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इन्वेस्टमेंट रिकवरी एडवाइजरी कंपनी है ‘शेयर समाधान’

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07 Dec, 17 22:05
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राजस्थान के मारवाड़ी समुदाय के लोग व्यापार की समझ और व्यापार में नए नए प्रयोग के लिए पूरे विश्व में जाने जाते हैं. इसी परंपरा में एक और अध्याय जोड़ते हुए राजस्थान के दो युवा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स – अभय चंडालिया और विकाश जैन; ने निवेशकों के डूबे हुए निवेश को उन्हें या उनके बाद उनके उत्ताराधिकारियो को वापस दिलाने के लिए ‘शेयर समाधान’ कंपनी बनायी. दिल्ली की यह कंपनी अब भारत में अपने तरह की पहली कंपनी है जो की दर दर भटक रहे निवेशकों और उनके उत्ताराधिकारियो के लिए ‘एकल विंडो’ की तरह कार्य करती है.

शेयर समाधान की सेवाओं के बारे में जानकारी देते हुए कंपनी के संस्थापक निदेशक श्री अभय चंडालिया ने बताया की शेयर समाधान निवेशकों के डूबे हुए निवेश वापस दिलवाने के लिए उनकी हर प्रकार की व्यावसायिक सेवा प्रदान करती है. हमारे पास चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरीज और वकीलों की टीम है जो की हर स्तर पर मामले की जानकारी जुटाकर फिर निवेशकों को उनका धन वापस दिलवाने में व्यापक शोध करके उनकी मदद करते हैं. उन्होंने कहा की हम हर प्रकार के निवेश जैसे – शेयर, बैंक जमा, बीमा, पी एफ आदि के मामले में निवेशकों की मदद करते हैं. अभय चंडालिया ने कहा की धन वापसी के बाद ही शेयर समाधान अपनी फीस लेता है और किसी कारण से धन वापसी न हो पाने की दशा में एडवांस ली गयी राशि पूरी की पूरी वापस कर दी जाती है. अभय चंडालिया ने आगे कहा की निवेश के कागजात न होने या अपूर्ण होने की दशा में बहुत मामूली सी सूचना के आधार पर शेयर समाधान के विशेषज्ञ निवेश के सभी आवश्यक प्रमाण पत्र बनवा लेते है. शेयर समाधान कोई एडवांस फीस नहीं लेता सिर्फ डूबे हुई रकम से वापस निकली गयी रकम का १० % से २५ % तक फीस लेता है वो भी तक जब पूरी रकम निवेशक के बैंक खाते में वापस आ जाती है. किसी दुर्घटना में निवेश के प्रमाण पत्र खो जाने, नष्ट हो जाने अथवा उत्तराधिकार के मामले के प्रमाण बनवाकर निवेशक की मृत्य हो जाने पर भी उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को निवेश वापस दिलवा देता है.

शेयर समाधान कंपनी की स्थापना २०११ में अभय चंडालिया ने विकाश जैन के साथ मिलकर दिल्ली में किया और व्यापक बाज़ार शोध के बाद २०१५-१६ से अपनी सेवाओं को व्यावसायिक रूप से बाज़ार में लांच किया. अभी तक शेयर समाधान ने २५ करोड़ से ज्यादा रूपये के डूबे हुए निवेश को निकलकर निवेशकों को वापस दिलवाया है. शेयर समाधान से देश के १५ शहरों में ५० से ज्यादा एसोसिएट्स/ कार्यालय हैं.

