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तनाव, असन्तुलन एवं अशांति का जीवन क्यों ?

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16 Jul, 17 12:44
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तनाव, असन्तुलन एवं अशांति का जीवन क्यों ? दुनिया में एक नकारात्मकता का परिदृश्य बिखरा पड़ा है। हम निरन्तर आदर्शवाद और अच्छाई का झूठ रचते हुए सच्चे आदर्शवाद के प्रकट होने की असंभव कामना कर रहे हैं, इसी से जीवन की समस्याएं सघन होती जा रही है, नकारात्मकता व्यूह मजबूत होता जा रहा है, इनसे बाहर निकलना असंभव-सा होता जा रहा है। दूषित और दमघोंटू वातावरण में आदमी अपने आपको टूटा-टूटा सा अनुभव कर रहा है। उसकी धमनियों में कुत्सित विचारों का रक्त संचरित हो रहा है। कोशिकाएँ ईष्र्या और घृणा के धुएँ से जल रही हैं। फेफडे़ संयम के बिना शुद्ध आॅक्सीजन नहीं ले पा रहे हंै, कलह का दावानल पोर-पोर को जला रहा है, ऐसी स्थिति में इंसान का जीना समस्या है।
खुशी हम सबकी जरूरत है, लेकिन क्या हमारी यह जरूरत पूरी हो पा रही है, लेकिन खुशी का जीवन कैसे संभव हो? आज के इस भागम-भाग, तनाव एवं घटनाबहुल युग में सकारात्मक होना, ऊर्जावान होना, खुश होना कैसे संभव होगा? तनाव में कोई नहीं जीना चाहता। तो फिर, खुशी के सभी रास्ते बन्द करके हममें से अधिकतर लोग तनाव, असन्तुलन एवं अशांति का जीवन क्यों जी रहे हैं? इस सवाल के उत्तर में ओशो कहते हैं कि दुनियाभर के किसी भी धर्म में खुशी पर कोई बात नहीं की गई है। खुश रहना सबसे महत्वपूर्ण है फिर भी कोई भी धर्म इसकी बात नहीं करता, यह आश्चर्यजनक है।
धर्म सदैव गंभीर होने की बात कहता है, जबकि जीवन में सहजता और सरलता बहुत जरूरी है। इसके लिये एक बेहतरीन बात है और इसी के माध्यम से मानव जीवन ने ऊंचाइयों को छुआ है। वह है सकारात्मकता एवं ऊर्जस्विलता है, जिसने आम इंसानों को ऐतिहासिक पुरुषों के रूप में महानता प्रदान की है। कई बार ऐसा लगता होगा आपको कि आप ऊर्जा से भरे हुए और परिपूर्ण है। आपका घट ऊर्जा से छलछला रहा है और उस समय आपके चेहरे पर एक विशिष्ट आभा होती है, आँखों में चमक होती है, मन में प्रसन्नता और हृदय में होती है कुछ कर गुजरने की तमन्ना। इसलिये अच्छा करने की कामना सदैव रहनी चाहिए। वारेन बुफेट ने कहा कि कोई आज छाया में इसलिए बैठा हुआ है क्योंकि किसी ने काफी समय पहले एक पौधा लगाया था।”
कभी ऐसे भी लोगों को हम देखते हैं जो उम्र से युवा हैं पर चेहरा बुझा-बुझा है। न कुछ उनमें जोश है न होश। अपने ही विचारों में खोए-खोए, निष्क्रिय ओर खाली-खाली से, निराश और नकारात्मक तथा ऊर्जा विहीन। हाँ सचमुच ऐसे लोग पूरी नींद लेने के बावजूद सुबह उठने पर खुद को थका महसूस करते हैं, कार्य के प्रति उनमें उत्साह नहीं होता। ऊर्जा का स्तर उनमें गिरावट पर होता है। क्यों होता है ऐसा? कभी महसूस किया आपने?
