Pressnote.in

’’साहसी वीर देषभक्त अमर शहीद पं. चन्द्रशेखर आजाद‘‘

( Read 11884 Times)

28 Feb, 18 11:14
Share |
Print This Page
आज भारत माता के वीर, निर्भय साहसी और अद्भुद देशभक्त शहीद पं. चन्द्रशेखर आजाद जी का बलिदान दिवस है। चन्द्रशेखर आजाद जी का देश की आजादी में प्रमुख योगदान था। उन्होंने देश को आजाद कराने का सही रास्ता चुना था और उसके लिए देश की स्वतन्त्रता के पावन यज्ञ में प्राणों की आहुति देकर अपने मनुश्य जीवन का बलिदान किया। उन्होंने अंग्रेजों की प्रसशा कर अन्यों की तरह सुख सुविधायें प्राप्त नहीं की थी। उनका उद्देष्य अपने कार्य से दूसरों की तरह राजनीतिक लाभ उठाना भी नहीं था। उनके परिवार का भी कोई उत्तराधिकारी उनके इस कार्य से लाभान्वित नहीं हुआ। उनके कार्य से देश को सामाजिक व राजनैतिक दृश्टि से भी कोई हानि नहीं हुई। अतः उनका बलिदान देश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं अविस्मरणीय है। पं. चन्द्रशेखर आजद ने देश से कुछ भी लिया नहीं अपितु इतना कुछ दिया है कि देशवासी किसी भी रूप में उनका ऋण अदा नहीं कर सकते। हम उनके बलिदान की घटना व देशभक्ति के कार्यों को पढकर अभिभूत होते हैं।
आज की युवा पीढी का आदर्ष पं. चन्द्रशेखर आजाद को होना चाहिये था। जिन लोगों ने देश पर राज किया उन्होंने उन्हें उनका उचित स्थान न देकर देश को भोगवाद में डाला। आज देश की युवापीढी के आदर्ष न देशभक्त शहीद हैं न भारतीय सेना के वह सिपाही होते हैं जो हमारी रक्षा व सुख के लिए अपना जीवन बलिदान करते हैं अपितु वे हैं जो कि्रकेट खेलते हैं या जो फिल्मी कलाकार हैं। यह सभी करोडों अरबो में स्वामी है। देश के सुधार में शायद ही कोई अपना धन किसी रूप में दान करता हो। सभी देश विदेश में सैर सपाटे करते और सुख भोगते हैं। इन्हें हमारे शहीद, देशभक्त किसान व मजदूर शायद ही कभी याद आते होंगे? इस विचारधारा व भावना से देश का कल्याण होने के स्थान पर हम देश को पराधीनता की ओर ले जा रहे हैं, ऐसा हम अनुभव करते हैं।
हमारी दृश्टि में देश के सबसे पूजनीय व आदर्ष हमारे आजादी के शहीद व सेना के बलिदान की भावना रखने वाले सैनिक व शहीद ही हैं। हम सभी देशवासी अपने देश के किसानों व मजदूरों के भी आभारी व ऋणी है जिनके द्वारा हमारा यह जीवन व प्राण चल रहे हैं। हम इन लोगों की पदे पदे उपेक्षा करते व इनका षोशण करते हुए प्रतीत होते हैं। किसान हमारे लिए ही ऋण लेकर खेती करते हैं और अच्छी फसल न होने व ऋण न चुका पाने के कारण उन्हें आत्महत्या तक करनी पडती है। मजदूर भी सारी जिन्दगी अभाव व बदहाली का जीवन बिताते हैं। महर्शि दयानन्द ने लिखा किसान को राजाओं का राजा कहा है और वस्तुतः वह है भी। ऋशि ने कहा है कि ईष्वर की इस सृश्टि में अन्याय व षोशण की व्यवस्था अधिक समय तक नहीं चल सकती। इसके लिए हमें सत्य मार्ग का अनुसरण करना होगा और सत्य को जानकर अपने जीवन को सत्यमय व सत्यगुणों से विभूशित करना होगा।
सत्य ज्ञान हमें केवल वेदों म मिलता है। सत्य ज्ञान से दूर आज की जनता सुख भोग के पीछे भाग रही है जबकि वेद कहते हैं कि मनुश्य का जीवन ईष्वर, जीवात्मा व सृश्टि के सत्य स्वरूप को जानकर न्यायपूर्वक जीवन व्यतीत करते हुए ईष्वर की स्तुति, प्रार्थना व उपासना करना है। ऋशि दयानन्द इस विशय में अनेक सबल तर्क देते हुए संसार से जा चुके हैं परन्तु हमने उनके सन्देश पर कभी संजीदगी से विचार ही नहीं किया। ऐसा न करने पर हमारा भविश्य अर्थात् परजन्म में क्या हाल होगा, हम कल्पना भी नहीं कर सकते। ईष्वर सबको सद्बुद्धि दे जिससे हम जीवन में सत्य को जानकर उस मार्ग पर चल सकें और दूसरों को भी प्रेरणा देकर उन्हें भी सत्यमार्गानुयायी बना सकें।
हम पं. चन्द्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उन्हें अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि देते हैं और ईष्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह सभी मनुश्यों को असत्य मार्ग का त्याग कर सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा करें। सभी मनुश्य के कल्याण में ही हमारा कल्याण है, यह हमें विष्वास होना चाहिये।
हम यह भी अनुभव करते हैं कि आज की स्कूली षिक्षा ने युवा पीढी में से देश भक्ति की भावना को समाप्त नहीं तो अतिक्षीण किया ही है। युवाओं में देशभक्ति का वह जज्बा दिखाई नहीं देता जो नेताजी सुभाशचन्द्र बोस, वीर सावरकर, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, पं. चन्द्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह आदि में था। पं. रामप्रसाद बिस्मिल जी की यह पंक्तियां भी आज के समाज को देखकर असफल हुई लगती हैं।
पं. चन्द्रशेखर आजाद का जन्म मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के भारवां गांव में माता जगरानी देवी जी और पिता सीताराम तिवारी जी के यहां २३ जुलाई सन् १९०६ को हुआ था। आजाद जी क्रान्तिकारी थे और उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह किया था। उन्होंने ऋशि दयानन्द भक्त क्रान्तिकारी पं. रामप्रसाद बिस्मिल द्वारा स्थापित हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन को पुनर्गठित कर हिन्दुस्तान सोषिलिस्ट रिपब्लिकन आर्मीत्। बनाई थी। शहीद भगत सिंह एवं अन्य क्रान्तिकारी उनके सहयोगी थे। पं. चन्द्रशेखर आजाद इलाहाबाद के एल्फे्रड पार्क में २७ फरवरी, १९३१ को अंग्रेजी पुलिस से लडते हुए स्वयं की पिस्तौल की आखिरी गोली से शहीद हुए थे। उन्होंने ब्रिटिश शासकों के अपवित्र हाथों से अपने शरीर को दूशित न कराकर स्वयं को ही अपनी पिस्तौर की आखिरी गोली मार ली थी और शहीद हो गये थे।
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्श मेले।
वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशा होगा।।

Source :

यह खबर निम???न श???रेणियों पर भी है: Chintan
Your Comments ! Share Your Openion

Group Edior : Mr. Virendra Shrivastava
For any queries please mail us at : newsdesk.pr@gmail.com For any content related issue or query email us at newsdesk.pr@gmail.com, CopyRight © All Right Reserved. Pressnote.in