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संनिर्माण श्रमिक योजनाओं का नहीं मिल रहा पूरा लाभ: किरण माहेश्वरी

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15 Feb 20
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Kiran Maheshwari

संनिर्माण श्रमिक योजनाओं का नहीं मिल रहा पूरा लाभ: किरण माहेश्वरी

पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधायक किरण माहेश्वरी (Kiran Maheshwari)ने अतारांकित प्रश्न के माध्यम से भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण मंडल की योजनाओं के बारे में राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया। मंडल ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर जहां वर्ष 2017 -18में 361 करोड़ रुपए, वर्ष 2018 19 में 440 करोड़ रुपए व्यय किए थे, वहीं चालू वर्ष में मात्र 304 करोड़ रुपए ही खर्च हुए हैं।

किरण ने बताया कि वर्तमान वर्ष में उदयपुर जिले में श्रमिकों के 8000 आवेदन पत्र स्वीकृत किए गए एवं 6000 आवेदन पत्र निरस्त कर दिए गए। इसी प्रकार राजसमंद जिले में 3300 आवेदन स्वीकार किए गए एवं सोलह सौ आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए। बड़ी संख्या में आवेदन पत्रों को अस्वीकार कर दिए जाने से श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। निर्माण श्रमिकों के पंजीयन आवेदन पत्र भी बड़ी संख्या में लंबित हैं।

किरण ने कहा है कि श्रमिक कल्याण के लिए भवन एवं निर्माण गतिविधियों पर राज्य सरकार विशेष शुल्क वसूल करती है। इसका उपयोग श्रमिकों के कल्याण के लिए समयबद्ध रूप से होना चाहिए, किंतु प्रशासनिक लापरवाही के कारण मंडल के पास अर्जित राजस्व का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

परिवहन निगम की चरमाराती स्थिति

किरण माहेश्वरी ने परिवहन पर विशेष चर्चा में सरकार का ध्यान परिवहन निगम की चरमाराती स्थिति की तरफ खिंचा। किरण नें कहा कि रोडवेज के अंदर बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं किंतु नई भर्तियां नहीं की गई। इस कारण कई मार्गों पर बस संचालन बंद हो गया है। 2016 से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी एवं अवकाश के बदले नकद का भुगतान नहीं किया गया है। इसका दायित्व लगभग 400 करोड रुपए है। किरण नें सेवा निवृत कर्मियों के सभी बकाया भुगतान शीघ्र किए जाने की मांग की।

निगम में 15 सौ से अधिक बसें चलने योग्य नहीं है,नाकारा हो चुकी है। वर्तमान सेवाओं के स्तर को बनाए रखने के लिए इन बसों के स्थान पर नई बसें लिया जाना आवश्यक है। किरण नें लोक परिवहन सेवा बंद करने एवं वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करने से ग्रामीण क्षेत्रों में होरही असुविधा पर रोष व्यक्त किया। लोक परिवहन में सरकार को 30000.- प्रति माह का राजस्व भी मिलता था। 14 महिनों में एक भी वस नहीं खरीदी गई। राजसमंद डिपों में 42 बसे थी, अब मात्र 20 बसें ही रह गई।

किरण में ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसों पर कर कम करने की मांग की। अभी 300 किमी की न्युनतम दूरी पर 250 रु. प्रति सीट कर लिया जाता है। इसे घटा कर 150रु प्रति सीट किया जाए। कर दूरी के आधार पर खंड बना कर लिए जाएं। राजसमंद में भीम से लेकर देलवाड़ा और कुम्भलगढ़ से गंगापुर तक राष्ट्रीय राजमार्ग ही है। यहां उपनगरीय सेवा,जो संभाग मुख्यालय पर चल रही है, यहां पर भी लागु की जाए। इससे निजी बस वाले बस सुविधा दे सकेंगे।

किरण नें कहा कि ग्रामीण मार्गो पर अनुज्ञा केवल एक तहसील के लिए ही दी जा रही है। इस कारण बस स्वामी बस चलाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। ग्रामीण बस के लिए अन्तर्तहसील मार्गों के लिए अनुज्ञा दी जाए। संविदा परिवहन की बसों पर भी कर बहुत ज्यादा है। इस कारण बस मालिक नियमित परिवहन सेवा की अनुज्ञा लेलेते हैं किन्तु बस चलाते नहीं है। संविदा परिवहन बसों को पुरे संभाग के लिए अनुमत किया जाए, ताकि स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिले।

किरण नें कहा कि सरकार नें कलस्टर मार्गों के लिए न्युनतम 25 बसों के स्वानियों को ही अनुमति दी है। इस कारण छोटे बस मालिक इसमें काम नहीं कर पा रहे हैं। न्युनतम बसों की शर्त को 5 बस कर दे, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और छोटे बस मालिको को भी अवसर मिलेगा।

 

किरण माहेश्वरी ने शून्यकाल में विशेष उल्लेख के माध्यम से पंचायतों में प्रशासक लगाए जाने का विरोध किया और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत पंचायती राज अधिनियम 1994 लागू किया। संविधान के अनुच्छेद 243 में भी पंचायतों के चुनाव 5 वर्षों के भीतर करवाना अनिवार्य है। सैकड़ों पंच एवं सरपंच के नामांकन पत्र भर दिए गए। उन्हें चीज करके और पंचायतों में प्रशासक लगाकर लोकतंत्र का मजाक उड़ाया गया है।

पंचायतों को 3 माह से केन्द्र सरकार द्वारा दी गई राशि का हस्तांतरण नहीं

किरण माहेश्वरी ने इस पर भी रोष व्यक्त किया कि केंद्र सरकार द्वारा 14वें वित्त आयोग की पंचायतों के लिए दूसरी किस्त के रूप में 1840 करोड रुपए अक्टूबर 2019 में सरकार को मिल गए थे। यह राशि पंचायतों के खाते में 10 दिन में अंतरित कर दी जानी चाहिए थी, किंतु 3 माह बीतने के बाद भी सरकार ने पंचायतों को यह धनराशि स्थानांतरित नहीं की है। यह पंचायती राज को कमजोर करने का षड्यंत्र है। सरकार 1 सप्ताह के अंदर अंदर दूसरी किस्त की देय राशि पंचायतों को अंतरित करें। भविष्य में भी जब भी केंद्र सरकार से पंचायती राज संस्थाओं के लिए धनराशि आती है तो उन्हें 10 दिन के अंदर अंदर पंचायतों के खाते में जमा करवाया जाना चाहिए।


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