यह सब हमारी शारीरिक स्वस्थता के साथ-साथ मानसिक स्थिति का और विचारों का एक प्रतिबिंब है। जब कभी आप चिंतातुर होते हैं तो ऊर्जा का स्तर गिरने लग जाता है। उस समय जो अनुभूति होती है, वह हैµशरीर में थकावट, कुछ भी करने के प्रति अनिच्छा और अनुत्सा। चिंता या तनाव जितने ज्यादा उग्र होते हैं, उतनी ही इन सब स्थितियों में तेजी आती है, किसी काम में तब मन नहीं लगता।
आज के समय में यह बहुत गंभीर मसला है कि निराशा और अवसाद में डूबे लोग सकारात्मकता और ऊर्जा की तलाश में यहां-वहां फिर रहे हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर सकारात्मकता पढ़ाने वालों की जरूरत और भरमार है, पर इनमें से अधिकतर की सबसे बड़ी समस्या है कि वे चीजों को सतही बनाकर पेश करते हैं। सकारात्मकता का अर्थ है- अपनी योग्यता और कार्य करने की क्षमता पर विश्वास। यदि आप किसी कार्य के लिए अयोग्य हों तो आप उस काम को लेकर तब तक सकारात्मक नहीं हो सकते, जब तक कि आप उस काम को करने की योग्यता नहींे हासिल कर लेते। हां, यह बात जरूर है कि यदि आप किसी कार्य में अयोग्य हैं तो अपने को कमजोर मान निराशा या अवसाद में डूबने की जरूरत नहीं है। राबर्ट ब्राउल्ट ने कहा कि छोटी छोटी बातों में आनन्द खोजना चाहिए, क्योंकि एक दिन ऐसा आएगा जब आप पिछले जीवन के बारे में सोचेगें तो यह पाएंगे कि वह कितनी बड़ी बातें थीं।
दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता है। दुनिया का कोई भी कार्य महान नहीं होता, बल्कि महान लोगों द्वारा किए गए कार्य महान बन जाते हैं। कोई कह सकता था कि नर्स होना महत्ती गर्व की बात नहीं है, पर मदर टेरसा के कार्यों ने उन्हें दुनिया के महानतम लोगों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। अंग्रेजों को अहिंसा के माध्यम से घुटने टेकने पर मजबूर करने वाली गांधी अपनी युवावस्था में जब पहली बार कोर्ट में सूट-बूट पहनकर खड़े हुए तो उनके पैर कांपने लगे, जज के सामने उनकी आवाज तक नहीं निकली और वे इतना डर गए कि कोर्ट से भाग निकले। बाद में उन्होंने खुद को इस तरह निखारा कि करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया। सफलता के शिखर पर पहुँचे व्यक्तियों के उदाहरण से भी यह बात स्पष्ट होती है कि जिन कार्यों में उन्होंने हाथ डाला, उन्हें विश्वास था कि उन्हें पूरा करने में वे सक्षम हैं और इसके लिए अपनी ऊर्जा का सही उपयोग उन्होंने किया। जीवन की समझ होना बेहद जरूरी है। उसके साथ कैरेक्टर और माध्यम की समझ भी उतनी ही जरूरी है।
चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में आंकना और सामथ्र्य व परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जीवन जीना ही सकारात्मकता है। यदि परिस्थितियां हमारे हित में नहीं है तो उन्हें अपने हित में करने के लिए जूझना। दुनिया में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जिसे इंसान न कर सके। दिल में कामों के प्रति जुनून और लगन होनी चाहिए। गोएथ ने कहा कि सोचना आसान होता है। कर्म करना कठिन होता है। लेकिन दुनिया में सबसे कठिन कार्य अपनी सोच के अनुसार काम करना होता है। सकारात्मकता आत्मविश्वास से ही उपजती है और उसमें इस बात का भी बोध होता है कि दुनिया बहुत महान है और यहां विविधताओं और योग्यताओं का भंडार है। जितनी ज्यादा चाह है, उससे ज्यादा मेहनत करने की क्षमता ही हमें सकारात्मक बना सकती है। इसी सन्दर्भ में विलियम ए. वार्ड ने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों से कुछ व्यक्ति टूट जाते हैं, जबकि कुछ अन्य व्यक्ति रिकार्ड तोड़ते हैं।
हिन्दू धर्म ग्रंथों की मानें तो भगीरथ नाम के एक इंसान ने कठोर तपस्या के माध्यम से गंगा को पृथ्वी पर आने के लिए मजबूर कर दिया था। सच है कि आपके द्वारा किया गया कोई कार्य फल न दे, यह नामुमकिन है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप काम को कैसे करते हैं। माना कि आप बहुत अच्छे ड्राइवर हैं, पर क्या आप आंख बंद करके गाड़ी चला सकते हैं। जीवन भी ऐसा ही है- गाड़ी चलाने जैसा, कभी तेज चलता है तो कभी धीरे, कभी क्लच पकड़ना पड़ता है तो कभी गियर बदलना पड़ता है। कभी गाड़ी ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरती है तो कभी बंद पड़ जाती है और उसे दुरुस्त करने के लिए गैराज भेजना होता है। बुद्ध ने कहा कि अंतिम सत्य कुछ नहीं, कुछ भी नहीं है, जो अजर-अमर हो। कुछ भी नहीं, जो बदला न जा सके। एक महान विद्वान ने कहा था कि जब हम स्वार्थ से उठकर अपने समय को देखते हुए दूसरों के लिए कुछ करने को तैयार होते हैं तो हम सकारात्मक हो जाते हैं। महात्मा गांधी ने कहा कि जब आप दुखी हों तो अपने से नीचे देखो और फिर सोचो कि आप सुखी हो या दुखी। यहां देखने का नजरिया महत्वपूर्ण होगा। नीचे देखते समय अपनी सुविधाओं को देखो और ऊपर देखते हुए उनके लिए किए गए श्रम को समझने का प्रयास करो। ऊर्जा एवं सकारात्मकता से समृद्ध होकर आप जीवन को आनंदित बना सकते हैं। समाज और राष्ट्र के लिए भी ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते है। सदा उत्साहित रहकर खुद को ऊर्जा से भरपूर रखें, इससे आपके व्यक्तित्व को नई पहचान मिलेगी। आपका आत्मविश्वास बढेगा, जीवन में सफलता की सीढ़ियों पर बहुत जल्दी आप आरोहण कर सकेंगे।
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