संविधान का अनुच्छेद 370 स्वतंत्र् भारत की सबसे बडी संवैधानिक भूल

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31 Oct 19
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उदयपुर  प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक व पूर्व सांसद डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 370 स्वतंत्र् भारत की सबसे बडी संवैधानिक भूल थी। इसका सुधार वर्तमान केन्द्र सरकार के नेतृत्वकर्ता नरेन्द्र मोदी व अमित शाह ने किया वे बधाई के पात्र् है।

डॉ. शर्मा आज शाम भारतीय लोक कला मण्डल में माननीय भानुकुमार शास्त्री स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित ’जम्मू कश्मीर राज्य का भारत में पूर्ण विलय’ विषयक व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे। डॉ. शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान के सभी अनुच्छेद पहले कांग्रेस कार्यसमिति और फिर संविधान सभा में पारित होते थे। इन सभी चर्चाओं की प्रोसेडिंग उपलब्ध है, लेकिन अनुच्छेद 370 पर कार्यसमिति व संविधान सभा में कोई चर्चा नहीं हुई। यह अनुच्छेद 370 को केवल पं. नेहरू के दबाव से जोडा गया। इस संबंध में सरदार पटेल व गोपाल स्वामी आयंगर द्वारा संविधान सभा में दिया गया वक्तव्य सभी को पढना चाहिये।

डॉ. शर्मा ने कहा कि कश्मीर के विषय में जोडा गया अनुच्छेद 370 अस्थायी था, फिर इसे हटाने में 70 वर्ष क्यों लगे? और इसे अस्थायी धारा को जब हटा दिया तो विरोध का आधार क्या है?

प्रारंभ में डॉ. शर्मा व विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचन्द कटारिया ने भारत माता के चित्र् पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्थान के धर्मनारायण जोशी, परसराम सूयल, हृषिकेश शर्मा व हितेश राजगौर ने अतिथियों का माला, पगडी व उपरणों से स्वागत किया। डॉ. चन्द्रशेखर चौबीसा ने ’है अमिट सामर्थ्य मुझमें, याचना में क्यों करूंगा’ काव्य गीत प्रस्तुत किया।

मावली विधायक धर्मनारायण जोशी ने स्वागत भाषण करते हुए स्व. शास्त्री के जीवन वृत्त की चर्चा करते हुए जम्मू कश्मीर आंदोलन में शास्त्री की भूमिका की चर्चा की।

कार्यक्रम में अतिथियों ने नारायण लाल शर्मा द्वारा लिखित व मुक्ता शर्मा द्वारा सम्पादित ’भानु कुमार शास्त्री-एक जीवनी’ पुस्तक का विमोचन किया।

अध्यक्षता करते हुए विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चन्द कटारिया ने कहा कि नैतिक मूल्यों के लिये जीवन जीने का कोई उदाहरण है तो भानुकुमार शास्त्री है। उन्होंने शास्त्री के सुखाडिया जी के सामने लडे चुनाव की चर्चा की।

कटारिया ने कहा कि शास्त्री ने प्रतिकूल परिस्थिति में जनसंघ को आधार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सुखाडया जी व भानु जी के चुनाव की चर्चा बी.बी.सी. तक से प्रसारित होती थी, एक सामान्य व्यक्ति मुख्यमंत्री के सामने चुनाव लड रहा है।

समारोज का संचालन भंवर लाल शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन नारायण लाल शर्मा ने किया।

इस अवसर पर पूर्व विधानसभाध्यक्ष शांति लाल चपलोत पूर्व मंत्री व विधायक किरण माहेश्वरी, विधायक फूल सिंह मीणा, भारतीय जनसंघ के सांसद व शास्त्री के सहयोगी रहेगी हेमेन्द्र सिंह बनेडा, महापौर चन्द्रसिंह कोठारी, उपमहापौर लोकेश द्विवेदी, बी.एन. संस्थान के तेज सिंह बांसी, पूर्व कुलपति परमेन्द्र दशोरा, डॉ. उमाशंकर शर्मा, साहित्य अकादमी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजित गुप्ता सहित कई विशिष्टजन उपस्थित थे।


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