प्रतिवर्ष 19 मई को मनाया जायेगा ‘एबडोमिनल कैंसर डे’

( Read 1287 Times)

20 May 19
Share |
Print This Page
प्रतिवर्ष 19 मई को मनाया जायेगा ‘एबडोमिनल कैंसर डे’

जयपुर(विवेक मित्तल) । कैंसर एक ऐसी होती हैं जिसका नाम सुनने मात्र से मन में भय उत्पन्न हो जाता है, लेकिन समय रहते सही उपचार द्वारा इस असाध्य रोग पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। सकारात्मक सोच एवं रचनात्मक कार्यों के द्वारा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। समाज और आमजन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े इसी उद्देश्य से बिड़ला ऑडिटोरियम, जयपुर में प्रथम ‘एबडोमिनल कैंसर डे’ मनाया गया। इस अवसर पर पेट में होने वाले विभिन्न कैंसर रोग के बारे में दस हजार से अधिक सर्जरी कर चुके सीके बिरला हॉस्पीटल्स आरएचबी में डायरेक्टर पद पर कार्यरत जीआई सर्जरी विशेषज्ञ डा. संदीप जैन ने लक्षण, बचाव तथा उपचार के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में पेट के विभिन्न कैंसरों (उदर सम्बन्धी, लीवर, अपेन्डिक्स, पित्ताशय, बड़ी आंत, गुदा आदि) का समय रहते इलाज नहीं हो पाने का कारण इस रोग से मरने वालों की मृत्यु दर अधिक है लेकिन हमें इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। मरीज का सफल इलाज होना उसकी उम्र पर नहीं अपितु उसके शरीर में बीमारी की उम्र पर निर्भर करता है। हमें इलाज से डरने की आवश्यकता नहीं है, बीमारी से डरने की आवश्कता है। हम सभी को शरीर में अचानक होने वाले परिवर्तनों के प्रति सर्तकता रखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि सजगता ही श्रेष्ठ उपचार है। जागरूकता के अभाव में मरीज प्रारम्भिक स्तर पर इलाज करवाने डाक्टर के पास नहीं पहुंचते और जब पहुंचते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस अवसर पर जागरूक मरीजों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। डा. जैन ने बताया कि अभिभावकों की सजगता के कारण 11 माह के मास्टर चैतन्य का समय पर सफल इलाज हो सका और वह आज 8 वर्ष का हो गया है। परिजनों की जागरूकता के कारण 106 वर्षीय मरीज का इलाज भी सम्भव हो पाया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजा बाबू पंवार, कुलपति, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय तथा गेस्ट ऑफ ऑनर श्रीमती मरिना मैथसन रीजनल प्रसीडेण्ट, आर्मी वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन (आवा) थीं। मुख्य अतिथि डा. राजाबाबू पंवार ने कहा कि इस तरह के आयोजन से समाज में जटिल बीमारियों से लड़ने के प्रति जागरूकता आती है। हमें ग्रामीण क्षेत्रों में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से जागरूकता लानी होगी। सफल इलाज करवा कर सामान्य जीवन यापन करने वाले मनोहरलाल, कुलदीप, बालूसिंह, गीता गुप्ता, नीरू भार्गव, प्रेमचन्द जैन, देवीसिंह, हरिकिशन, विचित्रसिंह आदि ने भी अपने अनुभव साझा किये। 


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories : Health Plus
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like