दुनिया को भारत ने ही दिया सद्भावना का संदेश -डॉ. सुब्बाराव

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09 Sep 19
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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

दुनिया को भारत ने ही दिया सद्भावना का संदेश -डॉ. सुब्बाराव

कोटा |    प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव ने कहा कि विश्व में भारत विविधताओं का देश है। यहां पर सभी धर्मों, भाषा एवं संस्कृति को मानने वाले नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। दुनियां को धार्मिक समभाव का संदेश भारत ने ही दिया है। हमें इसी परम्परा को आगे बढाते हुए देश की एकता-अखण्डता को बनाये रखना होगा। 
        डॉ. सुब्बाराव रविवार को कलक्ट्रेट स्थित टैगोर सभागार में महात्मा गांधीजी की 150 वीं जयंति के उपलक्ष में आयोजित प्रबुद्ध नागरिकों से परिचर्चा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लगातार सकारात्मक व सदविचारों को आगे बढाने के लिए आम नागरिकों को भारत के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य से प्रेरणा लेकर कार्य करना चाहिये। उन्होंने कहा कि अहिंसा एवं शांति-भाईचारे का संदेश विश्व को हमने दिया है। सभी धर्मों का सार मानव धर्म को बढाना है। व्यक्ति को स्वयं पहचानकर सर्वकल्याण की भावना के साथ जीवन यापन करना चाहिये। 
            आध्यात्मिक शक्ति को दुनियां की सबसे बडी शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि कितनी भी कठिनाईयां आये, उनसे भ्रमित हुए बिना सद्मार्ग पर चलकर प्रतिदिन एक घंटे स्वयं के लिए तथा एक घंटा देश के लिए समर्पित करें जिससे देश उन्नति की राह पर निरन्तर चलता रहे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में गांधीजी ने जिस प्रकार अनेक कठिनाईयों व परेशानियों का सामना करते हुए भी भेदभाव एवं अन्याय के खिलाफ देश में माहौल तैयार किया। इसी प्रकार कठिनाईयों से सामना करने की शक्ति बच्चों में तैयार करनी होगी। इससे तनाव के समय भ्रमित नहीं होंगे। 
          डॉ. सुब्बाराव ने कहा कि भारत में चार प्रमुख धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ। यहां सभी धर्मों, भाषायी लोगों को समान अधिकार हैं। यह देश की एकता और अखण्डता के लिए सबसे बडी ताकत है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही धर्म के बावजूद पाक का विभाजन भाषायी आधार पर बांग्लादेश के रूप में सामने आया है। जबकि भारत बहुभाषी एवं बहुधर्मों के लोगों का देश है। उन्होंने बचपन से ही एक-दूसरे की भाषा सीखने एवं धार्मिक सहिष्णुता की सीख बच्चों को देने का आह्वान किया। 
         कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित नागरिकों को हमारा प्यारा हिन्दुस्तान, भारत जैसा दूसरा देश नहीं एवं भिन्नता में अभिन्नता गीतों के माध्यम से देश की एकता-अखण्डता के लिए मिलकर कार्य करने, सभी धर्मों, जातियों, सम्प्रदायों के साथ बिना भेदभाव के देश के विकास में भागीदार बनने का संदेश दिया। जिला कलक्टर मुक्तानन्द अग्रवाल ने स्वागत करते हुए कहा कि देश का सौभाग्य है कि गांधीजी के विचारों को आज भी जीवन्त रूप में डॉ. सुब्बाराव जैसे महान विचारक आगे बढा रहे हैं। उन्होंने देश की उन्नति के लिए गांधीजी के विचारों से युवाओं को प्रेरणा लेने की सीख देते हुए कहा कि अहिंसा एवं आध्यात्मिक शक्ति के संदेश को मिलकर जन-जन तक पहुंचाना होगा। 
         बसांगोद विधायक भरत सिंह ने कहा कि गांधीजी के विचार देश को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे। युवा पीढी तक गांधीजी के साहित्य एवं विचारों को पहुंचाने के लिए संस्थाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने ग्राम स्वराज्य की कल्पना की थी उसे साकार करने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को भी भारत की एकता-अखण्डता के लिए कार्य करना चाहिये। राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की 150 वीं जयंति समारोह के जिला संयोजक पंकज मेहता ने संचालन करते हुए कहा कि गांधी अतीत ही नहीं भविष्य भी है। डॉ. सुब्बाराव जैसे महान विचारकों से प्रेरणा लेकर आम नागरिकों को भी देश की उन्नति के लिए प्रतिदिन संकल्पबद्ध होकर कार्य करना चाहिये। 
       इस अवसर पर गांधीवादी नरेश विजयवर्गीय, नशामुक्ति अभियान के डॉ. आरसी साहनी, अरूण भार्गव, गायत्री परिवार के यज्ञदत्त हाडा, किसान नेता दशरथ कुमार, डॉ. निधि प्रजापति, सहित बडी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे। 

