झारखंड की सहिया- सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए सर्वत्र प्रेरणा स्रोत

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01 Jul 20
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झारखंड की सहिया- सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए सर्वत्र प्रेरणा स्रोत

नई दिल्ली |  झारखंड के बोकारो जिले के तेलो गांव की कमरूनिसा और उनके पति नूर मोहम्मद 13 मार्च, 2020 को जमात में शामिल होने के बाद अपने घर लौटे। उनकी हवाई अड्डे पर कोविड-19 के लिए जांच की गई और उन्हें अपने गांव में घर में पृथकवास करने की सलाह दी गई। गांव में सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) जिन्हें इस राज्य में सहिया कहा जाता है, ने घर-घर के सर्वेक्षण में यह सूचना प्राप्त की।

इस सहिया ने ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को तुरंत इसकी जानकारी दी और पति-पत्नी को नियमों के अनुसार घर में पृथकवास करने के बारे में परामर्श दिया और नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की स्थिति और स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओं की जानकारी लेती रहीं। कमरूनिसा को जांच में पॉजिटिव पाया गया और तुरंत उसे बोकारो जनरल अस्पताल में पृथकवास में रखा गया। रीना देवी नाम की सहिया ने एक चिकित्सा दल उनके घर अगले दिन भेजने की व्यवस्था की और परिवार के सदस्यों के पृथकवास में मदद दी। सहिया सक्रिय रूप से पति-पत्नी के सक्रिय फॉलोअप में जुटी रही और कोविड-19 से बचाव के बारे में उनके परिवार तथा उसने समुदाय में जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रीना देवी की समय पर की गई कार्रवाई और निरंतर प्रयासों से परिवार के अन्य सदस्यों और समुदाय में संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद मिली।

झारखंड में आशा वर्कर को सहिया के रूप में जाना जाता है और ये अंतिम छोर विशेष रूप से जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करने में मददगार रहती हैं। राज्य में लगभग 42,000 सहिया हैं, जिनकी मदद के लिए 2,260 सहिया साथी, 582 ब्लॉक ट्रेनर, तैयारी के लिए 24 जिला समुदाय सहायक और एक राज्य स्तर सामुदायिक संसाधन केन्द्र है। इस कार्यक्रम की शुरूआत से सहिया को अपनी प्रतिबद्धता और स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने में मददगार एजेंसी के लिए विश्वसनीय सहायक के रूप में जाना जाता है। ये सहिया दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों में पहुंचने के लिए भी कड़ा परिश्रम करती हैं।

सहिया मार्च 2020 से कोविड-19 से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। इन गतिविधियों में कोविड-19 से बचाव के उपायों जैसे कि बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोना, घर से बाहर निकलते समय मास्क और फेस कवर का इस्तेमाल करना, खांसी और छींक के समय सावधानियां बरतने जैसे बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता विकसित करना शामिल हैं।

झारखंड ने अधिक जोखिम वाली आबादी में कोविड-19 के मामलों का पता लगाने के लिए 18 से 25 जून के बीच सप्ताह भर का सघन स्वास्थ्य सर्वेक्षण शुरू किया था। सर्वेक्षण के पहले दिन गांवों और शहरों में सामुदायिक बैठकें की गईं, जिनमें क्षेत्रीय स्तर के गतिविधियों की योजना बनाई गई। इसके बाद तीन दिन सक्रिय रूप से घर-घर का सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण में 42,000 सहिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्होंने घऱ-घर जाकर हजारों परिवारों का सर्वेक्षण किया, ताकि अधिक जोखिम वाली आबादी में इंफल्युएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई), Severe Acute Respiratory Illness (SARI) के लक्षण, 40 वर्ष से अधिक आयु के अन्य बीमारियों, निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार टीका नहीं लगे पांच वर्ष से कम आयु के शिशुओं और पूर्व प्रसव जांच की नजदीक तिथि वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। ILI/SARI के लक्षण वाले लोगों की उसी दिन जांच सुनिश्चित की गई। अधिक आशंका वाले कमजोर पहचान किए गए लोगों का विवरण सक्रिय फॉलोअप के लिए उप-केन्द्र और ब्लॉक/जिला के दलों के साथ साझा किया गया।

सर्वेक्षण के दौरान सहिया ने कई प्रकार के घरों में जा कर कार्य किए (जैसे कि एनएनसी/पीएनसी को परामर्श देना, घरों में नवजात शिशुओं की देखभाल, घरों में कम उम्र के बच्चों की देखभाल, पुरानी बीमारियों से पीड़ित रोगियों के उपचार का फॉलोअप) और इस तरह विभिन्न गतिविधियों में एक ही परिवार में बार-बार जाने की आवश्यकता में कमी आई।

झारखंड की आशा यानी सहिया जिन्होंने मातृ, नवजात शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल संबंधित आवश्यकताओं को पूरा कर अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए कोविड-19 से संबंधित गतिविधियों की सहायता के लिए समय के अनुसार बेहतर कार्य प्रदर्शन किया।

 


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