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गीतांजली कार्डियक सेंटर द्वारा फ्रेंच और जर्मन तकनीक से किया गया वाल्व प्रत्यारोपण

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27 Feb 20
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गीतांजली कार्डियक सेंटर द्वारा फ्रेंच और जर्मन तकनीक से किया गया वाल्व प्रत्यारोपण

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर के कार्डियक सेंटर द्वारा बिना ओपन हार्ट सर्जरी की प्रक्रिया के प्रति जागरूकता फैलाने के सन्दर्भ में निजी होटल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया| जिसके अंतर्गत नवीनतम तकनीक से टावी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी एवं हाल ही में 72 वर्षीय वृद्धा का गीतांजली कार्डियक सेंटर में इस प्रक्रिया के माध्यम से ऑपरेशन किया गया| कार्डियक टीम द्वारा ऑपरेशन पर विस्तृत चर्चा की गयी, इसके अंतर्गत उपस्तिथ श्रोताओं द्वारा डॉक्टर्स से सवाल जवाब भी किये गए|

जैसा की हम जानते हैं कि चिकित्सा विज्ञान में निरंतर आविष्कारों और खोजों के बाद नई तकनीकों का जन्म होता रहता है। ऐसी तकनीकों को प्रोयाग करने में तथा गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में आने वाले ह्रदय रोगियों को ठीक करने के लिए गीतांजली कार्डियक टीम के डॉक्टर सदैव तत्पर वह प्रतिबध रहते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसमें उदयपुर निवासी 72 वर्षीय वृद्धा (शरीफा काय्यूमॉली) एक बहुत ही संजीदा दिल की बीमारी से जूझ रही थी।
क्या थे बीमारी के लक्षण- रोगी को सांस फूलना, छाती में भारीपन होना व छाती में दर्द होना जैसे बीमारी के कई लक्षण थे, साथ ही लंबे समय (10 वर्षों ) से मधुमेह रोग भी था दोनों किडनी भी अस्वस्थ थी और दिल की धड़कन भी कम थी । रोगी का घुटना भी पहले बदला जा चुका था और साथ में बार बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होता था| रोगी के शारीर में दूसरे मरीजों की अपेक्षा ऑक्सीजन की मात्रा भी कम थी|

रोगी की आरंभिक जांचो में खून की जाँच, ईसीजी, इको कार्डियोग्राफी की गयी जिसमे पता चला कि वह एक दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही है| उसे कम्पलीट हार्ट ब्लाक ( दिल की धडकन बहुत कम थी) और दिल के चार वाल्व में से दो वाल्व ख़राब थे| उम्र बदने के साथ साथ दिल की सबसे बड़ी धमनी एओर्टा का वाल्व बहुत ज्यादा खराब था और सिकुड़ गया था|

इलाज की प्रक्रिया- सबसे पहले कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रमेश पटेल द्वारा रोगी को ड्यूल चेंबर पेसमेकर डाला गया जिससे रोगी की स्थिति कुछ बेहतर हुई। यूरोलॉजी डॉ विश्वास बाहेती ने किडनी की बीमारी के लिए डी.जे. स्टेंटिंग की। डॉ ओंकार वाघ द्वारा नियमित रूप से रोगी की डायबिटीज को नियंत्रित रखा गया परंतु फिर भी उनकी मुख्य बीमारी उनको परेशान कर रही थी|

इसके चलते कार्डियक टीम के पास दो विकल्प थे-

1) ओपन हार्ट ऑपरेशन किया जाए जिसमें रोगी के लिए रिस्क ज्यादा था।

2) रोगी को अत्याआधुनिक तकनीक वाला बिना चीरे के ऑपरेशन (TAVI-टावी) करके वाल्व प्रत्यारोपित किया जाए।

यह दोनों विकल्प रोगी वह उसके परिवार के सामने रखे गए और सब ने मिलकर दूसरा विकल्प चुना तथा दिनांक 22-02-2020 शनिवार को रोगी का जांघ की नाड़ी के रास्ते कृत्रिम मेक इन इंडिया वाल्व प्रत्यारोपित किया गया तथा 3 घंटे के भीतर रोगी को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

इस पूरी प्रक्रिया के संचालक ह्रदय शल्य चिकित्सक डॉ संजय गांधी ने बताया कि वह दो बार जर्मनी से प्रशिक्षण लेने के बाद इस तकनीक से यहां पर लोगों का इलाज करना चाहते थे। जैसे ही इस तरह के रोगी का मामला सामने आया तो कार्डियक टीम ने रोगी का इलाज जांघ की नाड़ी के रास्ते वाल्व प्रत्यारोपण करने का विकल्प चुना|

