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दूरस्त, कमजोर और अधिकारविहीन के लिए सुगम शिक्षा की आवश्यकता - श्री कलराज मिश्र

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01 Jun 20
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दूरस्त, कमजोर और अधिकारविहीन के लिए सुगम शिक्षा की आवश्यकता - श्री कलराज मिश्र

उदयपुर  महाराणा प्रताप कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के संघटक अभियान्त्रिकी महाविद्यालय द्वारा 1 जून 2020 को डॉ. के. एन. नाग स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन वेबीनार के माध्यम से किया गया। वेबीनार के  उद्घाटन सत्र में माननीय राज्यपाल महोदय ने मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन दिया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता यूजीसी अध्यक्ष डा. डी. पी. सिंह एवं महाराणा प्रताप कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने भी अपना उद्बोधन दिया।
माननीय राज्यपाल महोदय ने अपने उद्बोधन मे डा. के. एन. नाग को शिक्षा जगत के देदीप्यमान युगपुरुष की संज्ञा देते हुए उनकी स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला को एक अति महत्वपूर्ण समकालीन चर्चा बताते हुए इस महान शिक्षाविद् को भावपूर्ण श्रृद्धान्जली अर्पित की। उन्होने कहा कि भारत एक युवा राष्ट्र है और उच्च शिक्षण संस्थाओं से अपेक्षा है की वे कोविड-19 महामारी के इस संकट काल को अवसर मे बदलते हुए युवाओं में ईश्वर के प्रति निष्ठा, वर्तमान में विश्वास तथा भविष्य के लिए आशा का संचार करें। इसने भारतवर्ष में उच्च शिक्षण संस्थाओं पर इस युवा वर्ग के भविष्य को संवारने की चुनौती को और अधिक प्रबल कर दिया है। उन्होने “एम् पी यू ए टी” को कोविड-19 महामारी के विपदा काल और प्रतिकूल परिस्थितियों के परिवेश में इस चर्चा द्वारा रचनात्मक पहल के लिए बधाई दी। आज बदले परिवेश में संकाय को अपनी परम्परागत शिक्षण विधियों को बदलने और प्रौद्योगिकी-केंद्रित शिक्षण को विकसित करने की आवश्यकता है जिससे विद्यार्थियों मे आत्मविश्वास पैदा किया जा सके। उन्होने कहा कि आज हमें एक लचीली भारतीय शिक्षा प्रणाली का निर्माण करने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति की आवश्यकता है। इसके लिए समावेशी शिक्षण समाधान-ओपन-सोर्स डिजिटल लर्निंग उपाय और लर्निंग मैनेजमेंट इत्यादि अपनाने होगें जिससे दुरस्त और विशेष रूप से सबसे कमजोर और अधिकारविहीन के लिए सुगम शिक्षा उपलब्ध करवाई जा सके। इसके लिए उन्होने सैद्धान्तिक व प्रायोगिक शिक्षण सामग्री ने आवश्यक बदलाव की ओर भी इशारा किया। उन्होने कहा कि इसके लिए हमें संवर्धित वास्तविकता (एआर) और आभासी वास्तविकता (वीआर) जैसी तकनीकों से शिक्षण को संवादात्मक और आकर्षक बनाना होगा।
एमपीयूएटी के कुलपति प्रो. नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने ड़ॉ. के. एन. नाग को राज्य मे कृषि शिक्षा एवं कृषि अभियांत्रिकी के संस्थापक व राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के संस्थापक कृलपति को पितामहः की संज्ञा देते हुऐ भावपूर्ण श्रृद्धान्जली दी।  