हमारी विरासत, हमारा अभिमान

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17 Apr 19
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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

हमारी विरासत, हमारा अभिमान

विश्व के ऐतिहासिक स्मारक, भवन, हवेली, वन एवं वन्य क्षेत्र, झील, मरूस्थल एवं शहर, जो स्थान विशेष से महत्वपूर्ण हैं कि उनका संरक्षण इसलिए जरूरी है कि आने वाली पीढयों एवं मानवीय हितों का संरक्षण करें और यह संरक्षण विश्व समुदाय के हित में भी हो, का चयन कर इनके संरक्षण का दायित्व विश्व समुदाय ग्रहण करे।

    सांस्कृतिक धरोहर स्थलों में स्मारक, स्थापत्य की इमारतें, शिलालेख, गुफा आवास, विश्व महत्व वाले स्थान, इमारतों का समूह, अकेली इमारत, मूर्तिकारी-चित्रकारी-स्थापत्य की झलक वाले स्थल, ऐतिहासिक, सौन्दर्य एवं मानव विज्ञान तथा विश्व दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया जाता है। प्राकृतिक धरोहर स्थल में वन क्षेत्र, जीव, प्राकृतिक स्थल, भौगोलिक महत्व के ऐसे स्थान जो नष्ट होने के करीब हैं, वैज्ञानिक महत्व की जगह आदि को शामिल किया जाता है। जो स्थल सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, उन्हें मिश्रित धरोहर में शामिल किया जाता है।

    विश्व धरोहर दिवस के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को देखें तो संयुक्त राष्ट्र संघ की यूनेस्को संस्था की पहल पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संधि की गई, जो विश्व के सांस्कृतिक, प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष १९८२ में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ माउंटेस एंड साईट (ईकोमार्क) नामक संस्था ने टयूनिशिया में अन्तर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस का आयोजन किया गया तथा इसी सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर विश्व में प्रतिवर्ष ऐसी संरक्षित धरोहर के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए १८ अप्रेल को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत दिवस आयोजित करने की घोषणा की गई।

    किसी भी स्थान विशेष की धरोहर को संरक्षित करने के लिए ‘अन्तर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिसर‘ तथा ‘विश्व संरक्षण संघ‘ द्वारा आंकलन कर विश्व धरोहर समिति से सिफारिश की जाती है। समिति की बैठक वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है।

    यूनेस्को द्वारा अब तक विश्व में ९८१ धरोहर स्थलों का चिन्हिकरण कर उन्हें विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। इनमें से ७५७ सांस्कृतिक महत्व की धरोहर और २९ मिली-जुली धरोहर तथा १६० अन्य स्थल हैं। करीब १४२ राष्ट्रीय पार्टियों में स्थित समस्त विश्व धरोहरों का वर्गीकरण पांच भूगोलिय भूमंडलों में किया गया है। भूगोलिय भूमंडलों में अफ्रीका, अरब राज्य जिनमें आस्ट्रेलिया और ओशनिया भी शामिल ह, यूरोप और उत्तरी अमेरिका विशेषतः संयुक्त राज्य और कनाडा तथा दक्षिणी अमेरिका एवं कैरीबियन आते हैं। रूस एवं कॉकेशस राष्ट्र यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका भूमंडल में शामिल किए गए हैं।

    विश्व परिदृष्य को देखें तो अफ्रीका में ७४, अरब राज्य में ६२, एशिया प्रशांत में १८३, यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में ४१६ तथा दक्षिणी अमेरिका एवं कैरीबियन में ११७, इटली में ४९, स्पेन में ४४, जर्मनी एवं फ्रांस में ३८, चीन में ४५ विश्व धरोहर स्थल हैं। विश्व में करीब २२६ हैरिटेज सिटी में घोषीत की गई हैं।

    ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक संपदा से भरपूर हमारे अपने भारत देश में ४० स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। विश्व धरोहर में शामिल होने का सिलसिला वर्ष १९८३ से वर्ष २०१४ तक अनवरत चलता रहा।

