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बाजार में हार्मलेस हार्वेस्ट की श्रेणी में

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03 Jun 24
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बाजार में हार्मलेस हार्वेस्ट की श्रेणी में

सूचित करें खडीन के उत्पाद- डॉ. प्रभात कुमार

जैसलमेर 02 जून। कृषि विज्ञान केन्द्र जैसलमेर के तत्वावधान में दबलापार गांव रामगढ में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण सह कृषक कार्याशाला का आयोजन किया गया इस अवसर पर डॉ अरूण कुमार माननीय कुलपति स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए खडीन क्षैत्रों के प्रंस्करण उत्पादा को जैविक उत्पाद की जगह प्राकृतिक उत्पाद में नामित किये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि खडीन में उत्पादित होने वाली फसलों की उत्पादन प्रक्रिया को डिजिटल कहानियों के माध्यम से रिकॉर्ड कर सोशल मिडिया द्वारा जनजन तक पहुचाया जाये।

इस दौरान डॉ. प्रभात कुमार उद्यानिकी आयुक्त, भारत सरकार ने कहा कि कृषि क्षैत्र के व्यवसायिकरण होने पर अन्य क्षैत्रों के स्वत विकास होने की सम्भावना बढ जाती हैं जिससे कृषि का सतत विकास होता हैं। साथ ही उन्होने खडीन से पैदा होने वाले उत्पाद को हार्मलेस हार्वेस्ट अर्थता बिना प्रकृति को नुकसान पहुॅचाये उत्पादित होने वाला उत्पादन की श्रेणी में बताया और यही इसका अद्वितीय विक्रय बिन्दु हैं, जो इसको बाजार में अन्य उत्पादों से अलग स्थापित करेगा।

इस अवसर पर कर्नल प्रतुल थापलियाल, इको टास्क फोर्स सीओ 128 रक्षा मंत्रालय ने जिम्मेदारी संग भागीदारी की भावना रखते हुए कृषि के कार्यो को पूरा करने पर जोर दिया जैसे सेना जिम्मेदारी से पेड़ लगाये तो किसान भागीदारी से उनका पालन करें। उन्होने मोहनगढ क्षैत्र में इको टास्क फोर्स द्वारा वृक्षारोपण के क्षैत्र में अभूतपूर्व कार्य के बारे में किसानों को अवगत कराया।

वी.पी.सिंह, कमान्डेन्ट, बीएसएफ ने कृषि विज्ञान केन्द्र एवं खडीन के किसानों के सयुक्त प्रयासों से तैयार नवाचार प्रसंस्कृत उत्पाद खडीन नॉन खटाई का सर्टीफिकेशन करवाने के दिशा में काम करने पर जोर दिया। उन्होने प्रसंस्करण उत्पाद की सुरक्षित उपयोग समयावधि का अध्ययन करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. पी.एस.शेखावत, निदेशक, अनुसंधान निदेशालय, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने प्राकृतिक खेती पद्धति में फसलों की उन्नत किस्मों का समावेश करने एवं रोग एवं कीटों की रोकथाम के लिए जैविक उत्पादों का उपयोग करने पर विशेष बल दिया।

डॉ. सुभाष चन्द्र, निदेशक, प्रसार शिक्षा निदेेशालय, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने खडीन क्षैत्र के उत्पाद खडीन नान खटाई की अनुठी विशेषता के कारण इसे राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने हेतु प्रयास किये जाने की आवश्यकता बताई।

डॉ. दीपक चतुर्वेदी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, जैसलमेर ने वर्षो से खडीन में होने वाली फसलों के उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण तक ले जाने की दिशा में केन्द्र द्वारा किये गये कार्यो की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

चतरसिंह, प्रगतिशील किसान ने किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र एवं स्वाकेराकृविवि, बीकानेर के सतत प्रयासों में सक्रिय भागदारी निभाने को कहा। इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ चारू शर्मा, डॉ बबलू शर्मा, अतुल गालव एवं गौरव सिंह ने भी कृषि से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर अपने संक्षिप्त विचार व्यक्त किये।


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