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सुविवि- पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने विश्व प्रेस स्वंतत्रता दिवस पर किया ऑनलाइन विमर्श

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03 May 21
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सुविवि- पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने विश्व प्रेस स्वंतत्रता दिवस पर किया ऑनलाइन विमर्श

 



 

उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से सोमवार को विश्व प्रेस स्वंतत्रता दिवस पर "कोरोना महामारी एवं टीकाकरण जागरूकता अभियान में मीडिया की भूमिका" विषय पर ऑनलाइन विमर्श हुआ। 
मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार में सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने कहा कि वर्तमान में कोरोना के चलते तस्वीर निराशाजनक है इससे उबरने में मीडिया सहायक हो सकता है। उन्होंने मीडिया की ताकत का जिक्र करते हुए बताया कि मीडिया नायक को खलनायक और खलनायक नायक बना सकता है। हमें यह देखना होगा कि समाज के वंचित वर्ग मीडिया को किस प्रकार परिभाषित करता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार जगत को क्लास मीडिया नहीं बल्कि मास मीडिया होना चाहिए। वर्तमान में हमारे समक्ष कई चुनौतियां हैं, जनता को सांत्वना देने की चुनौती, लोगों को उपचार दवाई मिले इसकी चुनौती, जनता का मनोबल ऊंचा रहे इसकी चुनौती और विश्व की महफिल में भारत अपना सर उठा सके उसकी चुनौती। उन्होंने कोरोना संकट पर मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या मीडिया ने सही सवाल पूछे। क्या मीडिया ने सवाल उठाए जब विशेषज्ञ बता चुके थे मार्च के महीने में कि कोरोना की दूसरी लहर आएगी। बारेठ ने कहा कि  मीडिया की इसमें कहीं ना कहीं चूक रही है। उन्होंने मीडिया की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि कई पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर भी लोगों की पीड़ा एवं तकलीफ को सबके सामने रख रहे हैं, इससे  सरकार भी सचेत हो रही है । उन्होंने दिल्ली के एक संगठन द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कोरोनावायरस के चलते 100 पत्रकारों ने अपनी जान गवाई है, उनमें से 50 में अपने जीवन का बलिदान अप्रैल के महीने में दे  दिया। 
नारायण  बारेठ  ने वर्तमान स्थिति और 1918 में स्पेनिश फ्लू के समय की स्थिति में तुलना करते हुए बताया कि 1918 में हमारे पास ज्यादा सुविधाएं नहीं थी। संसाधन नहीं थे इसलिए हमने अपनी आबादी का 6 प्रतिशत हिस्सा खोया। लेकिन आज हमारे पास संसाधन है, आवश्यकता है तो बस उनके प्रबंधन की। उन्होंने कहा कि मीडिया ऐसा वातावरण तैयार कर सकता है जिसमें सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर इस संकट का सामना करें।  नारायण बारेठ ने लोक डाउन के समय प्रवासी मजदूरों के सड़कों पर होने के मसले पर मीडिया की खामोशी पर सवाल उठाए। उन्होंने आगे कहा कि मीडिया में संक्षिप्त में, सारे रूप में, चित्र मय शैली में खबरें लिखी जानी चाहिए जिसकी रोशनी से इंसानियत निर्देशित हो सके। उन्होंने कहा कि भारत में करोड़ों पाठक हिंदी भाषा के हैं तथा चार सौ से ज्यादा चैनल हैं। इससे काफी व्यापक रूप में लोगों को शिक्षित किया जा सकता है। उन्होंने पत्रकारों को सलाह देते हुए कहा कि वे सच लिखें, इस बात की परवाह ना करें कि मालिक को फायदा होगा या नुकसान। उन्होंने कहा कि पत्रकार पुल पर खड़े निगेहबान की तरह होता है जो दरिया में आने वाले जहाजों पर नजर रखता है।
विशिष्ट अतिथि न्यूज़ चैनल आजतक के  संपादक शरत कुमार ने कहा कि कोराना में दवा से ज्यादा साहस की भूमिका है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए सक्सेस स्टोरी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा रहे हैं। सरकार की कमी को भी बताते हैं। कोरोना में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। मीडिया में हम किसी चीज की कमी को लेकर पेनिक नहीं मचा रहे बल्कि इस समस्या को स्वास्थ्य मंत्री और अधिकारियों तक पहुंचा कर उसका समाधान करवा रहे हैं। इसके साथ ही मीडिया प्रखर आलोचक की भूमिका भी निभा रहा है। मीडिया जनता के प्रति जवाबदेही तय करते हुए सरकार को जवाबदेह बनाएं। सरकार के नियम कायदे ठीक से लागू करने के लिए जन जागरण भी करें। दंडात्मक प्रावधान भी ठीक से कैसे लागू हो उसे दिखाएं।
विशिष्ट अतिथि जनसंपर्क  विभाग के उपनिदेशक डॉ. दीपक आचार्य ने कहा कि मौजूदा दौर विषमता और मानवीय संवेदना का दौर है, जिसमें मीडिया अपनी भूमिका निभा रहा है जो शुभ संकेत है।
जैसलमेर सहित सीमावर्ती इलाकों में भी मीडिया ने सक्सेस स्टोरी के माध्यम से लोगों को मोटिवेट किया है। इसके साथ ही सूचना एवं जनसंपर्क विभाग भी बहुत सक्रिय हैं और प्रचार के सारे माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्ष मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह ने कहा कि कोरोना और टीकाकरण जागरूकता में मीडिया का योगदान अमूल्य है। महामारी के दौरान जो भी सूचना है हमें मिल रही वह मीडिया के माध्यम से प्राप्त हो रही है। विश्वविद्यालय में भी मीडिया और पत्रकारिता विभाग को मजबूत किया गया है। इसके साथ ही पत्रकारिता विभाग को भी स्वतंत्र बनाए रखने ओर उन्नयन के लिए विश्वविद्यालय फंड उपलब्ध कराएगा।
प्रबन्ध अध्ययन संकाय के निदेशक प्रो हनुमान प्रसाद ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय बौद्धिक संपदा के सृजन में अग्रणी है, विश्वविद्यालय में 100 अधिक शोध परियोजनाएं चल रही है।
कार्यक्रम का संचालन एवम विषय प्रवर्तन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य ने किया। इस के साथ ही डॉ. आचार्य ने राज्यपाल कलराज मिश्र के शुभकामना संदेश का भी वाचन किया। सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता प्रोफेसर सीमा मालिक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


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