    भारतीय सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृश्टि से भारत में वर्ष १९८३ में उत्तर प्रदेश में आगरा का ताजमहल एवं किला, महाराष्ट्र में अजंता एवं एलोरा की गुफाएं, वर्ष १९८४ में उडीसा राज्य का कोणार्क मंदिर व तमिलनाडु के महाबलीपुरम के स्मारक, वर्ष १९८५ में असम का कांजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण्य तथा असम का मानस राष्ट्रीय अभ्यारण्य, वर्ष १९८६ में गोवा का पुराना चर्च, कनार्टक में हम्पी के स्मारक, मध्यप्रदेश खजुराहो के मंदिर एवं स्मारक व उत्तर प्रदेश में फतेहपुर सीकरी, वर्ष १९८७ में महाराष्ट्र में एलीफैंटा की गुफाएं, तमिलनाडु का चोल मंदिर, कर्नाटक में पट्टाइक्कल के स्मारक, पश्चिवन राष्ट्रीय अभ्यारण्य, वर्ष १९८९ में मध्यप्रदेश स्थित सांची के बौद्ध स्तूप, वर्ष में दिल्ली का हुमायूं का मकबरा एवं कुतुबमीनार तथा मध्यप्रदेश में भीमवेटका, वर्ष २००२ में बिहार में महाबोधि मंदिर बौधगया, वर्ष १९९९ में पश्चिय पर्वतीय रेल दार्जिलिंग, वर्ष २००४ में गुजरात में चंपानेर पावागढ का पुरातत्व पार्क तथा महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, वर्ष में उत्तराखंड में फूलों की घाटी एवं तमिलनाडु में भारतीय पर्वतीय रेल नीलगिरी, वर्ष २००७ में दिल्ली का लाल किला, वर्ष २००८ में हिमाचल प्रदेश में भारतीय पर्वतीय रेल कालका-शिमला, वर्ष २०१२ में पश्चिमी घाट कर्नाटक, केरल, महाराश्ट्र, तमिलनाडु, वर्श २०१४ में गुजरात में रानी की वाव पाटन तथा हिमाचल प्रदेश में ग्रेट हिमालियन राष्ट्रीय उद्यान कुल्लू एवं वर्ष २०१६ में चंडीगढ केपिटल कॉम्पलेक्स को विष्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है।

    देश के परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक विविधताओं वाले राजस्थान में वर्ष १९८५ में भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय अभ्यारण्य प्रथम बार विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसके उपरांत वर्ष २०१० में जयपुर के जंतर-मंतर तथा वर्ष २०१३ में आमेर का किला, झालावाड में गागरोन का किला, चित्तौडगढ किला, राजसमंद का कुंभलगढ, सवाई माधोपुर का रणथंभौर दुर्ग तथा जैसलमेर का सोनार किला विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया। इस प्रकार अब तक राजस्थान में आठ स्थल विश्व धरोहर में अपना स्थान बना चुके हैं।

    भारत की धरोहरों को विश्व विरासत सूची में शामिल कराने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। काशी (बनारस) में विकास प्राधिकरण ने ७१ ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों की सूची तैयार की है। उत्तराखंड के दून को तथा मध्यप्रदेश के चंदेरी को भी इस सूची में शामिल करने लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली को हैरिटेज सिटी में शामिल करने के लिए वर्ष २०१० में रोडमैप तैयार कर लिया गया था। दिल्ली के साथ-साथ अहमदाबाद तथा पंजाब के शहर चंडीगढ को भी हैरिटेज सिटी का दर्जा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    विश्व विरासत दिवस पर केवल संरक्षित धरोहरों का स्मरण ही पर्याप्त नहीं है, वरन प्रत्येक का प्रयास होना चाहिए कि वह इस दिवस को आवश्यक रूप से मनाए, इसके लिए आप अपने शहर या शहर के नजदीक स्थल को देखने जाएं, अपने बच्चों को दिखाएं तथा आफ यहां आने वाले मेहमानों को भी इन स्थलों की सैर कराएं। विद्यालय प्रबंधक भी ऐसे स्थलों या उपलब्ध संग्रहालय का अवलोकन बच्चों का सामूहिक रूप से करा सकते हैं। राजस्थान में सरकार द्वारा संचालित संग्रहालयों को देखने के लिए इस दिन किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। इसका उद्देश्य यही है कि बच्चे और वहां के नागरिक अधिकाधिक संग्रहालयों में जाएं तथा वहां संजोई गई अपनी समृद्ध विरासत को देखें और समझें। ऐसे स्थलों को देखकर हमें हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक एवं भौगोलिक संपदा पर गर्व होगा और हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हम जिस देश-प्रदेश के निवासी हैं, वह कितनी समृद्ध विरासत अपने में संजोए है।


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