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शिक्षा - सवांद में शहर की हस्तियां सम्मानित, शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए मिला सम्मान

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12 Jun 24
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शिक्षा - सवांद में शहर की हस्तियां सम्मानित, शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए मिला सम्मान

....उदयपुर। नई शिक्षा नीतियों में मेवाड़ के पूर्व इतिहास को जोड़ने एवं नव युवा पीढ़ी को मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप के बारे में जानकारी प्रदान करने हेतु शहर के प्रमुख शिक्षाविदों के संगम शिक्षा सवांद में परिचर्या कार्यक्रम 11 जून को अशोका पैलेस में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में आयोजक मुकेश माधवानी एवं विकास जोशी ने अतिथियों को उपरणा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया।

वीरता, त्याग, बलिदान एवं स्वाभिमान के प्रतीक हैं प्रताप

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भारतीय स्वाभिमान, भारतीय गौरव, भारतीय वैभव, भारतीय त्याग, बलिदान, भारतीय शौर्य, वीरता आदि को गाथा के रूप में कहना चाहेंगे तो हमारे सामने एक ही नाम आता है वो है वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप। महाराणा प्रताप एक ऐसे व्यक्तित्व है जिन्हें 483 वर्ष होने के बाद भी उन्हे श्रद्धा भाव के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप ने 14 वर्ष की उम्र में पहला युद्ध लड़ा। 1567 में जब अकबर ने चितौड़ पर आक्रमण किया तो वहां से प्रताप और उदय सिंह को सुरक्षित निकाला गया। प्रताप की सेना में 20 हजार सैनिक थे जबकि अकबर की सेना में 80 हजार सैनिक थे, उनका पूरा युद्ध गोरिल्ला पद्धति से किया और अंत में अकबर की सेना को पीछे हटना पडा।


डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने घास की रोटी की भ्रांति को किया दूर

प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष इतिहासकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा की शिक्षा को केवल आजीविका के लिए मानना भारतीय विचार से उचित नहीं है। शिक्षा जीवन जीना सिखाने वाली भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षाविद् डीएस कोठारी के शिक्षा आयोग की रिपोर्ट भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए बहुत उपयोगी है। तभी हम मैकाले की दी प्रणाली के प्रदूषण को दूर कर पाएंगे। उन्होंने राणा प्रताप विषय पर संवाद करते हुए हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप की जीत के तथ्य रखे और प्रताप के जन्म स्थान की भ्रांति, घास की रोटी की तथ्यहीन कहानी की भ्रांति को तथ्यपूर्वक दूर किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने प्रलोभनों और सुख सुविधा को ठुकराकर मातृभूमि के लिए लंबा संघर्ष करते हुए मेवाड़ का वो मान बढ़ाया कि 500 वर्षाे बाद भी देश विदेश में मेवाड़ के व्यक्ति को सम्मान की निगाह से देखा जाता है। इसका एकमात्र कारण प्रताप का वो ही संघर्ष है, जो विदेशी मुगलों की सेना से किया गया।
इन अतिथियों की रही गरिमामाय उपस्थिति-कार्यक्रम के संयोजक मुकेश माधवानी ने बताया कि जर्नादन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय एवं ग्लोबल एज्युकेशन कान्क्लेव के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति कर्नल एस. एस. सारदेवोत ने नई शिक्षा नीति एवं महाराणा प्रताप, मुख्य वक्ता मीरा कन्या महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रशेखर ने महाराणा प्रताप का इतिहास विषय पर विचार प्रकट किए। मुकेश माधवानी ने बताया कि कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता बलवीर सिंह राठौड़, भारतीय टेनिस बॉल क्रिकेट कप्तान कुलदीप सिंह राव, बीएन यूनिवर्सिटी के कमल सिंह, केडिया वॉटर के संजय गुप्ता सहित शहर के प्रमुख विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने शिरकत कर विचार प्रकट किए।
शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए हुए सम्मानित-आयोजक विकास जोशी ने बताया कि ग्लोबल एज्युकेशन पिछले कई वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में हर माह आयोजित होने वाले शिक्षा संवाद कार्यक्रम के सम्मान की कड़ी में श्द स्टडी के प्रिसिपल.........मजुमदार एवं इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल की प्रिसिपल शेनिका राय को सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि अध्यापिका के सम्मान में विशाखा गांधी, श्रद्धा पुरी एवं सीमा राठौड़ को बेस्ट टीचर अवॉर्ड एवं सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।


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