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उन्नत तकनीक के प्रयोग से रेल संचालन में संरक्षा में बढोतरी

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20 Dec 20
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उन्नत तकनीक के प्रयोग से रेल संचालन में संरक्षा में बढोतरी

श्रीगंगानगर, भारतीय रेल सदैव ही नवीनतम तकनीक के उपयोग से रेल परिवहन में सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ.साथ लाइन क्षमता में भी बढोतरी करने के लिए सदैव ही प्रयासरत् रहती है। रेलवे द्वारा सिगनल सिस्टम को अपग्रेड करने में आधुनिकतम तकनीक के उपयोग को सुनिश्चित किया जा रहा है।
 उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री आनन्द प्रकाश के  मार्गदर्शन में रेल संरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, संरक्षा को बेहतर बनाने के लिये सिगनल प्रणाली का अहम योगदान रहता है, इसी को ध्यान में रखकर उत्तर पश्चिम रेलवे पर वर्तमान में स्थापित तथा नये कार्यों में सम्मिलित सिगनल प्रणाली में आधुनिकतम व नवीनतम तकनीक का समावेश किया जा रहा है।
 उत्तर पश्चिम रेलवे पर सिगनल प्रणाली में नवीनतम तकनीकयुक्त इलेक्ट्राॅनिक इंटरलाॅकिंग का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें रेल संचालन में डिजीटल टेक्नोलाॅजी के लाभ मिल सके। नई तरह की सिगनल प्रणाली होने के कारण रेलवे के सिगनल विभाग के कर्मचारियों को इसके रखरखाव, टेस्टिंग व अनुरक्षण सम्बंधी कार्यों में समस्या रहती है और इस प्रणाली से सम्बंधित किसी भी प्रकार की समस्या के लिये निर्माता व उत्पादक पर निर्भर रहना पडता है। इस समस्या के समाधान के लिये इलेक्ट्राॅनिक इंटरलाॅकिंग से सम्बंधित कार्यों जैसे टेस्टिंग व फाल्ट रेक्टीफिकेशन में आत्मनिर्भरता के लिये स्थानीय स्तर पर ही रेलकर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान कर यह कार्य इन-हाउस ही किया जाने लगा है, पहले इसके लिये निर्माता या कम्पनी पर निर्भर रहता पडता था।
 इलेक्ट्राॅनिक इंटरलाॅकिंग प्रणाली के सम्बंध में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की की दिशा में पहला कदम रेलकर्मियों को उपकरण उत्पादक व निर्माता के परिसर में भेजने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर सिमुलेशन वातावरण की स्थापना कर अपने स्तर पर ही फैक्ट्री एक्सेपटेंस टेस्ट का सेटअप विकसित करने के लक्ष्य को प्राप्त किया गया। इसके साथ ही साॅफ्टवेयर लाॅजिक तथा यार्ड के ग्राफिक आधारित डिस्पले यूनिट के प्रोग्राम हेतु विशेषज्ञ टीम को तैयार किया गया।
 उत्तर पश्चिम रेलवे के रेलकर्मियों को विभिन्न चरणों में इंटरलाॅकिंग और विजुअल डिस्प्ले यूनिट के साॅफ्टवेयर लाॅजिक का विस्तृत रूप से प्रशिक्षण प्रदान कर तैयार किया गया। सिगनल और दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों ने इस उन्नत और आधुनिकतम तकनीक का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया और उनके इस सार्थक प्रयास ने आत्मनिर्भरता की ओर बढते कदम को सफलता की प्रशिक्षण प्रदान की। उत्तर पश्चिम रेलवे, मुख्यालय पर फैक्ट्री एक्सेपटेंस टेस्ट का सेटअप तैयार कर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया गया है।
 निर्माता व उत्पादक द्वारा छोटे फेरबदल सम्बंधी व रेक्टीफिकेशन कार्यो के लिए औसतन लगभग 15 लाख से 20 लाख चार्ज किया जाता है। अपने स्तर पर ही इस प्रकार के कार्यों का निष्पादन करने से उत्तर पश्चिम रेलवे पर वर्ष 2020-21 में अब तक लगभग 2.70 करोड़ रुपये के राजस्व की बचत की गई है। रेलवे के इस दूरदर्शी अभियान से राजस्व में बचत हो रही है साथ ही स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्राॅनिक इंटरलाॅकिंग प्रणाली से सम्बंधित छोटे अनुरक्षण व फेरबदल सम्बंधी कार्यों को निष्पादित करने में समय की भी बचत हो रही है। रेलवे का यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढता कदम है।


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