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पर्यटकों के लिए विविध आकर्षण मौजूद हैं कोलकाता में

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15 Apr 18
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पर्यटकों के लिए विविध आकर्षण मौजूद हैं कोलकाता में
(डा प्रभात कुमार सिंघल )पश्चिम बंगाल की राजधानी और भारत के चार महानगरों में से एक कोलकाता हुगली नदी के किनारे बसा एक ऐतिहासिक, कला, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है। इस नगर में पर्यटकों के लिए विविध प्रकार के आकर्षण मौजूद हैं।
काली मंदिर
काली मंदिर कोलकाता शहर के काली घाट इलाके में स्थित देवी का एक प्रसिद्धमंदिर है। हावडा रेलवे स्टेशन से ७ कि.मी. दूर यह मंदिर भारत के ५१ शक्तिपीठों में आता है। यहां सति के दांये पांव की चार अंगुलियां ;अंगूठा छोडकरद्ध का पतन हुआ था। यहां शक्ति कालिका एवं भैरव नकुलेश हैं। इस पीठ में काली की भव्य प्रतिमा विराजित है, जिनकी लाल जीभ बहार निकली हुई है। जीभ से रक्त की कुछ बूंदे टपक रही हैं। देवी काली भगवान शिव की छाती पर पैर रखे हुए है। हाथ में कुल्हाडी तथा कुछ नरमुण्ड हैं। जनश्रुति के अनुसार देवी के गुस्से को शांत करने के लिए शिव उनके रास्ते में लेट गये। देवी ने गुस्से में उनकी छाती पर पैर रख दिया। जैसे ही उन्होंने भगवान शिव को पहचाना उनका गुस्सा शांत हो गया। मंदिर में त्रिनयना माता रक्तांबरा, मुण्डमालिनी एवं मुक्तकेशी भी विराजमान हैं। समीप ही नकुलेश का मंदिर भी है। बताया जाता है कि पुराने मंदिर के स्थान पर वर्तमान मंदिर १८०९ ई. में बनवाया गया था। यह मंदिर प्रातः ३ बजे से रात ८ बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहता है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर
दक्षिणेश्वर काली मंदिर विवेकानन्द पुल के पास उत्तर में तथा बी.बी.डी. बाग से २० कि.मी. दूर स्थित है। इसका निर्माण जान बाजार की महारानी रासमणि ने १८४७ ई. में करवाया जो १८५५ ई. में बनकर पूर्ण हुआ। यह मंदिर २५ एकड क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मंदिर के भीतरी भाग में चाँदी से बने हजार पंखुडयों वाला कमल का फूल है तथा माँ काली शस्त्रों सहित भगवान शिव के ऊपर खडी है। नवरत्न की तरह बने मंदिर पर १२ गुम्बद हैं। परिसर में चांदनी घाट के चारों ओर भगवान शिव के १२ मंदिर बनाये गये हैं। यह मंदिर विशाल चबूतरे पर खडा है तथा सबसे बडा मंदिर बताया जाता है। तिमंजिला मंदिर ४६ फीट चौडा एवं १०० फीट ऊँचा है। कोलकाता में काली मंदिर के समान ही इस मंदिर का भी बडा महत्व है। मुख्य मंदिर के सामने नट मंदिर बना है। मंदिर दर्शकों के लिए प्रतिदिन प्रातः ५.३० से १०.३० बजे तक एवं सायं ४.३० से ७.३० बजे तक खुला रहता है।
