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माँ सबसे अच्छी और निकटतम मित्र: डॉ.राठौड़

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28 Jun 20
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माँ सबसे अच्छी और निकटतम मित्र: डॉ.राठौड़

माँ सबसे अच्छी और निकटतम मित्र: ये बात महाराणा प्रताप  कृषि एवम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ,उदयपुर के  कुलपति डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़ ने सामुदायिक   एवम व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय के मानव विकास एवम पारिवारिक विभाग द्वारा विश्वविद्यालय कर्मियों के 6 -12 वर्षीय बालकोंहेतु 14 दिवसीय  ई-समर कैम्प गुनगुनी गपशप में प्रतिभागियों कोसम्बोधित करते हुए कही.आपने अपने बचपन से लेकर बड़े होने तक के खट्टे मीठेअनुभवों को साझा करते हुए ,बहुत ही सहज एवम सरल तरीके से बालकों को जीवन जीने के गुर बताए.उन्होंने ख़ुशी को स्वयं के भीतर ही बताते हुए बताया की इसके लिए भौतिकवादी सुखों के पीछे ना भागें. आपने कहा  की इस उम्र मेंआप सभी के पास बहुत शक्ति व् समय है इसे सकारात्मक दिशा में लगाएं तथाजीवन लक्ष्य को प्राप्त करें.आपने माता-पिता-गुरुजनो के बाद दोस्तों कास्थान बताया और माँ को सबसे अच्छी और निकटतम मित्र ,मार्गदर्शक बताया.सफल व्यक्तियों के जीवन से शिक्षा लेकर स्वयं का जीवन प्रेरणादायक बनाने का
आह्वाहन किया.
आयोजिका डॉ.गायत्री तिवारी के इस प्रकार के नवाचार व् पहल को सराहते हुए आयोजन सचिव विभागाध्यक्ष डॉ.गायत्री तिवारी एवम समन्वयक डॉ.सुमित्रा मीणा ,खाद्य विज्ञान व् पोषण विभाग  की वैज्ञानिक से आगे भी ऐसे कार्यक्रम करने की महती आवश्यकता बताई. 

महाराणा प्रताप  कृषि एवम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ,उदयपुर के संघटक सामुदायिक   एवम व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय के मानव विकास एवम पारिवारिक विभाग द्वारा विश्वविद्यालय कर्मियों के 6 -12 वर्षीय बालकों हेतु 14 दिवसीय  ई-समर कैम्प गुनगुनी गपशप का आगाज़ किया गया.माननीय कुलपति डॉ. नरेंद्र सिंह जी राठौड़ के मार्गदर्शन तथा अधिष्ठात्री डॉ.रितु सिंघवी के सहयोग से आयोजित इस कैम्प की आयोजन सचिव विभागाध्यक्ष डॉ.गायत्री तिवारी एवम समन्वयक डॉ.सुमित्रा मीणा ,खाद्य विज्ञान व् पोषण विभाग  की वैज्ञानिक थीं.

डॉ.गायत्री तिवारी ने बताया की इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया ,जिसका मूल कारण इस आयु वर्ग के बालकों आवशयकताएँ   और उनकी क्षमताएं हैं.इस समय उन्हें उम्र के अनुसार अवसर प्रदान किये जाने चाहियें जो भविष्य में उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे .कोरोना के चलते बालक इस बार समर कैम्प जैसी सुविधाओं से वंचित रह गए हैं . माननीय कुलपति डॉ. नरेंद्र सिंह जी राठौड़ के मार्गदर्शन तथा अधिष्ठात्री डॉ.रितु सिंघवी के सहयोग से आयोजित यह  कैम्प पूर्णतया प्रासंगिक सिद्द हुआ.सभी आयुवर्ग के बालकों ने इसमें बढ़चढ़कर बाग़ लिया .इंटरैक्टिव सेशन के माध्यम से चलाये गए इस 14 दिवसीय कार्यक्रम में हालाँकि इंटरनेट की कनेक्टिविटी काम होने की वजह से कभी कभी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा लेकिन ख़ास बात ये रही की कोई भी बच्चा हताश या तनावग्रस्त न हुआ.सभी एक दूसरे की बारी का इन्तिज़ार करते और तन्मयता से उत्साहवर्धन भी करते थे.हर शाम को बालकों को दूसरे दिन के विषय से समबन्धित कोई एक्टिविटी बता दी जाती थी ,जिस पर उनको तैयारी करके आना होता था.दी गई एक्टिविटी के कुछ उदाहरण-आपको गुस्सा क्यों आता है ?आपको खुद की कोनसी आदतें अच्छी/बुरी लगती हैं?आपकी रूचि क्या है ? किस विधा में खुद को टैलेंटेड मानते हो?पापा क्यों डांटते  हैं और मम्मी क्यों डांटती हैं? घड़ी का क्या काम है? बच्चों को शरीर के अंगों का महत्व कहानी के माध्यम से बताते हुए परिवार के सभी सदस्यों को भी अंगों के उदहारण से समझाया की हर रिश्ता कितना महत्वपूर्ण है.गुस्से के नकारात्मक प्रभाव भी कहानी के माध्यम से बताये गए.

डॉ.सुमिता मीणा,आहार एवम पोषण विशषज्ञ तथ कार्यक्रम की संयोजक ने पीपीटी के माध्यम से आहार विहार पर विस्तृत चर्चा की.राजस्थान विश्वविद्यालय की डॉ.ज्योति मीणा ने बालकों को पॉजिटिव थिंकिंग की आवश्यकता व् महत्व  बताया. हो सकता है स्क्रीन द्वारा उतना प्रभावपूर्ण ना बन पाया हो फिर भी बच्चों द्वारा काफी पसंद किया गया ..कैम्प का नाम गुनगुनी गपशप रखा गया क्यूंकि इसमें 14 अक्षर हैं और हर दिन एक एक अक्षर के  आधार पर सत्र 40 मिनट के सत्र आयोजित किये गए.अंत में आयु के अनुरूप प्रतिभागियों के लिए प्रतिस्पर्धा का आयोजन भी किया गया .समापन सत्र में सभी अभिभावकों को आमंत्री कर सबसे प्रतिभागियों को एक एक सन्देश देने को कहा गया.जिसे काफी सराहा गया. अभिभावकों ने  बताया की ऑनलाइन करने से बालकों में पढाई के अलावा दूसरी गतिविधियों के लिए भी कौशल विकसित हुआ है ,लोक डाउन की वजह से बच्चों में जो बोरियत और चिड़चिड़ापन देखने में आता था वो ख़त्म सा हो गया और बच्चे इस के लिए समय से पहले तैयार हो कर बैठ जाते  थे .उन्होंने इस कार्यक्रम तो तपते रेगिस्तान में ठंडी छाँव बताया. उनहोंने कहा  ज्ञान और कौशल का कभी भी नकारात्मक इस्तेमाल ना करें ,अपने टैलेंट को विकसित करें ,अच्छा इंसान बनें आदि . कैम्प में कुल 46 प्रतिभागियों ने भाग लिया.


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