहरायेेगीं।
शुचिशर्मा ने एक अधिकारी के रूप में की गयी सेवाओं को याद करते हए कहा कि उन्हें पुरूषों के लिए विशेष तौर पर माने जाने वाले पदों पर भी काम करने का मौका मिला वह नगर निगम व जेडिए में रही यह पद पुरूषों के लिए बने हो ऐसी सोच है मगर मेरा यह मानना है कि ऐसे पदों पर सहृदय महिलाओं को लगाया जाना चाहिए जिससे आम नागरीको को अधिक से अधिक फायदा हो। नौकरीयों में आने वाली महिलओं की भी यह मानसिकता रहती है कि व फिल्ड पोस्टींग वाली व हार्ड डयुटी वाले पदों पर जाना पंसद नही करती है व उनके परिवार की भी यही मानसिकता रहती है जो गलत है। 
पूर्व उच्चशिक्षा सचिव ने बताया कि उनके समय में काफी अधिक संख्या में राजस्थान में काॅलेज खोले जाने की धोषणा हुई व काॅलेज शिक्षकों के 980 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू हुई। मगर आज भी हालात काफी अच्छे नही कहे जा सकते है काॅलेजों में शिक्षकों के भारी मात्रा में पद खाली है उसके लिए गेस्ट फैक्लटी टीचर को उचित राशि देकर लगाने की व्यवस्था की गयी। काॅलेजों में करोना काल में सबसे अधिक आन लाइन लैक्चर की व्यवस्था की गयी। यही सही है कि काॅलेजों के पास इंन्फ्रास्ट्रकचर की कमी है स्टाफ नही है बच्चों को पर्याप्त सुविधाऐं नही मिल रही है इनको दूर करने का प्रयास किये गये है जिसके परिणाम जल्दी ही सामने आयेगंे।
शुचिशर्मा ने बताया कि काॅलेज शिक्षकों की सेवानिवृति की उम्र 60 से बढ़कर 62 करने का प्रस्ताव उनके पास आया यूजीसी ने भी यह रिकमण्ड किया है मगर उसके दूरगामी परिणामों व राज्य में बेरोजगारी की संख्या को देखते हुए उस पर फिलहाल विचार स्थगित कर दिया गया है। राज्य में शिक्षा में सुधार के लिए सभी विश्वविद्यलयों में एकसा पाठयक्रम लागू किया जाये इसके प्रयास किये जा रहे है।
शचि शर्मा ने क्रेन्द्र की तरह ही राज्य में नियामक प्राधिकरण होना चाहिए ताकि निजी विश्वविद्यलायों और निजी काॅलेज की शिकायतों की सही तरह से जांच होकर उस पर कडी कार्यवाही की जा सके। आज शिक्षा के क्षैत्र में आमुलचुल परिर्वतन की आवश्यकता है मगर आर्थिक भार का असर इन सुधारों में सबसे बढ़ी दिक्कत पैदा करता है।
अपने समाजिक न्याय व अधिकारीता विभाग की सेवाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां सोशल ओडिट की जरूरत है जो अपने क्षैत्र की आवश्यकओं के आधार पर कार्य करवा कर उनका मूल्यांकन कर सके। आज यह विभाग भी सरकारी सेवाओं की तरह हो गया है यहां पर ग्राम स्तर पर स्थांनन्तरण पोस्टींग व अन्य सरकारी कार्यवाहीयां हो रही है जबकि जब इस विभाग को शुरू किया गया तो उसकी कल्पना अलग थी उसका आज पुरी तरह से सरकारी करण हो चुका है। 
शुचिशर्मा से जब यह पुछा गया कि वह क्या राजनैति मंे जाने की इच्छुक है तो उन्होंने कहा कि वहां पर सभी जगह गुठबाजी इतनी ज्यादा है कि वह उसमें अपने आपको फीट नही पाती है। जब उनसे उनके कला व पेंटीग से संबधित सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह प्राकृति के नजदीक रहना पंसद करती है प्राकृति हमें सब कुछ देती उससे उन्हें सकून मिलता है। वह आगे भी जब समय मिलेगा तो अपनी इस कला को और बढायेगंी।
 


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