BREAKING NEWS

चुनाव से गायब विकास के मुद्दे

( Read 11231 Times)

29 Nov 18
Share |
Print This Page
चुनाव से गायब विकास के मुद्दे बीकानेर (विवेक मित्तल) । राजनीतिक दलों के वर्षभर चलने वाले व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का दौर चुनावी समय में भी जारी है। जनता को भ्रमित करने वाले बयानों में उलझा कर मुख्य विकास के मुद्दों को गायब कर दिया है इन चुनावों में। बीकानेर शहर में अनेकानेक आवासीय कॉलोनियों में मूलभुत सुविधाओं का अत्यन्त ही अभाव है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला न तो पहले कोई था न अब है। थोड़े बहुत जो विकास के कार्य हुए हैं वो भी भ्रष्टाचार और कुप्रबन्धन की भेंट चढ़ गये हैं। विभागीय लापरवाही और नेताओं की निष्क्रियता व उदासीनता के चलते वर्तमान में होने वाली परेशानियों और भविष्य में उत्पन्न होने वाली समस्यों के समाधान हेतु इन आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले वाशिन्दों की किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है। निम्न मुद्दों पर अतिशीघ्र कार्यवाही करने की आवश्यकता है।
1. शिवबाड़ी जोन में सीवरेज का कार्य कुप्रबन्धन का शिकार हो गया है। निगम के अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही, सीवरेज निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। अनेक स्थानों पर चैम्बर का टॉप लेवल सड़कों से काफी ऊँचा है, जिसके कारण मकानों का लेवल नीचा हो गया है। क्रोस और मिलान भी ठीक तरह से नहीं किये जा रहे।
2. जलदाय विभाग भी कुप्रबन्धन से अछूता नहीं है। ठेका प्रथा पर काम करवाने के कारण अनेक स्थानों पर सड़कों पर खुले खड्डे तथा लीकेज के कारण व्यर्थ बहता पानी दिखाई देता है।
3. इन कॉलोनियों में सड़कों की दुर्दशा के चलते दुर्घटनाएं होती हैं। गन्दे पानी के जलभराव के कारण अनेक स्थानों पर निवासी दुर्गन्ध भरे वातावरण में जीवन यापन करने को मजबुर हैं। पटेलनगर, वल्लभ गॉर्डन मुख्य सड़क पर बरसात के दिनों में क्षतिग्रस्त हुआ पुलिया दुर्घटना को आमन्त्रित करता है।
4. मुख्य मार्गों की सडकें मिट्टी से अटी पड़ी हैं, नियमित सफाई के अभाव में धुल का गुबार वातावरण में छाया रहता है जिसके कारण अस्थमा के रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा इनकी संख्या भी बढ़ रही है।
स्थानीय नागरिकों का यही कहना है कि राजनीतिक दल और उनके प्रतिनिधि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तथा गोत्र पुछने तथा बताने व्यस्त हैं तो कैसे होगा हमारी दैनिक समस्याओं का समाधान, कौन करेगा हमारी सुनवाई? नागरिकों का कहना है कि हमारी सबसे बड़ी पीड़ा है कि हम वोट देकर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के तहत जनप्रतिनिधि इसलिए ही तो चुनते हैं ताकि वे क्षेत्र के विकास तथा समस्याओं के समाधान हेतु हमारा प्रतिनिधित्व कर सकें। हमारी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचा सके, लेकिन निवार्चित जनप्रतिनिधि हमारी दैनिक जीवन की मुलभूत समस्याओं के समाधान में रूचि लेते ही नहीं है। भूल जाते हैं अपने दायित्वों और कर्त्तव्यों को, कब तक हम इस खोखली व्यवस्था का हिस्सा बन कर जीते रहेंगे?
Source :
This Article/News is also avaliable in following categories : Bikaner News
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like