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विकास के नाम पर विनाश की कहानी बयां करता है नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’

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21 Feb 21
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विकास के नाम पर विनाश की कहानी बयां करता है नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’

उदयपुर।नाट्यांश नाटकीय एवं प्रदर्शनीय कला संस्थान, उदयपुर के कलाकारों ने रविवारिय नाट्य संध्या में किया नाटक - जीवन की दुकान का मंचन। कॉविड - 19 के मद्देनजर मात्र 20 दर्शकों के लिये ही की गयी प्रस्तुती। नाटक के मंचन से पहले नशे के खिलाफ एक मॉनोलोग - ‘विलय’ प्रस्तुत किया। इस मॉनोलोग का लेखक, निर्देशक व अभिनेता अमित श्रीमाली है।

इसके बाद नाटक जीवन की दुकान का मंचन किया गया। नाटक विकास के चलते और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पर्यावरण पहुँचायी गयी हानियो पर आधारित है साथ ही वर्तमान में पर्यावरण की नाजु़क हालात को देखते हुए पेड़ो को बचाने एवं पेड़ो को लगाने का संदेश देता है।

विकास और लालच के चलते हम लोग प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रहे है। जिससे कई तरह की प्राकृतिक आपदाऐं पैदा हो सकती है। इस सब का हमें पता होने के बावजुद भी हम अपनी हरकतों से बाज नही आते। हमारी इसी सोई सोच को बदलने के लिए नाटक का मंचन महाराष्ट्र भवन में किया गया।

नाटक के बाद कलाकारो ने पर्यावरण को बचाने से संबंधित सवालों को दर्शकों के समक्ष रखा। साथ ही दर्शको से पर्यावरण के रक्षक, पेडो़ को बचाने एवं नये पेड़ लगा कर उनके बड़े होने तक पेड़ो की देखभाल करने का आग्रह भी किया।

नाटक का सारांश

नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’ की चार दोस्तों की कहानी है। जिनमे से तीन दोस्त एक व्यवसाय की योजना बनाते है। ये तीनों दोस्त ऑंक्सीजन मेकिंग फेक्ट्री के फायदे के लिए दुनिया के तमाम जंगल एंव पेडों को तबाह करने की योजना बनाते है। किन्तु इनका चौथा दोस्त इन तीनों को पेडा़े के महत्व के बारे में समझाता है। साथ ही बिना पेडा़े के भविष्य की एक झलक भी दिखाता है। बिना पेडो के भविष्य को देखने के बाद तीनों दोस्त पेड़ो को काटने के बारे मे सोचना छोड़कर पेडा़े को बचाने के बारे मे सोचना शुरू कर देते है।

अमित श्रीमाली द्वारा लिखित एवं अशफाक नुर ख़ान पठान द्वारा निर्देशित नाटक जीवन की दुकान के कलाकारों के रूप में मोहम्मद रिज़वान मंसुरी, अगस्त्य हार्दिक नागदा, अमित श्रीमाली और अशफाक नुर ख़ान पठान ने अपने बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में मंच संचालन महेश कुमार जोशी का रहा साथ ही इस नाट्य आयोजन को सफल बनाने के लिये मंच पार्श्व से फ़िज़ा बत्रा, राघव गुर्जरगौड़, पियूष गुरुनानी, धीरज जिंगर, दाऊद अंसारी, चक्षु सिंह रूपावत व यश शाकद्वीपीय का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम संयोजक राघव गुर्जरगौड़ ने बताया कि जीवन की दुकान के 49 मंचन हो चुके है। यह इस नाटक का 50वां मंचन है। कोविड़ महामारी के लॉकडाउन और अनलॉक के बाद यह टीम नाट्यांश की चौथी प्रस्तुती है। आगे भी संस्थान का प्रयास है कि ऐसी ही प्रस्तुतियां होती रहे। सोशल डिस्टेंसींग और कोविड प्रोटोकॉल की पालना के चलते मात्र 20 दर्शकों के सामने प्रस्तुति दी गयी।


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