वेल्थ समाधान कार्ड

अधिकतर घर में कमाने वाले सदस्य अपने निवेश सम्बन्धी सूचना परिवार के लोगों को बताते नहीं हैं. यहाँ तक की पति और पत्नी भी अपने निवेश को एक दूसरे से पूरा पूरा नहीं बताते. इससे किसी अनहोनी की दशा में वो निवेश उनके परिवार या बच्चों को नहीं मिल पता. शेयर समाधान ने ऐसे लोगों के समस्या को ध्यान में रखकर ‘वेल्थ समाधान कार्ड’ योजना की शुरुवात की है. इसमें लोग शेयर समाधान के वेबसाइट पर जाकर अपना अकाउंट बनाकर उसमे अपने निवेश की संक्षिप्त सूचना रख सकते हैं. यह सूचना पूरी तरह गोपनीय होती है और इससे सिर्फ निवेशक ही देख सकता है. शेयर समाधान प्रत्येक निवेशक को दो वेल्थ समाधान कार्ड देता है. एक कार्ड निवेशक अपने पति या पत्नी को दे सकता है और दूसरा अपने किसी खास रिश्तेदार या दोस्त को जो उसके बाद उसके परिवार की मदद कर सके. खास बात ये है की कार्ड धारक खुद सूचना का प्रयोग नहीं कर करता और न ही ‘शेयर समाधान’ का कोई कर्मचारी; ऐसी व्यवस्था इस वेबसाइट में है. किसी अनहोनी की दशा में पूरी छानबीन के बाद निवेशक द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर और गोपनीय जानकारी के आधार पर उसके असली उत्तराधिकारों को उसका निवेश वापस करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है.

भारत में दावा रहित (unclaimed) निवेश का मूल्य

उपलब्ध आकड़ों के अनुसार लगभग तीन लाख करोड़ रूपये से भी ज्यादा का धन दावा रहित (unclaimed) निवेश और भौतिक शेयर्स के रूप में विभिन्न प्राइवेट कंपनियों, पी यफ, म्यूच्यूअल फण्ड, बीमा, बैंक जमा आदि के रूप में देश में है. कुछ आकडे इस प्रकार है:

१ स्टॉक / म्यूच्यूअल फण्ड में भौतिक शेयर के रूप में में लगभग २.३ लाख करोड़ रूपये.
२ दावा रहित पी यफ के रूप में लगभग ४३,००० करोड़ रूपये.
३ दावा रहित पूर्ण अवधि बीमा लगभग ११,६६८ करोड़ रूपये.
४. दावा रहित कॉर्पोरेट डिविडेंड लगभग ३,४५४ करोड़ रूपये.
५. बन्द पड़े बैंक खाते लगभग ५,१२५ करोड़ रूपये.
६. दावा रहित पोस्ट ऑफिस अकाउंट १,००१ करोड़ रूपये.

कुछ सफल मामले:
दिल्ली के गजेन्द्र सिंह रेलवे में ठेकेदार हैं. अपने पिता की मृत्यु के बाद पिता के निवेश के लगभग १६ लाख रूपये निकले के लिए वो अधिकारीयों और कंपनियों के चक्कर लगते रहे. उन्होंने अपने पिता का निवेश मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी. शेयर समाधान ने उनके १२ लाख रुपये वापस दिलवा दिया और बाकी के धन वापसी की प्रक्रिया चल रही है.

इसी प्रकार झारखण्ड के ऋचा सिंह (परिवर्तित नाम) के पिता ने १९७० के दशक में (ITC) कंपनी के कुछ शेयर लिए थे जिसके प्रमाण पत्र उनके पास नहीं थे. मात्र डिविडेंट के कागज के आधार पर शेयर समाधान ने उनके लगभग ६ करोड़ रूपये वापस दिलवा दिया. गुडगाँव की प्रेमलता सोनी (७८ वर्ष) को शेयर समाधान ने उनके पति की मृत्यु के बाद उनके सभी शेयर उनके नाम करवाकर पूरा निवेश वापस दिलवा दिया. जे पी शर्मा भारत सरकार में संयुक्त सचिव के पद से सेवानिवृत हुए. उनके पास उनके सभी शेयर्स के जानकारी नहीं थी साथ ही सेवानिवृत होने के बाद उनके हाथ भी कांपता था जिससे हस्ताक्षर मिलाने में भी दिक्कत हुई लेकिन फिर भी शेयर समाधान ने उनके सभी शेयर और निवेश उनको वापस दिलवा दिया. अपना निवेश या फिर अपने पिता अथवा पति का निवेश वापस पाने की चाह में दर दर भटक रहे लोगों के लिए शेयर समाधान एक सहारा बन चुका है.
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