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ग्रामीणों के दुख - दर्द समेटने की पहल कोटा में हो रही है सार्थक

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26 Oct 21
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ग्रामीणों के दुख - दर्द समेटने की पहल कोटा में हो रही है सार्थक

कोटा | ग्रामीणों के दुख - दर्द समेट कर उनकी बरसों की समस्या के समाधान की पहल प्रशासन गांवों की ओर अभियान मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने जिस मंशा से की हैं वह कोटा जिले में सार्थक हो रही हैं। लोगों की आशा पूरी कर अभियान उनके चेहरों पर मुस्कान ला रहा हैं। शिवरों में उपस्थित कई विभागों के अधिकारी उपस्थित हो कर सरकार की मंशा के अनुरूप ग्रामीणों को राहत प्रदान कर रहे हैं। जिला कलेक्टर उज्ज्वल राठौर पूर्ण रूप से संवेदनशील हो कर मुस्तैदी से प्रतिबद्ध है कर जुटे हैं कि एक भी व्यक्ति समस्या के समाधान से वंचित नहीं रहे। उनके नेतृत्व में पूरी टीम मनोयोग से जुटी हैं।
मौके पर लाभ
       राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों क्षेत्रों में 21 विभागांे से संबंधित समस्याओं के घर बैठे निराकरण के लिए चलाये जा रहे प्रशासन गांवों के संग अभियान ग्रामीणों के लिए घर बैठे गंगा आने के मुहावरे को चरितार्थ कर रहे हैं। विभागों द्वारा समस्याओं का मौके पर निराकरण के साथ पात्र नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है।
देवली में 231 पट्टे वितरण एवं 24 बंटवारा प्रकरण में राहत प्रदान की गई।
261 को आवासीय पट्टे जारी
    प्रशासन गांव के संग अभियान के तहत कनवास उपखण्ड के गांम पंचायत देवलीमांझी में सामुदायिक भवन में शिविर  प्रभारी उपखण्ड अधिकारी राजेश डाागा ने बताया कि  पंचायत राज विभाग ने 231 पट्टे जारी किये, सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ 59 पेंशन स्वीकृत कर प्रदान किया गया। समाज कल्याण विभाग ने 06 परिवारों को पालनहार योजना का लाभ दिलाया। राजस्व विभाग ने आपसी सहमति 24 मामलों में बंटवारा , 127 मामलों में खातों में शुद्धि कर  नामांतरण के 146 प्रकरण में राहत प्रदान की गई। मदनपुरा में 261 परिवारों को मिले आवसीय पट्टे की सौगात मिली।
बंटवारे की खुशी से गले मिले
     वर्षों से लम्बित पैतृक भूमि का शिविर में हुआ बंटवारा हुआ। ग्राम देवली  के भंवरलाल एवं दीपचन्द के लिए घर बैठे गंगा आने के समान साबित हुआ। दोनों भाईयों की पैतृक भूमि का बंटवारा वर्षों से लम्बित चला आ रहा था। जिसके कारण भाईयों एवं परिजनों में भी मनमुटाव हो रहा था। 25 अक्टूबर सोमवार को गांव में आयोजित शिविर में जब कास्तकार भंवरलाल ने अपनी पीड़ा एसडीएम राजेश डागा को बताई तो उन्होंने दूसरे पक्षकार दीपचन्द को बुलाकर भूमि का बंटवारा करने के बारे में जानकारी देकर उसके फायदे बताये। एसडीएम ने कहा कि परिवार को एक जुटरखने के लिए भूमि का आपसी सहमति से बंटवारा जरूरी है जिससे आपसी मनभेद समाप्त किये जा सके। उन्होंने दोनों भाईयों को बैठाकर तहसीलदार आमोद कुमार माथुर, भू.अ. निरीक्षक अजयसिंह राजावत को भंवरलाल एवं दीपचन्द की भूमि का रिकॉर्ड के अनुसार बंटवारा कर समझााइश करा कर दोनों भाईयों की राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 35 बीघा भूमि का आपसी सहमति से बंटवारा किया।
बंटवारा के कागजात मिलते ही दोनों भाईयों ने गले मिलकर खुशी का इजहार किया। भंवरलाल ने बताया कि सामलात भूमि का बंटवारा करने के लिए अनेक बार प्रयास किये गये लेकिन उपखण्ड स्तर पर कभी कोई पक्ष तो कभी दूसरा पक्ष जाने में असमर्थ होता था, जिससे परिवार में भी मनमुटाव की स्थितियां बन रही थी, अब बंटवारा होने से परिवार में आपसी भाईचारा बढेगा। इसी शिविर में अतिक्रमण हटा कर, सीमा ज्ञान करा कर विद्यालय के लिए
5 बीघा भूमि का आवंटन कर मजमे-आम में अतिक्रमियों को पाबन्द किया किया कि भविष्य में अतिक्रमण नहीं करें अन्यथा पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज कराई जायेगी।  
शकुन्तला से  बनी सुगना 10 वर्षों की समस्या हुई दूर
         यह शिविर कनवास निवासी सुगना देवी के लिए भी वरदान साबित हुआ। पंचायत के गांव देवली-मांझी व ढीकोली में पिता के नाम पैतृक भूमि थी जिसमें सुगना का नाम शकुन्तला दर्ज हो गया। जिसके कारण उसको योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
एसडीएम ने  प्रकरण में राजस्व विभाग की टीम से सम्पूर्ण  जांच करवाई तो 10 वर्ष पूर्व पिता से प्राप्त भूमि में सुगना के स्थान पर शकुन्तला दर्ज होना पाया गया। प्रभारी ने सहखातेदारों के शपथ-पत्र तैयार कराये तथा तहसीलदार कनवास की रिपोर्ट व सहखातेदारों की शपथ-पत्र के आधार पर प्रकरण को राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 88,89 के तहत प्रार्थीया का नाम शकुन्तला के स्थाना सुगना पुत्री मोहनलाल दर्ज करने के आदेश जारी किये गये। आदेश जारी होने पर सुगना ने कहा भला हो सरकार का जो गरीबों की सुनवाई घर बैठे हो रही है नही तो पिछले 10 साल से जानकारी के अभाव में समस्या का हल नहीं हो पा रहा था। उसने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया।


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