600 से ज्यादा लोगों में है,संभाग की 400 जोड़ी आँखे

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25 Aug 19
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600 से ज्यादा लोगों में है,संभाग की 400 जोड़ी आँखे

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल      शाइन इंडिया फाउंडेशन विगत 9 वर्षों से सम्पूर्ण संभाग में नेत्रदान-अंगदान-देहदान जागरूकता के लिये काम कर रहा है । संस्था व अन्य सहयोगी संस्थाओ के प्रयासों से 400 जोड़ी से अधिक कॉर्निया प्राप्त हुआ है,जिनका सफल व निःशुल्क प्रत्यारोपण,जयपुर स्थित आई बैंक  सोसायटी द्वारा 600 से अधिक कॉर्निया दृष्टिबाधित व्यक्तियों में कर दिया गया है ।

 

        संस्था सदस्य बताते है कि,एक समय था,जब शोकाकुल परिवारों को नेत्रदान के लिये समझाने में घबराहट होने के साथ साथ,यह डर बना रहता था कि,कहीं दुखः के समय नेत्रदान की बात सुन कर,कुछ कहा सुनी न हो जाये,परंतु संस्था द्वारा लगातार नेत्रदान सम्बंधित जागरूकता शिविर आयोजित होते रहने से,व आये दिन समाचार पत्रों में नेत्रदान सम्बंधित लेख आते रहने के कारण, आज शोकाकुल परिवारों को मृत परिजनों के नेत्रदान करवाने के लिये ,ज्यादा सोचना नहीं पड़ता । 

 

         सम्पूर्ण भारत में नैत्रदान कई जागरूकता को बढ़ाने के लिये 34वां राष्ट्रीय नैत्रदान जागरूकता पखवाड़ा कार्यक्रम पूरे भारत वर्ष में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक, मनाया जा रहा है । इसके अंतर्गत शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा भी सम्पूर्ण हाड़ौती में नैत्रदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है । वैसे संस्था के प्रयासों से काम करने से सम्पूर्ण संभाग के सभी बड़े शहरों में नेत्रदान कि जागरूकता का प्रतिशत बढ़ने के साथ नेत्रदान भी हुआ हैं ! परन्तु अभी भी ग्रामीण अंचल में नेत्रदान के बारे में कई भ्रान्तियां मौजूद हैं । नेत्रदान जागरूकता बढ़ाने के लिये,पखवाड़े के दौरान संभाग भर में जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा ।

 

            नैत्रदान पखवाड़े जाने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी और नैत्रदान से जुडी बाते। केवल नैत्रदान ही एक मात्र इलाज है, कॉर्निया (पुतली ) से सम्बंधित होने वाली अंधता का।  हमारी चिकित्सा पद्दति इतनी एडवांस हो चुकी है की,नेत्रदान से प्राप्त एक आँख, एक से अधिक (3 लोगों में ) कॉर्निया से दृष्टि-बाधित रोगी को लग सकती है, जिससे एक नैत्रदान से लगभग न्यूनतम 6 व्यक्तियों की दृष्टिहीनता दूर की जा सकेगी। नेत्रदान मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के अंदर,की जाने वाली एक रक्तविहीन प्रक्रिया है,जिसमें चेहरे पर किसी तरह की कोई विकृति नहीं आती है । आज के समय मे ' लेमिलर क्रेटोप्लाटो ' तकनीक से नेत्र प्रत्यारोपण किए जा रहे है। इससे रिजेक्शन के अवसर बहुत कम हो जाते है। 

 

         पखवाड़े के दौरान नैत्रदान से जुडी समस्त भ्रांतियॉं को दूर किया जाएगा एवं लोगों को प्रेरित किया जाएगा की, मरणोपरांत अपने परिजनों का नैत्रदान करायें। सही मायने में मृत परिजनों को नेत्रदान करवाना ही एक सच्ची श्रद्धांजलि है, यही एक तरीका है,जिसमें दुनियां से चले जाने के बाद भी आप परिजनों को अपनी स्मृति में जीवित रख सकते है। यदि उनके पार्थिव देह का कोई भी एक अंग मृत्यु के पश्चात दान किया जाता है,तो वह किसी अन्य असहाय व जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन संवार सकते है, तो इससे बेहतर कार्य मनुष्य रहते कुछ भी नहीं है ।

 

         जयपुर स्थित एस. एम. एस. अस्पताल के नेत्ररोग विभाग के सह-आचार्य डॉ. राजेश गोयल बताते है की यदि भारत में मृत्यु के बाद पूर्ण रूप से नैत्रदान किया जाए तो महज 10 दिनों में ही अंधत्व समाप्त हो सकता है। परन्तु जागरूकता का अभाव एवं तरह-तरह की भ्रांतियों के वजह से मृतकों के परिजन नैत्रदान नहीं करते है। 

          कोटा संभाग भर में नेत्रदान-अंगदान-देहदान की जागरूकता हेतू शाइन इंडिया फाउंडेशन के सदस्यों को किसी भी दिन,किसी भी समय 8386900101-102 पर संपर्क किया जा सकता है। 


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