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दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय "विश्व संस्कृत सम्मेलन" में उदयपुर से दस सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया

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13 Nov 19
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yagya ameta

दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय "विश्व संस्कृत सम्मेलन" में उदयपुर से दस सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया

संस्कृत भारती द्वारा प्रति तीन वर्ष में एक बार आयोजित अखिल भारतीय संस्कृत अधिवेशन के अंतर्गत राजधानी दिल्ली में 9 नवंबर शनिवार से 11 नवंबर सोमवार तक तीन दिवसीय विश्व संस्कृत सम्मेलन आयोजित हुआ। महानगर संयोजक नरेंद्र शर्मा ने बताया कि संस्कृत भारती के इतिहास में पहली बार आयोजित इस विश्व संस्कृत सम्मेलन में भारत सहित विश्व के 22 देशों के संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में संलग्न कार्यकर्ताओं और संस्कृत भाषा के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। 

 इस अवसर पर सम्मेलन में संस्कृत भारती के चित्तौड़ प्रांत के 386 सदस्यों मैं उदयपुर विभाग से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ यज्ञ आमेटा, महानगर संयोजक नरेंद्र शर्मा , महानगर संपर्क प्रमुख हिमांशु भट्ट , महानगर शिक्षण प्रमुख दुर्गा कुमावत , सेंट्रल एकेडेमी उदयपुर से महानगर प्रचार प्रमुख रेखा सिसोदिया, महानगर साहित्य पत्राचार प्रमुख मंगल कुमार जैन, जिला सह संयोजक चैन शंकर दशोरा, महा नगर सह शिक्षण प्रमुख डाॅ रेणु पालीवाल एवं बांसवाड़ा विभाग संयोजक प्रदीप भट्ट, महानगर शिक्षण प्रमुख दुर्गा कुमावत आदि ने भाग लिया। 

   महा नगर पत्राचार प्रमुख मंगल कुमार जैन ने बताया कि विश्व संस्कृत सम्मेलन के अन्तर्गत संस्कृत भारती व भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में व श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नई दिल्ली के संयोजन में आयोजित अन्तराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आदि विषय पर शोध पत्र वाचन करने पर उदयपुर से गए प्रतिनिधिमंडल को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विश्व संस्कृत सम्मेलन का उद्घोष वाक्य 'विश्वे संस्कृतम्' के अन्तर्गत सम्पूर्ण विश्व में संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए दिल्ली में एकत्रित लगभग 5000 कार्यकर्ताओं ने विभिन्न सत्रों में आयोजित वार्ता , चर्चा, गोष्ठी  प्रदर्शनी आदि कार्यक्रमों में भाग लिया । इस अवसर पर "विश्व में संस्कृत" विषय पर एक विशाल संस्कृत प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया  जिसका उद्घाटन  केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन  द्वारा किया गया।        

 सम्मेलन में उपस्थित देश विदेश से आए 5000 से अधिक संस्कृत संभाषणशील: कार्यकर्ताओं को संस्कृत के गुण रहस्य , विकास  एवं  भारत की सांस्कृतिक  आध्यात्मिक  वैज्ञानिक एवं शैक्षिक आधारशिला संस्कृत के विकास पथ को प्रभावी रूप से उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल, केन्द्रीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय मंत्री डाॅ हर्षवर्धन ,जूनागढ़ पीठासीन स्वामी अवधेशानंद जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह श्री सुरेश जी सोनी, सांस्कृतिक पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल , हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर ने  प्रभावी एवं आकर्षक रूप से  उपस्थित जनसमुदाय को  मंत्रमुग्ध  किया , तथा प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या में पद्मविभुश्री सोनल मानसिंह ने आकर्षक एवं मनमोहक प्रस्तुति प्रदान की।


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