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इकोफ्रेन्डली जीवन ५ौली पर कार्यशाला सम्पन्न

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14 Jan 20
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इकोफ्रेन्डली जीवन ५ौली पर कार्यशाला सम्पन्न

उदयपुर,  विज्ञान समिति सभागार में इको फ्रेन्डली जीवन शैली पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए डॉ. एन.सी. जैन प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजस्थान जयपुर ने ऐसे कई जीवनोपयोगी उपायों पर चर्चा की जिनकें माध्यम से हम हमारे घर, ऑफिस अथवा परिसरों का निर्माण इस प्रकार कर सकते हैं जिनसे ये बिना एसी का उपयोग करते हुए भी गर्मी में ठंडे रह सकते हैं एवं बिना हीटर का उपयोग करते हुए भी सर्दी में गर्म रह सकते हैं। blds fy, उन्होंने पारम्परिक रूप से उपयोग किए जाने वाले ऐसे उपाय जैसे-छतों पर मटका फिलिंग, दीवारों के बाहरी ओर रिफलेक्टिंग टाईल्स का उपयोग, खिडकी के बाहरी ओर पर दाल गाना, जल पर्दे का उपयोग करना, मकान के भीतर ठंडा रखने वाले पत्थरों का उपयोग करना, चूने का प्लास्टर का उपयोग करना, मकान के भीतर हवा का प्रवाह बनाएं रखने के समुचित उपाय करना आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने यह भी बताया कि मकान बिना किसी रासायनिक पदार्थों का उपयोग किए भी आसानी से बनाए जा सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए भी अधिक उत्तम रहते हैं। उन्होंने राजस्थान वानिकी एवं वन्य जीव संस्थान जयपुर के निदेशक के हाल ही में निर्मित किए गए कक्ष का विडीयो के माध्यम से प्रदशर्न करते हुए इसमें उपयोग किए गए विभिन्न उपायों के बारें में विस्तार से जानकारी दी एवं आह्वान किया कि हम सभी ऐसे उपायों को अपना कर आसानी से प्रकृति संरक्षण एवं स्वास्थ्यदायी जीवन जी सकते हैं।

उन्होंने अपने संस्थान को जीरो वेस्ट परिसर बनानें हेतु किए गए विभिन्न उपायों का भी विडियों के माध्यम से चित्र्ण करते हुए यह बताया कि हम अपने घर, ऑफिस अथवा परिसर को किस प्रकार जीरो वेस्ट बनाकर कचरे की बढती हुई व्यापक समस्या का समाधान ढूंढ सकते हैं एवं अपने शहर को स्वच्छ एवं सुन्दर बना सकते हैं। इसके लिए हमें सभी बायोडिग्रेडेबल(पुनर्चक्रण योग्य)वेस्ट को खाद बनाने के लिए एवं सभी नॉन बायोडिग्रेडेबल पदार्थों को अलग रखते हुए रिसाइकिल करना आव८यक होगा। उल्लेखनीय है कि अधिकांश नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट पदार्थों को कबाडयों द्वारा खरीदा जाता है एवं ऐसे गरीब परिवारों द्वारा इनके रिसाइक्लिंग के माध्यम से जहां अपना पेट भरण करते हैं वहीं दूसरी ओर पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए समाज की सेवा करते हैं।

उन्होंने हमारे शहरों को हरा-भरा रखने के लिए छतों, बॉलकनी एवं खडी दीवारों पर गमलों में उगने वाले पौधों एवं बेलों उपयोग करने पर जोर दिया। इसी प्रकार शहरों के वातावरण को शुद्ध रखने के लिए हमें सभी खाली स्थानों पर जैसे सडक किनारें, स्कूल-ऑफिस परिसर, पहाडयों एवं सामुदायिक जगहों पर अधिक से अधिक हरियाली किया जाना आव८यक होगा।

अपने उद्बोधन में डॉ. जैन ने जलसंरक्षण, जल प्रदूशण कम करने एवं आसान उपायों से पानी की बचत करने की आव८यकता प्रतिपादित की। इसी प्रकार वायुप्रदूषण को कम करने के भी विभिन्न उपायों की चर्चा की एवं शहरवासियों से गंभीरतापूर्वक इकोफ्रेन्डली जीवनशैली अपनाते हुए हमारे शहर को वि८व का सबसे सुन्दरतम, स्वास्थ्यदायी, स्वच्छ शहर बनाने का आह्वान किया।

इस कार्यक्रम में राजस्थान वि८वविद्याल जयपुर से पर्यावरण विज्ञान में डॉक्टरेट की हुई वैज्ञानिक डॉ. संगीता एवं डॉ. साक्षी ने भी भाग लिया एवं उनके द्वारा सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मेनेजमेन्ट पर किए गए शोध कार्यों एवं उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। विज्ञान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. महीप भटनागर ने भी पारम्परिक रूप से ऐसे कई उपायों का प्रचलन कम हो जाने पर दुःख व्यक्त किया तथा इनको पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। उन्होंने आ८वासन दिया कि ऐसी कार्याशालाओं के माध्यम से जनजागृति का भविष्य में प्रयास किया जाएगा।

इस कार्यशाला में डॉ. के.एल. कोठारी, मुनीश गोयल, डॉ. के.एल. तोतावत, प्रकाश तातेड, डी.जे. नागौरी, डॉ. किशोर गेरा, डॉ. एम. जी वार्ष्णेय, गौरव सिंघवी सहित शहर के कई गणमान्य लोगों ने उत्साह से भाग लिया और पूरे जोश से अपनाने के लिए वायदा किया।


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