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कोलकाता से १२ कि.मी. दूर उपनगर शिवपुर में स्थित बॉटनिकल गार्डन गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। करीब २७३ एकड क्षेत्रफल में फैले इस गार्डन की स्थापना १७८७ में की गई थी। गार्डन का सबसे प्रमुख आकर्षण विशाल और व्यापक विस्तार वाला बरगद का पेड ;ग्रेट बॅनियन ट्रीद्ध है। प्राचीन बरगद का यह पेड करीब एक हजार फीट घेरे में फैला हुआ है। इसकी उच्चतम शाखा २४.५ मीटर तक पाई गई है। वर्तमान में २८८० हवाई जडे जमीन पर पहुँचती हैं। इस विशाल काय वृक्ष को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
बॉटनिकल गार्डन में १२ हजार बारह मासी पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। बगीचे में आर्किड और बहुरंगी फूलों का आकर्षण देखने को मिलता है। बगीचे में बनी झील में नोकायन की भी सुविधा है। इस झील में विभिन्न प्रकार की दुर्भल जलीय वनस्पति देखने को मिलती हैं। यहां परिसर में एक पुस्तकालय भी बना है जो वनस्पति विज्ञान की पुस्तकों का दुर्लभ खजाना है। यहां के संग्रहालय में विभिन्न प्रजातियों के ४० हजार पेड-पौधों का संग्रह किया गया है। यह बॉटनिकल गार्डन एशिया का सबसे बडा वनस्पति उद्यान है। वर्ष १९५० में इस गार्डन का नाम बदल कर ”इण्डियन बॉटनिकल गार्डन“ रखा गया, जबकि इससे पूर्व इसे कम्पनी बाग या इस्ट इण्डिया कम्पनी का गार्डन कहा जाता था।
इस गार्डन को २५ भागों में विभक्त किया गया है। यहां नेपाल, जावा, सुमात्रा, ब्राजील, सिसिली तथा मलेशिया आदि से लाई गई पेडों की दुर्लभ प्रजातियां भी देखने को मिलती हैं। यह गार्डन भारत में बागवानी और वनस्पति अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणीय संस्था की भूमिका निभा रहा है।
हुगली नदी के ब्रिज
कोलकाता में हुगली नदी पर बने चार पुल हावडा ब्रिज, विद्यासागर ब्रिज, निविदेता सेतु एवं विवेकानन्द सेतु सैलानियों को अपनी विशेष बनावट के लिए आकर्षित करते हैं। हावडा ब्रिज को पश्चिमी बंगाल के पाँच आकर्षणों में गिना जाता है। इसी पुल का नाम बदलकर गुरू रवीन्द्रनाथ ठाकुर के नाम पर १४ जून १९६५ को ”रवीन्द्र सेतु“ किया गया परन्तु अभी भी यह हावडा ब्रिज के नाम से ही पुकारा जाता है। अद्भुत बनावट वाला और इंजीनियरिंग का अजूबा तथा देश का विशालतम ब्रिज विश्व में विख्यात है। इस ब्रिज की लम्बाई ४५७.७ मीटर एवं चौडाई ७१ मीटर है। ब्रिज पर ८ वाहन एक साथ समानान्तर चल सकते हैं। इसका निर्माण १९३७ में प्रारम्भ किया गया तथा यह ब्रिज १९४३ में बनकर पूर्ण हुआ। ब्रिज स्टील से केन्टिलीवर प(ति पर बना है।
हुगली नदी पर ही बना हुआ निवेदिता सेतु छः कि.मी. लम्बा है जो कोलकाता और राष्ट्रीय राजमार्ग नं. ३४ एवं ३५ को भारत के अन्य राज्यों को जोडता है। इस ब्रिज का उपयोग वर्तमान में मुख्य रूप से पश्चिमी बंगाल में यातायात का दबाव कम करने के लिए किया जाता है।