हार्ट टीम द्वारा किये गये इस तरह के ऑपरेशन पूरे विश्व में हार्ट टीम अप्रोच से किए जाते हैं। जिसमें ह्रदय रोग विशेषज्ञ, हृदय शल्य चिकित्सक , ह्रदय रोग निश्चितना विशेषज्ञ मिलकर प्रक्रिया को अंजाम देते हैं| इस प्रक्रिया डॉ संजय गाँधी के साथ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रमेश पटेल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । वह भी फ्रांस से इस तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

संचालक डॉ गांधी ने बताया कि उनके साथ टावी इलाज करने वाली टीम में इंटरवेशनल कार्डियोलॉजिस्ट में डॉ कपिल भार्गव, डॉ रमेश पटेल, डॉ शलभ अग्रवाल, डॉ डेनी मंगलानी, डॉ शुभम चेलावत और कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ प्रशांत , डॉ अजय वर्मा , डॉ पार्थ वाघेला, कार्डियकएनेस्थेटिस्ट विशेषज्ञों की में डॉ अंकुर गांधी, डॉ कल्पेश मिस्त्री, डॉ चिंतन पटेल, डॉ अर्चना ,न्यूरो वैस्कुलर इंटरवेशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ सीताराम बारठ, कैथ लैब टीम, कार्डियक ओटी टीम, , सीटीवीएस आईसीयू एंड कार्डियक वार्ड स्टाफ का बखूबी योगदान रहा जिससे यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।

डॉ रमेश पटेल ने बताया कि टावी प्रक्रिया आज की स्थिति में बहुत उन्नति कर रही है। रोगी के लिए सरल प्रक्रिया होने कि वजह से आने वाले समय में यह और भी तेजी से बढ़ेगी, इसमें रोगी बहुत ही जल्दी स्वस्थ होकर प्रक्रिया के पश्चात शीघ्र ही चलने लगता है और दो दिन में ही हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी जाती है । अब तक कार्डियक टीम द्वारा गीतांजलि में सफलतापूर्वक तीन टावी किए जा चुके हैं जोकि एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह वाल्व इंडियन था और इसका उपयोग आजकल यूरोपियन देशों में उन्नत क्वालिटी होने के कारण किया जा रहा है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि बहुत ही कम सेंटर्स है पुरे भारत में जहां पर ऐसे अत्याधुनिक, नवीनतम तरीकों से रोगियों का हार्ट टीम द्वारा इलाज हो रहा है|

कार्डियक एनएसथेटिस्ट विशेषज्ञ डॉ अंकुर गांधी और डॉ. कल्पेश मिस्त्री ने ने बताया कि एनएसथेटिस्ट होने के नाते उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी रहती है कि प्रक्रिया के दौरान रोगी आराम से रहे और उसे कोई दर्द ना हो, क्यूंकि जांघ की नाड़ी का नाप छोटा था तो उसे मात्र दो सेंटीमीटर चीरे से एक्स्पोज़ किया गया| प्रक्रिया पूर्ण होते ही 30 मिनट बाद ही रोगी होश में आ गई थी , मात्र 2- 3 घंटों में रोगी को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

वही सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ कपिल भार्गव ने उपस्तिथ श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए तथा टावी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सामान्यतया यह प्रक्रिया उन्हीं रोगियों की जाती है जिनके बहुत सी जटिलताएं होती है अथवा जो सर्जरी को बर्दाश्त नहीं कर पाते इसके प्रक्रिया में बहुत ही कम समय लगता है ।उन्होंने यह भी बताया कि जैसे-जैसे इस तकनीक का उपयोग बढ़ता जाएगा वैसे ही यह इलाज भी कम कीमत में मुहैया हो पाएगा।

सीईओ प्रतीम तम्बोली ने सफलतापूर्वक तीन टावी करने पर कार्डियक टीम को बधाई दी तथा उन्होंने कहा कि, गीतांजली हॉस्पिटल विश्व स्तरीय नवीनतम तकनीकों का नेतृत्व करने के लिए हमेशा से तत्पर है। उत्तर भारत में भी चुनिंदा सेंटर पर ही इस प्रक्रिया द्वारा इलाज संभव हो पा रहा है, गीतांजली हॉस्पिटल का भी नाम इसमें शामिल होना गीतांजली के साथ-साथ पूरे उदयपुर शहर के लिए बहुत गर्व की बात है। इस प्रक्रिया हेतु इलाज से रोगी जल्दी स्वस्थ हो जाता है तथा जल्दी सामान्य जीवन में लौट आता है एवं पोस्ट सर्जरी में होने वाली जटिलताएं (यदि कोई) से निजात पाता है।


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