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उच्च शिक्षा में मानवीय मूल्य का समावेश पर पांच दिवसीय राष्ट्रिय कार्यशाला

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21 Sep 21
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उच्च शिक्षा में मानवीय मूल्य का समावेश पर पांच दिवसीय राष्ट्रिय कार्यशाला

 


उच्च शिक्षा को मानवीय मूल्यों के साथ नये सिरे से परिभाषित करने की महत्ती आवश्यकता : प्रो. एच.डी. चारण, राष्ट्रिय अध्यक्ष, मानवीय मूल्य समिति एआईसीटीई

21 सितम्बर, मूल्य एवं संस्कार आधारित प्रणाली ही हमारी उच्च शिक्षा व्यवस्था की धरोहर है, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में संस्कार आधारित शिक्षा का समावेश कर शिक्षा के उद्देश्य परक मूल्य निर्धारित करने होंगे, हमें एक बार पुन: अपने गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित कर मूल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था के नवीन स्वरूप के साथ राष्ट्रिय शिक्षा नीति को सार्थक करने की आवश्यकता हैं। राष्ट्रिय शिक्षा नीति में मूल्य आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया। प्रो.एच.डी. चारण, राष्ट्रिय अध्यक्ष, मानवीय मूल्य समिति एआईसीटीई और बीकानेर तकनीकी विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली दुवारा आयोजित पाँच दिवसीय राष्ट्रिय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए अपने विचार प्रकट किए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उल्लेखित अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए मानवीय मूल्य शिक्षा के आधार पर व्यक्ति तैयार करने के लिए एवं तकनीकी शिक्षा में मानवीय मूल्यों के सफल क्रियावयन के उदेश्य से देश की तकनीकी शिक्षा का नियमन करने वाली सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली दुवारा यह ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमे पूरे देश से 600 से अधिक शिक्षक राष्ट्रिय स्तर पर प्रतिभागिता निभा रहें हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना शिक्षा मूल रूप से मानव का समग्र विकास करने के लिए समता पूर्ण एवं न्याय पूर्ण समाज तैयार करने के लिए एवं राष्ट्र के विकास के लिए होती है, ऐसे में सार्वभौमिक माननीय मूल्य शिक्षा ही एकमात्र उपाय है इसी एजेंडे पर इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है ऐसे अब तक पूरे देश के 50,000 से ज्यादा शिक्षकों का प्रशिक्षण किया जा चुका है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली के मानवीय मूल्य प्रभाग दुवारा विषय विशेषज्ञयों के निर्देशन में तैयार मूल्य आधारित शिक्षा का यह दृष्टिकोंण सम्पूर्ण देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली को लागू करने पर बल देता है।

प्रो. चारण ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए आव्हान किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हम सभी शिक्षकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी है सबसे पहले उन्हें इसे अपने व्यवहार में एवं कार्य में प्रदर्शित करना है ताकि यह विद्यार्थियों तक जा सके एवं विद्यार्थियों से संपूर्ण समाज को जा सके इससे आगामी पीढ़ी का निर्माण होगा जो न्याय पूर्ण एवं संपूर्ण समाज का निर्माण करेगा एवं राष्ट्र के विकास में भागीदारी निभाएगा इसी तरह की भागीदारी से ही हमारा राष्ट्र दूसरे राष्ट्रों के विकास में सहयोगी होगा और इस तरह से वसुधैव कुटुंबकम के भावना के साथ हमारा भारतवर्ष एक बार पुन: जगत गुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।

 

मूल्य आधारित शिक्षा प्रगतिशील, समृद्धशाली, सृजनशील एवं नैतिक मूल्यों से परीपूर्ण ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है जो भारत को संस्कारों के संरक्षण की दिशा में वैश्विक स्तर पर सिरमौर बनाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का दृष्टिकोंण की मूल भावनानुरूप हमें सम्पूर्ण देश में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और संस्कारित वातावरण तैयार करने, राष्ट्रीय विकास और वैश्विक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधार मानते हुए यह योजना शिक्षा के साथ संस्कारित विद्यार्थियों की भावी पीढी तैयार करने पर बल देती हैं। देश के संस्कार आधारित गौरवशाली भारतीय परंपरा को जारी रखने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समग्र रूप से परिभाषित करती है। ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ की भावना को आत्मसात करते हुए हमें उच्च शिक्षा में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता हैं।

प्रो. चारण ने कहा की इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था को नया आधार प्राप्त होगा और हमारे विद्यार्थी और सक्षम और सशक्त बनेंगे, हमें प्राचीन ज्ञान प्रणाली के संरक्षण के साथ हमारे विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों को नैतिक मूल्यों के स्वरूप से अवगत करना होगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्टता के साथ एक बहुत ही उपयुक्त समय पर शिक्षकों, छात्रों, हितधारकों, समाज, देश के लिए मूल्य आधारित शिक्षा पर बल दिया गया है। सार्वभौमिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक न्याय, समानता, वैज्ञानिक उन्नति, राष्ट्रीय एकीकरण, सांस्कृतिक संरक्षण, सतत् प्रगति एवं आर्थिक विकास का शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराना भारत की शिक्षा व्यवस्था का भविष्य निर्धारित करता है। किसी देश का विकास उस देश की शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है और भारत प्राचीन काल से अपनी विद्वत्ता के लिए प्रसिद्ध रहा है। इन्हीं मूल्यों को अपनाकर हम जीवन स्तर में सुधार कर सकते है। आज उच्च शिक्षा को नये सिरे से परिभाषित करने की महत्ती आवश्यकता है।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली देश में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में मानवीय मूल्यों के क्रियान्वयन पर विस्तृत कार्य योजना के साथ सम्पूर्ण देश में कार्य कर रहा है। देश में समग्र मूल्यों पर आधारित शिक्षा के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने बहुत ही दूरदर्शिता और और मजबूत नीति के साथ इस अभियान जो पुरे देश में अमलीजामा पहनाया हैं। राजस्थान प्रदेश में प्रो.एच.डी चारण को बीकानेर तकनीकी विश्विद्यालय के कुलपति रहते हुए शिक्षा में मानवीय मूल्यों के समावेश से अवगत कराने और इसके सफल क्रियावयन का श्रेय जाता है, जिसे राष्ट्रीय स्तर और प्रदेश की तकनीकी शिक्षा में नैतिक उन्नयन के नवाचार के रूप में रेखांकित किया गया है। वर्तमान में प्रो.चारण इस समिति के राष्ट्रिय अध्यक्ष कर रूप में सम्पूर्ण देश में उच्च शिक्षा में मानवीय मूल्यों की अलख जगा रहे हैं । उनके इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से तकनीकी शिक्षा में कई आशाजन परिणाम सामने आए थे। सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित इस अभियान से विद्यार्थियों सहित उनके परिवारों में भी आदर्श वातावरण विकसित हुआ।


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