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मानसिक रोग निवारण एक चुनौति पर कार्यशाला

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12 Oct, 17 08:12
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 मानसिक रोग निवारण एक चुनौति पर कार्यशाला
गुरुग्राम विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है जिसे संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) की और से 4 से 10 अक्टूबर तक मनाया गया। जिसके तहत मगंलवार को राजकीय पोली क्लिनिक सेक्टर 31 में मानसिक रोग निवारण एक चुनौति पर कार्यक्रम का आयेाजन किया गया। जिसमें मेडिकल स्टॉफ के साथ मानसिक रोग पर अवेयरनेस को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के ट्रस्टी राजीव अग्रवाल ने बताया कि कार्यशाला में मानसिक रोग पर आधारित खेल का आयोजन किया गया, इसमें सापं सीढ़ी के माध्यम से मानसिक रोग के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। सांप - सीढ़ी के हर नंबर पर मानसिक रोग पर आधातिर संदेश दिया गया है। इससे खेल खेल में संदेश दिया गया। ताकि मानसिक रोगी अपने अंदर छिपी प्रतिभा को दिखा सके और सभी के साथ सामान्य व्यवहार कर सके। इसलिए इन गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में मानसिक रोगियों को जोड़ा गया। खेल में बताया गया कि मानसिक रोगियों को समाज में मान सम्मान मिले तो वे भी अपनी सामान्य जिंदगी आराम पूर्वक गुजार सकतें है।

इस दौरान तकनीकी सत्र पर जानकारी देते हुए बताया गया कि मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा में सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक दोनों सहयोगों को शामिल किया गया है। जैसे कि सामान्य स्वास्थ्य देखभाल कभी भी अकेले शारीरिक प्राथमिक उपचार के नहीं होती है, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली अकेले मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार के नहीं होती है। निस्संदेह, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा के क्षेत्र में निवेश लंबी अवधि के प्रयास का हिस्सा है, जो कि यह सुनिश्चित करता है, कि संकट के कारण कोई भी गंभीर समस्या से पीडि़त व्यक्ति बुनियादी सहयोग प्राप्त करने में सक्षम होगा तथा जिन लोगों को मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा से ज्यादा सेवाओं की आवश्यकता होगी, उन्हें अतिरिक्त उन्नत सहयोग स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं से प्राप्त होगा।

मानसिक रोग: वर्तमान स्थिति
डब्लूएचओ के मुताबिक कुल जनसंख्या में से 10 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारी (एमआई) और 3 प्रतिशत गंभीर बीमारी से पीडि़त है। इसमें गुरुग्राम में लगभग 50,000 लोग गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रसित है। इनमें 50 प्रतिशत ऐसे है जो पहचान ही नही किये गए। भारत में करीब 35 मिलियन लोग इस तरह की बीमारियों के शिकार हैं।
मानसिक बीमारी से पीडि़त होने वाले मूल कारण
परिवेश संबंधी तनाव जैसे कि चिंता, अकेलापन, साथियों का दबाव, आत्मसम्मान में कमी, परिवार में मृत्यु या तलाक। दुर्घटना, चोट, हिंसा एवं बलात्कार से मनोवैज्ञानिक आघात होना। आनुवंशिक असामान्यताएं। मस्तिष्क की चोट/दोष। अल्कोहल एवं ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन। संक्रमण के कारण मस्तिष्क की क्षति। मानसिक रोग से संबंधित भ्रांतियां।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस सप्ताह पर हुए आयेाजन
उन्होने बताया कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस सप्ताह के तहत पैरामैडिकल स्टॉफ को मानसिक रोग पर आधारित तकनीकी जानकारी, मानसिक रोग पर आधारित नुक्कड़ नाटक, मानसिक रोग पर विभिन्न स्कूलों के एक हजार से अधिक बच्चों के साथ ड्राइंग प्रतियोगिता, अंबेडकर यूनिवर्सिटी, करमपुरा कैंपस में विद्यार्थियेंा के साथ मानसिक रोग एक चुनौति पर सेमीनार, सिविल अस्पताल में नुक्कड़ नाटक, अमर कालोनी में हैल्थ केयर मेडिकल स्टॉफ के साथ मानसिक रोग के लक्षण व पहचान पर संवेदीकरण कार्यशाला, स्कूली विद्यार्थियों के साथ मानसिक रोग पर चित्र प्रतियोगिता, राहगिरी में बच्चों व युवाअेां के साथ कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।
संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) की और से मानसिक रोगियों के लिए हरियाणा सरकार के साथ मिलकर रिकवरी कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। वंही गुरुग्रा्रम गांव में रिकवरी सेंटर व गु्रप हेाम भी चलाया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में टीम के प्रोजेक्ट मैनेजर समृति गहरोत्रा, प्रोग्राम अधिकारी इपस्तिा पाल, प्रगति घोष, प्रिया इत्यादि शामिल होकर मानसिक रोग पर तकनीकी जानकारी दी।
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