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“लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर श्री चन्द्रमोहन आर्य की पुस्तक का दिल्ली में विमोचन”

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01 Aug 20
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“लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर श्री चन्द्रमोहन आर्य की पुस्तक का दिल्ली में विमोचन”

उत्तरी दिल्ली के महापौर श्री जयप्रकाश जी ने सिविक सेन्टर में लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी के जीवन पर लिखी गयी पुस्तक का दिनांक 31-7-2020 को विमोचन किया।

                लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी की दिनांक 1-8-2020 को 100 वीं पुण्य तिथी है जो उनके जीवन से प्रेरणा लेने के कारण प्रेरणा शताब्दी दिवस के समान है। ‘‘स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है” के उदघोषक  बाल गंगाधर तिलक ने आजादी की लड़ाई में सशक्त भूमिका निभाई थी। बिखरे समाज को संगठित करके उन्होंने गणेश उत्सवों तथा शिवाजी जन्म उत्सवों की प्रेरक परंपरा शुरू कराई। यह उदगार उत्तरी दिल्ली के महापौर श्री जयप्रकाश जी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा शताब्दी पर कहे। यह विचार उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार चंद्रमोहन आर्य की लोकमान्य बालबंगाधर तिलक पर पुस्तक का लोकार्पण करते हुए सिविक सेन्टर नई दिल्ली में कहे।

                कार्यक्रम के स्वागत-अध्यक्ष व पूर्व पार्षद श्री यशपाल आर्य ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अपने महापुरुषों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करें। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के वैदिक विद्वान आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ने कहा कि कारावास की भीषण यातनाएं सहते हुए बाल गंगाधर तिलक का जीवन संतो जैसा हो गया था। उन्होंने कई पत्रिकाओं के माध्यम से क्रांति का शंखनाद किया। आचार्य श्री ने तिलक जी के वचनों को दोहराते हुए कहा कि महान उपलब्धियां कभी भी आसानी से नही मिलती और आसानी से मिली उपलब्धियां महान नही होती।

                प्रतिष्ठित उद्योगपति  ‘बीकानेरवाला’ के निर्देशक श्री नवरतन अग्रवाल ने कहा की हमें देश व समाज के लिए कल्याणकारी कार्यों को प्रोत्साहित करने कि आवश्यकता है। ओमेगा फाउंडेशन के महामंत्री श्री जय सिंह कटारिया ने कहा कि महान संपादक तथा स्वतंत्रता सेनानी लाला जगतनारायण सहित हजारों देशभक्तों ने  लोकमान्य तिलक से नई स्फूर्ति पाई। इस अवसर पर सत्यानंद आर्य, सुरेंद्र कोछड़, सुदेश आर्य, रोहन शर्मा, जितेंद्र भाटिया तथा ललित चौधरी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

                इस अवसर पर लिये गये चित्र में जो महानुभाव दिखाई दे रहे हैं उनमें बाईं ओर श्री नवरतन अग्रवाल जी (डायरेक्टर-बीकानेरवाला फ्रूट्स प्राइवेट लिमिटेड) हैं। उनके दाईं ओर आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी (संपादक-अध्यात्म-पथ), श्री यशपाल आर्य जी (पूर्व चेयरमैन-शिक्षा समिति), श्री जयप्रकाश जी (महापौर-उत्तरी दिल्ली), श्री चंद्रमोहन आर्य जी  (पुस्तक के लेखक) एवं श्री जयसिंह कटारिया जी  हैं।

                हम अनुभव करते हैं कि इस अवसर पर देशवासियों को देश की आजादी के लिये समर्पित व अपने प्राण न्योछावर करने वाले बालगंगाधर तिलक जी के जीवन का अध्ययन करना चाहिये और उनसे प्रेरणा ग्रहण कर उनके बताये मार्ग पर चलना चाहिये। तिलक जी का नाम लेते ही उनके शब्द ‘स्वतन्त्रता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं उसे पाकर पहूंगा।’ कानों में झंकृत होने लगते हैं। इस विषय में यह जानने योग्य है कि सन् 1883 में ऋषि दयानन्द ने देश की आजादी की नींव रखी थी। उन्होंने अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘सत्यार्थप्रकाश’ में लिखा था ‘कि कोई कितना ही करे परन्तु जो स्वदेशीय राज्य होता है वह सर्वोपरि उत्तम होता है। अथवा मत-मतान्तर के आग्रहरहित, अपने और पराये का पक्षपातशून्य, प्रजा पर पिता माता के समान कृपा, न्याय और दया के साथ विदेशियों का राज्य भी पूर्ण सुखदायक नहीं है।’ ऋषि दयानन्द के इन वचनों के भावों का ही रुपान्तर तिलक जी के ‘स्वतन्त्रता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे पाकर रहूंगा।’ में देखने को मिलता है। आज बाल गंगाधर तिलक जी की एकसौवीं पुण्यतिथि वा प्रेरणा दिवस पर हम उनको सश्रद्ध अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है। बाल गंगाधर तिलक (अथवा लोकमान्य तिलक, मूल नाम केशव गंगाधर टिळक, जन्मः २३ जुलाई १८५६, मृत्युः १ अगस्त १९२०), एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। ये भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुए। ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उन्हें ‘भारतीय अशान्ति के पिता’ कहते थे। उन्हें, ‘लोकमान्य’ का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ, जिसका अर्थ हैं लोगों द्वारा स्वीकृत (उनके नायक के रूप में)। लोकमान्य तिलक जी ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसे पहले और मजबूत अधिवक्ताओं में से एक थे। वह भारतीय अन्तःकरण में एक प्रबल आमूल परिवर्तनवादी नेता थे। उनका मराठी भाषा में दिया गया नारा ‘स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच’ (स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूँगा) बहुत प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं से अत्यन्त निकट संबंध बनाये जिनमें बिपिन चन्द्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविन्द घोष और वी० ओ० चिदम्बरम पिल्लै आदि शामिल थे।

-मनमोहन कुमार आर्य

पताः 196 चुक्खूवाला-2

देहरादून-248001

फोनः09412985121

 

 


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