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निकहत विश्व मुक्केबाजी के फाइनल में

मुख्य बिंदु
  • पदार्पण कर रही निकहत जरीन (५२ किग्रा) बुधवार को इस्तांबुल में विश्व मुक्कबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने वाली एकमात्र भारतीय रहीं जबकि दो अन्य मुक्कबाजों ने कांस्य पदक से अपना सफर समाप्त किया ।
  • पूर्व जूनियर विश्व चैंपियन जरीन ब्राजील की कैरोलिन डि़ एलमेड़ा के खिलाफ मुकाबले के दौरान संयमित बनी रहीं और अपनी प्रतद्वंद्वी पर पूरी तरह दबदबा बनाये रखा।
  • इससे वह ५२ किग्रा वर्ग के अंतिम चार मुकाबले में सर्वसम्मत फैसले में ५–० से जीत दर्ज करने में सफल रहीं ।
  • लेकिन मनीषा मौन (५७ किग्रा) और पदार्पण करने वाली परवीन हुड्ड़ा (६३ किग्रा) को कांस्य पदक से संतोष करना पड़़ा।
  • मनीषा को टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक इटली की इरमा टेस्टा से ०–५ के सर्वसम्मत फैसले से और परवीन को आयरलैंड़ की एमी ब्रॉड़हर्स्ट से १–४ के विभाजित फैसले से हार का सामना करना पड़़ा।
  • वर्ष २०१९ एशियाई चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता मनीषा अपनी दूसरी विश्व चैंपियनशिप में खेल रही थीं।
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निकहत विश्व मुक्केबाजी के फाइनल में

नई दिल्ली । पदार्पण कर रही निकहत जरीन (५२ किग्रा) बुधवार को इस्तांबुल में विश्व मुक्कबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने वाली एकमात्र भारतीय रहीं जबकि दो अन्य मुक्कबाजों ने कांस्य पदक से अपना सफर समाप्त किया ।

पूर्व जूनियर विश्व चैंपियन जरीन ब्राजील की कैरोलिन डि़ एलमेड़ा के खिलाफ मुकाबले के दौरान संयमित बनी रहीं और अपनी प्रतद्वंद्वी पर पूरी तरह दबदबा बनाये रखा।

इससे वह ५२ किग्रा वर्ग के अंतिम चार मुकाबले में सर्वसम्मत फैसले में ५–० से जीत दर्ज करने में सफल रहीं । लेकिन मनीषा मौन (५७ किग्रा) और पदार्पण करने वाली परवीन हुड्ड़ा (६३ किग्रा) को कांस्य पदक से संतोष करना पड़़ा।

मनीषा को टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक इटली की इरमा टेस्टा से ०–५ के सर्वसम्मत फैसले से और परवीन को आयरलैंड़ की एमी ब्रॉड़हर्स्ट से १–४ के विभाजित फैसले से हार का सामना करना पड़़ा।

वर्ष २०१९ एशियाई चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता मनीषा अपनी दूसरी विश्व चैंपियनशिप में खेल रही थीं। भारतीय मुक्केबाज ने अपने से तकनीकी रूप से बेहतरीन प्रतिद्वंद्वी को ताकतवर मुक्कों से पछाड़़ने की कोशिश की लेकिन टेस्टा का रक्षण बेहतरीन था।