हुगली नदी पर १९९२ ई. में बना विद्यासागर ब्रिज की कुल लम्बाई ८२३ मीटर, स्पान की लम्बाई ४५७.२ मीटर एवं चौडाई ११५ मीटर है। यह ६ लेन ब्रिज है जो कोलकाता और हावडा के बीच लिंक का कार्य करता है। इसमें नौ ट्रेफिक ट्रेक बने हैं। यह पुल २२ साल में बनकर तैयार हुआ तथा इस पर कुल व्यय ३८८ करोड रूपये आया। पुल का नाम कोलकाता के विख्यात समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के नाम पर रखा गया।
हुगली नदी पर महान संत एवं युवा स्वामी विवेकानन्द के नाम से बना विवेकानन्द सेतु भी दर्शनीय है। वर्ष १९३२ ई. में बना यह पुल रेलवे सडक मार्ग को जोडता है। एक स्तम्भ पर बना यह पुल ८८० मीटर लम्बा है। पुल बाली के उपनगर को दक्षिणेश्वर से जोडता है। पुल का निर्माण स्पात एवं पत्थर से किया गया।
विक्टोरिया मेमोरियल
संगमरमर के पत्थर से बना वास्तुकला का सुन्दर नमूना विक्टोरियल मेमोरियल पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है। यह भवन वास्तुकला का एक अनूठा चमत्कार है। भवन आगरा के ताजमल जैसा प्रतीत होता है। इस भवन का निर्माण लॉर्ड कर्जन ने करवाया था। भवन में स्थापित की गई २५ कला दीर्घाओं में ३५०० अनूठी कलाकृतियां तथा मुख्य हॉल में पेन्टिंग्स, चित्र एवं मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं। इमारत के चारों ओर सुन्दर बगीचे व फव्वारें भवन की शोभा को बढाते हैं। यह इमारत महारानी विक्टोरिया की स्मृति में बनवाये जाने से इसका नामकरण विक्टोरिया मेमोरियल हुआ।
भारतीय संग्रहालय
हावडा जंक्शन से ४ कि.मी. दूर स्थित एशिया का सबसे पुराने एवं भारत का सर्वश्रेष्ठ भारतीय संग्रहालय की स्थापना ऐशियाटिक सोसायटी के प्रयासों से २ फरवरी १८१४ ई. को की गई। वर्ष १८५७ में भारतीय संग्रहालय का अपना निजी भवन बना तथा १८८३ ई. में इसमें चित्रशाला की स्थापना की गई। भारत के इस सर्वश्रेष्ठ संग्रहालय में ४ हजार वर्ष प्राचीन जीवाष्म, कलश में बुद्धकी अस्थियों के अवशेष, प्राचीन वस्तुएं, ममी, युद्धसामग्री, आभूषण, कंकाल, प्राचीन सिक्के, दुर्लभ मुगल चित्र, उल्का पिण्ड आदि ५ वीं से १७ वीं शताब्दी की प्राचीन वस्तुओं का संग्रह किया गया हैं। संग्रहालय को ६ खण्डों में तथा दो चित्रशालाओं में बांटा गया है। यहां खण्डों में अनेक विथिकाएं बनी हैं। यह संग्रहालय करीब ८ हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थित है।
आशुतोष संग्रहालय -
कोलकाता के उत्तर में स्थित कोलकाता विश्वविद्यालय के शताब्दी भवन में स्थित आशुतोष म्यूजियम ऑफ इंडियन आर्ट एक दर्शनीय स्थल है। यहां अजंता की गुफाओं, बाघ की गुफाओं, पोलनरूआ, सितनवासल, तिरूदंडिकराई की अनुकृतियां, नेपाली चित्रों का संग्रह देखा जा सकता है। साथ ही जैन, गुजराती, पटना, मुगल, राजस्थानी, कांगडा, दक्षिणी शैली, तिब्बती एवं चीनी शैली, बंगाल की स्थानीय शैली तथा आधुनिक शैली के चित्रों का भी एक अच्छा संग्रह किया गया है। इस संग्रहालय की स्थापना १९३७ ई. में की गई।
साइंस सिटी -
