GMCH STORIES

क्या बच पाएंगे राजसमंद में परिंदों के आशियाने ?

( Read 9332 Times)

20 Jul 21
Share |
Print This Page
क्या बच पाएंगे राजसमंद में परिंदों के आशियाने ?

राजसमंद / जैव विविधता से समृद्ध ऐतिहासिक राजसमंद झील के पेटे में विकास एवं मनोरंजन के नाम पर किए जा रहे कार्यों को प्राचीन प्राकृतिक धरोहर से खिलवाड़ बताते हुए पक्षीप्रेमियों ने चिंता जताई है और कहा है कि झील के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ व उगे देशी बबूल के पुराने पेड़ों को काटे जाने से यहां पर कई दुर्लभ पक्षियों के आशियाने नष्ट हो जाएंगे।  
राजसमंद झील के संरक्षण-संवर्धन के लिए नवगठित राज परिंदे नेचर क्लब के सदस्यों के साथ   अजमेर और उदयपुर से पहुंचे पर्यावरण प्रेमियों ने झील के पेटे में नेचर वॉक के दौरान इस बात पर चिंता जताई कि झील के पेटे में कई दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों के नीड़न करने वाले (घौंसले बनाने वाले) वृक्षों को पैरासेलिंग तथा वाटर स्पोर्ट्स के नाम पर काट दिए गए हैं।

इस दौरान स्थानीय राज परिंदे नेचर क्लब के सदस्य डॉ. नरेंद्र पालीवाल ने बताया कि राजसमंद में आर.के.हॉस्पिटल, कलेक्ट्रेट, कोर्ट, मुख्य डाकघर के प्रांगण में अनेक वृक्ष थे, परंतु नीडन व्यवस्था हेतु पक्षियों द्वारा कुछ चयनित प्रजातियों पर ही बसेरा किया जाता है और ये मुख्यतः देशी बबूल होते हैं। इस प्रकार झील में भी होता है परंतु मनोरंजन और विकास के नाम पर नीड़न करने वाले वृक्षों को काटकर नए पौधों का रोपण किया गया है।

खो जाएंगी कई पक्षी प्रजातियां:

पक्षी विशेषज्ञों ने आश्चर्य इस बात पर जताया है कि प्रशासन द्वारा पक्षियों की नेस्ंिटग के लिए उपयोगी देशी बबूल को काटकर नए पौधों में गुलमोहर, अशोक आदि प्रजातियों को रोपित किया जा रहा है जो कि अनुचित हैं। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सत्य प्रकाश मेहरा ने इसकी पुष्टि करते हुए प्रशासन को इस प्रकार के विकास को रोकने की अपील की है और कहा है कि पेड़ों के इस अदूरदर्शितापूर्ण कटाई व नए पौधों को रोपकर तो राजसमंद से अनेक पक्षी प्रजातियों को हम खो देंगे।

पुराने वृक्षों को काटना दुःखद:

पर्यावरण व पक्षी प्रेमी पंकज शर्मा सूफी एवं नरेंद्र पालीवाल के अनुसार अदब की छतरी से वर्षों पुराने वृक्षों को काटा गया। इसके पुराने नेस्टिंग ट्री के कटने से अब उल्लू, ब्राह्मनी काईट, ओस्प्रे आदि पक्षियों के आवास नष्ट हो गए हैं। वर्तमान में भी ये पक्षी इधर-उधर अपेक्षित वृक्षों की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर गोपाल नागदा द्वारा प्रशासन से सवाल पूछने पर बताया गया कि हमारे पास कानून के तहत स्थानीय पेड़ों को काटने की अनुमति है एवं हम विकास हेतु कहीं भी वृक्ष काट सकते हैं, जबकि नेस्टिंग ट्री को काटना तो अपराध है। उन्होंने प्रशासन केे इस असंवेदनशील और हठधर्मिता पूर्ण रवैये पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि जल्द ही इस कार्यवाही को नहीं रोका गया तो सक्षम न्यायालय अथवा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जनहित याचिका दर्ज की जाएगी।  
इस मौके पर गोपाल नागदा, कुलदीप चतुर्वेदी व रितु अग्रवाल सहित राज परिंदें नेचर क्लब के अन्य सदस्यों ने झील के केचमेंट क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए डाटा संकलित किया और प्रशासन की इस कार्यवाही व हठधर्मिता पूर्ण आचरण पर दुख व्यक्ति करते हुए पर्यावरण को नष्ट करने वाले इस प्रकार के कृत्यों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने और दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करवाने की बात कही है।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories : Rajsamand News
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like