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क्या लिखे ,किसके लिए लिखे कोई सच सुनने को सच देखने को तय्यार ही  नहीं

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12 Dec 19
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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल,कोटा

क्या लिखे ,किसके लिए लिखे कोई सच सुनने को सच देखने को तय्यार ही  नहीं

मानवाधिकार दिवस पर एक चर्चा में निवर्तमान आईएएस तपेन्द्र कुमार लंबे प्रशासनिक अनुभव के साथ जिन्होंने सियासत ,दुनियादारी  को नज़दीक से देखा ,इतने सब अनुभवो के बाद वर्तमान नफरत के माहौल से त्रस्त है  दुखी है ,बदलते माहौल में हर मुद्दे पर सिर्फ सियासत ,सिर्फ वोटों से जोड़कर  मुद्दों को  भुनाने के प्रयास ,मिडिया ,अखबारों के रवैये से वोह  दुखी है । अख्तर खान अकेला अधिवक्ता से मंगलवार को एक चर्चा में कहा  वर्तमान हालातों में  क्या लिखे ,किसके लिए लिखे ,कोई सच सुनने को ,सच देखने को तय्यार ही  नहीं ,सिर्फ सियासत में वोटों के लिए कुछ भी करेगा की भागदौड़ चल रही है । 
         अपने मन की बात कहते हुए वे बताते है उन्होने क़रीब दो साल से कोई  अखबार नहीं पढ़ा ,टी वी  नहीं  देखा , मोबाइल का उपयोग सिर्फ परिवार की आवश्यक खेर खबर के लिए करते हैं।यही उनकी ज़िंदगी के सुकून का सच है ,उन्होंने कई आर्टिकल लिखे ,कई  रचनात्मक लेख  प्रकाशित करवाए । वह कहते हैं लिखने का शोक भी ज़रूरत भी है। ।सच एक वरिष्ठतम प्रभावशाली , ईमादार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तपेंद्र कुमार से मिलकर ,उनके विचार जानकर ,उनकी जीवनशैली में सब ,शुक्र का सिद्धांत हर किसी को प्रभावित करते हैं।
         तपेन्द्र कुमार का दर्शन ,उनके हालात ,ईश्वर के प्रति उनकी भक्ति ,ईमानदारी ,और सब्र शुक्र ने मुझे मुतास्सिर करते हैं।तपेंद्र कुमार कोटा में कलेक्टर फिर संभागीय आयुक्त पद पर रहे । ईमानदारी के ठसके के साथ आम लोगों के  मामले  तत्काल  बिना किसी सिफारिश के  निपटाने का रिकॉर्ड क़ायम किया । तपेंद्र कुमार राजस्थान के सभी सचिवालयों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे ।
        इनकी ईमानदारी ,  काम के प्रति निष्ठा, गरीब के प्रति करुणा भाव, बिना किसी रूकावट या सिफारिश के तत्काल फ़ाइलों के निस्तारण ने इन्हे आम जनता के बीच लोकप्रिय बनाया। स्पष्टवादिता उनके स्वभाव का विशिष्ठ गुण था। जो काम नियम विरुद्ध होता था उसे वे मंत्रियों तक से इनकार करने में गुरेज नहीं करते थे। समाज सुधार के दृढ़ पैरोकार होने से उन्होंने कोटा में अपनी कलेक्टर पोस्टिंग के दौरान स्मेक एवं नशा मुक्ति की जागृति के लिए आम जन को साथ लेकर व्यापक जन आंदोलन खड़ा कर दिया।
      इनकी कार्यशैली नेताओं की आँख की  किरकिरी भी थी । शायद पहले अधिकारी होंगे जिनकी शिकायत नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस बात को लेकर की कि यह अफसर तत्काल आम लोगों का काम कर देते है ,इससे आम  लोग हमारे पास सिफारिशे लेकर नहीं आते ,हमारा राजनितिक प्रभाव घट रहा हैं । शिकायत तो मज़ेदार थी ,लेकिन ईमानदार ,असरदार शख्सियत के खिलाफ होने से मुख्यमंत्री ने मुस्कुरा कर इस शिकायत को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। 
       बेदाग छवि के साथ ,बिंदास ईमानदारी व्यवस्था संचालित करते हुए अपने कामकाज निपटाने के बाद तपेन्द्र  कुमार की सेवानिवृत्ति के साथ ही उनकी पत्नी ने भी स्वेच्छिक सेवानिवृति ले ली । दुनियादारी से  इस ईमानदार आईएएस  का  मन भर गया और अब वे दुनियादारी के वैभव ,चमक दमक से अलग स्वेच्छिक वैराग्य जीवन गुजरबसर कर रहे है । सूट बूट से अलग थलग साधु वस्त्रधारी ,तपेन्द्र  कुमार के हुलिए से कोई नहीं कह सकता के यह शख्सियत महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर तैनात रहकर ,कडे फैसले लेने वाले अधिकारी रहे है । सिर्फ मूंग की दाल ,मसूर की दाल ,उड़द की दाल और सादी  चपाती ही इनका भोजन है । पहनावा  धोती , अंगोछा ,सर पर पगड़ी ,सर के   बालों की नियमित सफ़ाई  , इनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी है । 
       सुबह प्राणायाम ,ईश्वरीय वाणी वेदों का अध्ययन ,  उपनिषदों  का  अध्ययन ,,,सब्र , शुक्र ,और एकेश्वर वाद  के सिद्धांत पर भरोसा ही  इनकी ज़िंदगी  है। । जयपुर में निवास करने वाले तपेन्द्र कुमार अपनी दिनिचर्या ,अपने फेसलों से प्रसन्नचित  अपने दोनों  पुत्रों के गोल्ड मेडेलिस्ट हाईकोर्ट एवं सुप्रीमकोर्ट के सफलतम वकील होने पर नाज़  करते हैं । तपेंद्र कुमार का सादा जीवन उच्च विचार किसी के भी लिए प्रेरणा की किरण बन सकता है।


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