आध्यात्मिकता से अपराधमुक्त समाज का निर्माण संभव

            गांधीवादी डॉ. एसएन सुब्बाराव ने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति सबसे बडी शक्ति है इससे देश-दुनियां में बदलाव लाया जा सकता है। इसको अपनाकर रोगमुक्त व भयमुक्त होने के साथ अपराधमुक्त समाज का निर्माण संभव है। वे कोटा प्रवास के दौरान स्थानीय जिला कारागृह में महात्मागांधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित गांधी दर्शन परिचर्चा कार्यक्रम में उपस्थित कैदियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता मानव मूल्यों की वह चाबी है जिसके बल पर परिवार, समाज व देश का सर्वांगिण विकास संभव है। उन्होंने कहा कि भूलवश अथवा अपराधबोध के कारण किये गये कार्य का पूर्ण सत्यता के साथ पश्चाताप करने से आध्यात्मिकता को बढावा मिलता है। वहीं मानवीय मूल्यों में वृद्धि भी होती है। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने पांच हजार साल पूर्व मानव को स्वयं को पहचानने का संदेश देते हुए ईश्वर का अंश मानव में होने की बात कही थी। सभी धर्मों में यही संदेश दिया गया है। मानव स्वयं को पहचाने तथा सद्मार्ग पर चलते हुए विश्व के कल्याण के लिए सोचकर उसे मूर्तरूप देने के लिए प्रयास करे। 

          उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मागांधी द्वारा दिये गये संदेश, आचार्य विनोबाभावे के भूदान आन्दोल, जेपी नारायण के आन्दोलन की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से समाज में अपराधों में कमी आई। उन्होंने कहा कि उनके प्रयास से अब तक 654 डाकुओं द्वारा आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में आने का निर्णय लिया था। आज समाज में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने सभी कैदियों को मांसाहार का त्याग करने, नशामुक्त समाज के लिए बीडी-सिगरेट व अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उन्होंने कैदियों को प्राणायाम का महत्व बताया तथा स्वयं को पहचानते हुए ईश्वर की संतान मानकर सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। 

       कारागार के आर्केस्ट्रा दल द्वारा गांधीजी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी गई। डॉ. सुब्बाराव ने गांधीजी के प्रियभजन रघुपति राघव राजाराम एवं विनोबाभावे के जय जगत की बोलो की प्रस्तुति देते हुए कैदियों के साथ ताल से ताल मिलाते हुए सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंति के जिला संयोजक पंकज मेहता ने डॉ. सुब्बाराव का जीवन परिचय देते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से समाज में गांधीवादी विचारों का प्रसार हो रहा है। युवा पीढी सद्मार्ग पर चलकर देश सेवा में भागीदार बन रही है। जैल अधीक्षक सुमन मालीवाल ने स्वागत करते हुए कहा कि गांधीवादी विचार आज भी प्रासंगिक है। समाज एवं देश में बदलाव के लिए प्रत्येक नागरिक को स्वयं की भूमिका तय करते हुए आगे बढना होगा। उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा बंदी सुधार कार्यक्रम के तहत किये गये नवाचारों की जानकारी दी। 


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