पूर्वी मेट्रोपलिटन बायपास के साथ पार्क सर्कस के जंक्शन पर विशाल क्षेत्रफल में बनी साइंस सिटी आज पर्यटकों के लिए आकर्षण का विशेष स्थल बन गया है। इसकी स्थापना वैज्ञानिक शिक्षण व सोच को बढावा देने के उद्देश्य से १ जुलाई १९९७ में को की गई। इक्कीस वीं सदी के विज्ञान, संचार, पर्यावरण की झांकी को प्रस्तुत करता है। यहां एक प्रदर्शिनी एवं संग्रहालय प्रमुख रूप से दर्शनीय है। परिसर में समुद्रवर्त्ती केन्द्र, स्पेस ओडीसी, क्रम विकास पार्क, डायनामोशन एवं एक विज्ञान पार्क बने हैं। दर्शकों को शिक्षा तथा मनोरंजन के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कोर्नर, जल जीवशाला, भीमकाय, रोबोटिक कीडों पर एक प्रदर्शनी तथा अनेक अन्तः क्रियात्मक प्रदर्शन देखने को मिलते हैं। यहां २२३२ लोगों के बैठने की क्षमता वाला विशाल प्रेक्षागृह बना है। मुक्त प्रदर्शनी में करीब २० हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी है।
शहीद मीनार
नेपाल युद्धमें विजय के प्रतीक के रूप में शहीद मीनार को १८४८ ई. में बनवाया गया। आजादी के बाद इस स्मारक का नाम शहीद मीनार रखा गया, जिससे आजादी की लडाई में अपने जीवन का बलिदान करने वालों को सम्मानित किया जा सकें। कोलकाता मैदान में स्थित यह स्मारक आकर्षण का केन्द्र है।
फोर्ट विलियम
हुगली नदी के किनारे यह किला बना है, जिसे इंग्लैण्ड के राजा विलियम तृतीय के नाम पर १७८१ ई. में बनाया गया। यह वास्तुकला का एक सुन्दर उदाहरण है। यहां सेना का मुख्यालय भी बनाया गया है। किले के सामने एक विशाल पार्क बना है। किले में एक विद्यालय का संचालन भी किया जा रहा है।
जूलॉजिलक गार्डन
अलीपुर रोड पर स्थित जूलॉजिकल गार्डन देश का सबसे बडा चिडयाघर है जिसे एक मई १८७६ ई में स्थापित किया गया। यह चिडयाघर १८.८१ हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है तथा यहां १०८ प्रजाति के १२६६ जानवर पाये जाते हैं। प्रतिवर्ष इस चिडयाघर को ३ करोड से अधिक पर्यटक देखने पहुँचते हैं। यहां अफ्रीकन भैंसा, जन्जीबार, रायल बंगाल टाइगर, अफ्रीकन लॉयन, भारतीय शेर, गैंडा, जिराफ, हाथी, दरियाई घोडा, सांभर, भौंकने वाले हिरन, चितकबरे हिरन सहित बडी संख्या में विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षी देखने को मिलते हैं।
बिडला तारा मण्डल
विक्टोरिया मेमोरियल के समीप स्थित बिडला तारा मण्डल बिडला समूह के द्वारा १९६२ ई. में स्थापित किया गया था। इसे दुनिया की सबसे बडी वेधशाला होने का गौरव प्राप्त है। गुम्बदनुमा गुलाबी भवन की आंतरिक संरचना २५ मीटर व्यास की है। यहां आने वालों को ब्रह्माण्ड में होने वाली खगोलिय घटनाओं को समझने का सुनहरा अवसर मिलता है। यहां पर प्रतिदिन हिन्दी, अंग्रेजी एवं बांग्ला भाषाओं में शो संचालित किये जाते हैं।
कोलकाता में बिडला मंदिर, रेस कॉर्स मैदान, चित्रकूट ऑर्ट गैलेरी, जेनेसिस ऑर्ट गैलेरी, गैलरी लॉ मेरे, सीआईएमए गैलेरी, स्पंदन ऑर्ट गैलरी, ललित कला अकादमी, नाखुदा मजिद, मार्बल पैलेस, नेशनल लाइब्रेरी एवं नेहरू बाल संग्रहालय तथा रवीन्द्र सरोवर आदि अन्य दर्शनीय स्थल हैं।


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