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स्वच्छता :स्वभाव में परिवर्तन का यज्ञ

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16 Sep 18
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स्वच्छता :स्वभाव में परिवर्तन का यज्ञ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता को स्वभाव में परिवर्तन का यज्ञ बताते हुए कहा कि देशवासियों के इस आंदोलन के कारण ही पिछले चार साल में देश के 90 प्रतिशत के अधिक इलाके खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं जबकि गत 60-65 सालों में केवल चालीस प्रतिशत इलाके ही मुक्त हो पाए थे। मोदी ने कहा कि गंदगी गरीब के जीवन में अंधेरे की तरह है और उसे बीमारी के दलदल में धकेल रही है। स्वच्छता अभियान ने उसे इस अंधेरे से बचाया है। मोदी ने शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ‘‘स्वच्छता ही सेवा है’ पखवाड़े का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने देश के कोने- कोने में सैंकड़ों स्वच्छताग्राहियों से भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात की और इस आंदोलन में लोगों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब चार साल पहले स्वच्छता अभियान शुरू हुआ था तो किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि चार साल में देश के 20 राज्य एवं केन्द्रशासित क्षेत्र 450 जिले तथा साढ़े चार लाख से अधिक गांव खुले में शौच से मुक्त हो गए और करीब नौ करोड़ शौचालय बन गये। इस अभियान से लोगों के स्वास्य पर सकारात्मक असर पड़ा है और कई गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलेगी।उन्होंने कहा कि जब यह अभियान शुरू हुआ था तो केवल 40 प्रतिशत इलाके ही स्वच्छ थे लेकिन इन चार सालों में 90 प्रतिशत से अधिक इलाके खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं यानि जो काम पिछले 60-65 सालों में नही हुआ वह केवल चार वर्षों में हो गया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता का काम केवल सरकार अकेले नहीं कर सकती है। इसमें सभी की भागीदारी आवश्यक है और आप लोगों ने इसे आंदोलन बनाकर इस कार्य को सफल बनाया है। उन्होंने विश्व स्वास्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस स्वच्छता आंदोलन से डायरिया में 30 प्रतिशत कमी आयी है तथा इसमें और भी कमी आयेगी। करीब तीन लाख बच्चों की जान बचाने में यह आंदोलन सफल रहा है। उन्होंने इस आंदोलन में महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान को भी रेखांकित करते हुए कहा कि वह खुले में महिलाओं को शौच करते हुए देख कर इतने पीड़ित हुए कि उन्होंने इस कार्यक्रम की शुरुआत की। अब स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय बन जाने से उनके ड्राप आउट में काफी कमी आयी है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल शौचालय बन जाने से यह आंदोलन पूरा नहीं होगा,बल्कि कचरे एवं कूड़े का भी प्रबंधन करना होगा और हम सबको श्रमदान भी करना होगा ।
प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से स्वच्छता अभियान के कई‘‘दूतों’सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, प्रख्यात उद्योगपति रतन टाटा, श्रीश्री रविशंकर, माता अमृतानंदमयी , सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अलावा पटना साहेब गुरुद्वारा और अजमेर दरगाह के प्रमुख सेवकों से उनके अनुभवों के बारे में बात की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उन्होंने स्वच्छता के बारे में बात की और राज्य में इसके लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों पर बात की।प्रधानमंत्री ने अमिताभ बच्चन से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये स्वच्छता दूत के रूप में उनके अनुभवों के बारे में पूछा तो बच्चन ने उन्हें विस्तार से बताया। बच्चन ने कहा, आपने जब मुझे इस अभियान में शामिल किया को मुझे लगा कि मुझे केवल प्रचार-प्रसार स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ना चाहिए और इस कार्य के लिए मैं मुंबई के एक समुद्र तट पर गया। मोदी ने बच्चन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके पिता एवं मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन की पंक्तियां भी सुनाई, जिनमें स्वछता पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने उद्योगपति रतन टाटा से भी बात की। टाटा ने कहा कि वह इस आंदोलन को तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से भी मदद करेंगे तथा देश को स्वच्छ बनाने के सपने को पूरा करने में सहयोग करेंगे।
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