उन्होने बताया कि माननीय राज्यपाल महोदय के मार्गदर्शन मे विश्वविद्यालय संकाय ने स्वंय को ‘‘सक्षम‘‘ व्यक्तियों के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है जिससे विद्यार्थियों के ऑनलाइन शिक्षण, शिक्षण सामग्री के उपलब्धता, ईप्लेसमेन्ट के माध्यम से छात्रों की उम्मीदों को पूरा किया जा सके। माननीय कुलपति जी ने अवगत करवाया गया कि मात्र अप्रैल माह में महाराणा प्रताप कृषि तथा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने कृषि, सामुदायिक विज्ञान, मात्स्यकी, डेयरी और खाद्य प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी संकायों में संचालित पाँच सौ उन्नीस पाठ्यक्रमों में 5530 ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से विषय सूची को त्वरित गति से आगे बढाया हैं जिसमे विद्यार्थिओं की सक्रियता रेखांकन योग्य है। तथा मई माह में सभी पाठ्यक्रमों में कोर्स  पाठ्यविवरण अनुसार पूर्ण कर लिए गए हैं और यहाँ तक कि पुनरीक्षण व गृह कार्य भी करवाया गया है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने लॉकडाउन काल में 116 से अधिक ई-मैन्युअल और कम्पेन्डीयम जैसी शिक्षण सामग्री का भी श्रृजन किया है जो कि ऑनलाइन उपलब्ध है इसके लिए उन्होने शिक्षक वर्ग का साधुवाद भी ज्ञापित किया। उन्होने कहा कि अब हम आगामी दिशानिर्देशों के अनूरूप परीक्षाओं का संचालन करने के लिए तत्पर हैं।
“कोविड-19 काल पश्चात उच्य शिक्षा संस्थाओं की भूमिका पर सीटीएई द्वारा आयोजित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डॉ. डी.पी. सिंह ने बताया कि आज उच्च शिक्षा की निरन्तरता व सुगमता बनाये रखने के लिए देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं को तत्काल उपायों की क्रियान्विति सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता व समयबद्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। आज यूजीसी अनेक नवाचारों जैसे स्वयं, शोधगंगा, शोधसिंधु, नेशनल डिजीटल लाइब्रेरी, टीवी चैनल के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा व ई-शिक्षण सामग्री विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को उपलब्ध करवा रहा है जिसका लाभ देश के दूरस्थ प्रातों मे उपस्थित युवा विद्यार्थी उठा रहे है। हम कोविड-19 के संक्रमण काल मे अपने ई-शिक्षण कार्यो में एवं पाठ्यक्रमों मे निरन्तर सुधार भी कर रहे हैं। उन्होने कहा कि नवीन शिक्षण माध्यमों व कोर्स पूरा करने की दौड़ मे हमारे विद्यार्थी भारतीय संस्कृती, संवैधानिक कर्तव्यों की जानकारी, पर्यावरण हितैशी, मानवीय मुल्यों, राष्ट्रीय गौरव एवं राष्ट्र निर्माण की भावना से अछूते ना रहें इसका भी निरन्तर प्रयास युजीसी कर रही है इसके लिए शिक्षकों के बोद्धिक एवं बहुआयामी विकास के लिए युजीसी ने गुरूदक्षिता कार्यक्रम प्रारम्भ किया है। हमें इस काल में एकजुटता के साथ नवाचार युक्त रणनीती पर कार्य करना होगा जिससे हमारे विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार नागरिक बना सकें एवं उनके उज्वल भविष्य का निर्माण कर सके।
वेबीनार के प्रारम्भ मे अभियान्त्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय शर्मा ने महान शिक्षाविद् व राज्य मे कृषि शिक्षा एवं कृषि अभियांत्रिकी के संस्थापक ड़ॉ. के. एन. नाग को भावपूर्ण श्रृद्धान्जली अर्पित की। प्रो. वीरेंद्र नेपालिया एवं ड़ॉ. अजय शर्मा ने ड़ॉ. के. एन. नाग के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने बताया कि “कोविड-19 काल पश्चात उच्च शिक्षा संस्थाओं की भूमिका पर सीटीएई द्वारा आयोजित दो दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान माला मे पूर्व कुलपति एमपीयुएटी डॉ. एस.एल. मेहता एवं सहायक महानिदेशक आईसीएआर डॉ. पी.एस. पाण्डे के मुख्य व्याख्यान 02 जून को आयोजित किये जाएगें।
वेबीनार का संचालन कुलपति विशेषाधिकारी डॉ. विरेन्द्र नेपालिया ने किया। तकनिकी सहयोग कम्प्युटर विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. नविन चौधरी ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मंजित सिंह ने दिया


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