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राजस्थान के दो मुख्यमंत्री वागड़ शक्ति पीठ माता त्रिपुरा सुन्दरी के अनन्य भक्त बने

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26 Mar 23
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राजस्थान के दो मुख्यमंत्री वागड़ शक्ति पीठ माता त्रिपुरा सुन्दरी के अनन्य भक्त बने

नई दिल्ली। धर्म निरपेक्ष भारत में अनेक राजनेताओं के मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारों चर्च आदि धार्मिक स्थलों पर जाने और साधु संतों से आशीर्वाद लेने के कई किस्से देखें और सुने जातें रहें हैं। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस परम्परा को देश की सीमाओं से बाहर भी फैलाया है और अरब सहित अन्य कई देशों में भव्य भारतीय मन्दिर के निर्माण भी हुए है तथा हों रहें हैं।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोद्धा में बन रहें विशाल राम मन्दिर की प्रगति को स्वयं समीक्षा करते है। उन्होंने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी सहित देश के विभिन्न विख्यात धार्मिक स्थलों पर विशाल कोरिडोर बनाने की दिशा में सराहनीय पहल कर भारत की विश्व के आध्यात्मिक गुरु होने की पहचान को एक नया रूप दिया है।


इन दिनों देश में चैत्री नवरात्री की धूम है । हिन्दू धर्वावलंबी इन दिनों देवी की पूजा अर्चना में जुटे हुए हैं। इस मध्य पाठक एक दिलचस्प संयोग को पढ़ कर आनंदित होंगे। दक्षिणी राजस्थान के वागड़ अंचल के बाँसवाड़ा में माता त्रिपुरा सुन्दरी का एक अति प्राचीन देवी मन्दिर है । इसे वागड़ का शक्ति पीठ माना जाता है। यह एक सुखद संयोग ही कहा जा सकता है कि प्रदेश के दो मुख्यमंत्रियों श्री हरिदेव जोशी और श्रीमती वसुन्धरा राजे माता त्रिपुरा सुन्दरी की अनन्य भक्त बनी और दोनों राजनीति के शिखर तक पहुँचें। त्रिपुरा सुन्दरी दिवंगत मुख्यमंत्री श्री हरिदेव जोशी की आराध्य देवी थी और उन्होंने बियाबान जंगल के मध्य स्थित माता के इस मन्दिर का सर्व प्रथम जीर्णोद्धार कराया और यहाँ कई धार्मिक आयोजन करायें वहीं राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने माता के मन्दिर को अति भव्य स्वरूप देने में महती भूमिका निभाई।


विलक्षण व्यक्तित्व के धनी राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी की माता त्रिपुरा सुन्दरी में गहरी आस्था थी। वे माता के अनन्य भक्त थे । वे अपने गृह अंचल की हर यात्रा की शुरूआत बांसवाड़ा से सत्रह किमी दूर तलवाड़ा कस्बे और हवाई पट्टी के निकट स्थित त्रिपुरा सुन्दरी शक्ति पीठ के अति प्राचीन मंदिर में जाकर ही करते थे। वे वहां पूजा अर्चना करने के बाद ही अपना दूसरा कोई काम शुरू करते थे।उनकी इस आस्था का ही परिणाम रहा कि एक छोटे से गाँव में गरीब परिवार में जन्मे जोशी राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री बने। उनके अथक प्रयासों से त्रिपुरा सुन्दरी देवी का यह तीर्थ निरन्तर विकसित और देश-विदेश में प्रसिद्ध होता गया। श्री जोशी ने पांचाल समाज के साथ मिल इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और प्राण प्रतिष्ठा आदि आयोजनों में गहरी रूचि लेते हुए इस प्राचीन पीठ तक आने जाने वाले मार्गों और सड़कों आदि का निर्माण करवा आवागमन को सुगम बनाया ।


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