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मेरे दीप

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25 Oct 20
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लक्ष्मीनारायण खत्री

मेरे दीप

मेरे दीप,

तुम यों ही

टिमटिमाते रहो

दुनिया को सवाते रहो।

तन-मन से दुखिया,

देख तुम्हे,

यों जगमगाते

उठ खड़े होंगे गाते।

मेरे दीप,

तुम हो त्याग

हमारे हो प्रयाग

तुम्हारे प्रति 

सदा होगा अनुराग।

मेरे दीप,

अंधेरी राते

तुम चमकाते

सुख श्रृंगार कराते

नित रहे हम निहारते।


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