स्वास्थ्य एवं खुशहाली एक मात्र विकल्प है जैविक खेती 

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01 Apr 19
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स्वास्थ्य एवं खुशहाली एक मात्र विकल्प है जैविक खेती 

झालावाड़ राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के. गोयल ने रविवार को असनावर उपखण्ड के ग्राम मानपुरा में जैविक खेती के पर्याय पदमश्री प्राप्त प्रगतिशील किसान हुकमचन्द पाटीदार से मुलाकात कर राजस्थान में जैविक खेती की संभावनाओं पर चर्चा की। 

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। देश के किसानों एवं आमजन के स्वास्थ्य व खुशहाली के लिए जैविक खेती ही एक मात्र विकल्प है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके उत्पाद का कम लागत में अच्छा दाम मिले ओर उपभोक्ता को भी उचित मूल्य पर गुणवत्ता परक उत्पाद की उपलब्धता हो इसके लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा सार्थक प्रयास किए जा रहे है ताकि किसान और उपभोक्ता दोनों कों लाभ मिल सके। 

उन्होंने कहा कि हुकमचन्द पाटीदार जैसे प्रगतिशील कृषक ही कृषि की दिशा और दशा सुधारने में सहायक सिद्ध हो सकते है। जैविक खेती करने से न सिर्फ किसान व उपभोक्ता को लाभ मिलेगा बल्कि भूमि का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और गौ वंश में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि जोत (भूमि) लगातार छोटी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि लघु और सीमान्त कृषक सहकार आधारित कृषि को अपनाएं और कलस्टर बनाकर खेती करें तो कृषि व्यवसाय लाभकारी हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान को उसके उत्पाद का उचित दाम मिले इसके लिए फूड प्रोसेसिंग ऑर्गेनाइजेशन की महत्ती आवश्यकता है। उन्होंने इस दौरान उप निदेशक कृषि अतिश कुमार शर्मा से जिले में जैविक खेती की प्रगति में आ रही समस्याओं का एक नोट बनाकर भिजवाए जाने के निर्देश दिए है। 

इस दौरान प्रगतिशील किसान हुकमचन्द पाटीदार ने बताया कि प्राकृतिक और गौ वंश आधारित कृषि को ही मुख्य रूप से जैविक खेती कहते है। उन्होंने बताया कि किसान आयोग अब कृषि में परिवर्तन चाहता है। कृषक निरन्तर उसी भूमि पर फसलें उगा रहे हैं। रसायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों का प्रयोग बिना सोचे समझे करने से उनकी जमीन का मृदा स्वास्थ्य खराब हो गया है। सर्व प्रथम वे अपनी भूमि (मृदा) स्वास्थ्य की जांच कराएं और धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर बढें, वर्मी कम्पोस्ट व गोबर की खाद और फसल चक्र को अवश्य अपनाएं। उन्होंने बताया कि बगैर गौवंश के जैविक खेती की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी अवश्य अपनाएं। उन्होंने बताया कि जैविक खेती के लिए बीज व कीटनाशक एवं जैविक खाद स्वयं तैयार करते है।

उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढावा देना है तो कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किए जाने वाले अनुसंधान प्रकृति को केन्द्र में रखकर ही करने चाहिए।

उप निदेशक कृषि अतिश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में पहले से ही 4 हजार 500 कृषक जैविक खेती कर रहे है और विभाग द्वारा प्रयास कर गत वर्षों में 4 हजार कृषकों को और जैविक खेती से जोडा गया है। इस दौरान कृषि विपणन बोर्ड के अधिशासी अभियन्ता दिनेश गौड, कृषि उपजमंडी सचिव हरिमोहन बैरवा, सहायक निदेशक कैलाश चन्द शर्मा, एफपीओ असनावर हरि सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। 


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