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कविता-जिंदगी में हंसना

( Read 2010 Times)

21 Jun 21
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-लक्ष्मीनारायण खत्री

कविता-जिंदगी में हंसना

जिंदगी 

में कुछ खो दें 

तो नहीं पछताना

ज्यादा 

प्राप्त कर ले 

तो मत इतराना

कुछ 

भी नहीं मिले 

तो मौत को

कभी गले 

नहीं लगाना

ज़िन्दगी का अर्थ

इसे व्यर्थ 

मत गवाना

कदम-कदम

सफलता से चलना 

प्रीत के

गीत है गाना

कठीन राह मे

सफर बने सुहाना

जग में

खुशी से है हंसना।

 


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