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वैष्णव भक्ति परम्परा में मीरा का स्थान ’’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयेाजन

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19 Feb 24
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वैष्णव भक्ति परम्परा में मीरा का स्थान ’’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयेाजन

उदयपुर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विवि की ओर से स्थापित मीरा अध्ययन एवं शोध संस्थान की ओर से सोमवार को कुलपति सचिवालय के सभागार में ‘‘ वैष्णव भक्ति परम्परा मंे मीरा का स्थान ’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. माधव हाड़ा ने कहा कि भक्तिकाल हिन्दी कविता का स्वर्ण युग माना जाता है। राजस्थान की पुनित धरा का इतिहास वीरता, बलिदान , भक्ति , त्याग, आत्मोसर्ग , शक्ति , साहस व देश भक्ति रूपी आदर्श नैतिक एवं मानवीय गुणों से ओतप्रोत है। इस पुनित धार ने कई संतो व भक्तों को जन्म दिया है। राजस्थान के भक्तों व संतों में मीरा बाई का स्थान सर्वोपरि है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि मीरा प्रथम कोटि की भक्त थी वे बाल्य अवस्था से ही  भक्ति व माधुर्य भाव से ओमप्रोत थी। उनके द्वारा गिरधर गोपाल को पति मानकर उनके रचित पदों में विरह वेदना की व्याकुलता स्पष्ट दर्शित होती हैै।  मध्यकाल में जब मानव जाति अवसाद में  थी तब मीरा ने मानव जाति की उन्नति के लिए प्रथ प्रदर्शक का कार्य किया। मीरा पर श्रीमद् भगवत गीता का  बहुत प्रभाव पड़ा।
मानक निदेशक प्रो. कल्याण सिंह शेखावत ने मीरा की भक्ति और निर्गुण सम्प्रदाय की तुलनात्मक विवेचना करते हुए कहा कि मीरा के प्रभु धार्मिक आस्था, उपासना, भक्ति निर्गुण सम्प्रदाय से मेल नहीं खाती। वह मन वाणी और चक्षु से अगोचर है। उन्होने कहा कि मीरा की अनन्य भक्ति उनके जीवन की थाती बन गई है। राजपरिवार द्वारा दी गई प्रताड़ना, आतंक व उपहास के बावजुद मीरा की माधुर्य भक्ति सहज रूप से पल्लवित और पुष्पित होती रही।
मुख्य अतिथि प्रो. सरला शर्मा ने कहा कि मीरा जीवनभर कृष्ण के प्रति व्याकुल रही। जब उनके घर के बाद एक बारात जा रही थी तब मीरा ने अपनी मॉ से पूछा की ये कौन है, मॉ ने कहा कि ये दुल्हा है तो मीरा ने कहा कि मेरा दुल्हा कौन है, इस पर मॉ ने सामने कृष्ण की मूर्ति दिखाते हुए कहा कि तुम्हारा दुल्हा ये है। उसी दिन से मीरा कृष्ण की भक्ति में रम गई और अंत में उसी मुर्ति में समाहित हो गई। मीरा को सभी सम्प्रदाय ने अपने अंदर लेने की कोशिश की, लेकिन वो किसी के साथ नहीं जुड़ी।
समारोह में अतिविशिष्ठ अतिथि सुप्रिम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार सतारावाला ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में योगिता राज सिंह सांखला द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ द टीनेज केनवास ’’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।

संचालन मीरा पीठ के समन्वयक डॉ. यज्ञ आमेटा ने किया जबकि आभार डॉ. चन्द्रेश छतलानी ने जताया।

इस अवसर पर प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. भारत  सिंह देवड़ा, डॉ. हीखा खान, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. शिल्पा कंठालिया, डॉ. बबीता रसीद, डॉ. गुणबाला आमेटा सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर उपस्थित थे।


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