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अब मीडिया को समाधान का हिस्सा बनना होगा: शिवानी दीदी

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15 Sep 23
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अब मीडिया को समाधान का हिस्सा बनना होगा: शिवानी दीदी

आबू रोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के शांतिवन परिसर में चल रहे पांच दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन का समापन हो गया। सम्मेलन में विद्वान पत्रकारों ने चिंतन-मंथन कर निष्कर्ष निकाला कि वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए मीडिया को सशक्त बनना होगा। समापन पर शांति पत्रकारिता को बढ़ावा देने का एजेंडा पेश किया गया। अध्यात्म के बिना शांति संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि पत्रकारों के जीवन में अध्यात्म का समावेश हो। शांति पर बात करने के लिए पहले खुद के जीवन में शांति, प्रेम, सौहार्द्र होना जरूरी है। वैश्विक सद्भाव के लिए शांति पत्रकारिता विषय पर दो सत्रों में सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें भारत सहित नेपाल से 1500 पत्रकारों ने भाग लिया।
 
समापन सत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता बीके शिवानी दीदी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें समस्या पर चर्चा करने की जगह समाधान का हिस्सा बनना होगा। इसके लिए हमें अपने जीवन में सबसे पहले समाधान और शक्ति के संकल्पों को लाना होगा। सारे विश्व की नजर भारत पर है। क्योंकि भारत के पास ही दुनिया की समस्याओं को हर करने की शक्ति और ताकत है। मीडिया को ऐसे सकारात्मक कदम उठाने होंगे, राह दिखाना होगी कि समाज को नई प्रेरणा, नई राह मिले। समाज में जैसे-जैसे टीवी, सीरियल, फिल्म आदि का विस्तार होता गया वैसे-वैसे बदलाव आते गए। जो हम सुनते, देखते और पढ़ते हैं उससे मन का स्वास्थ्य बनता है। जो बार-बार संकल्प कर लिया वह हमारी सोच बन जाती है। सोच से संस्कार और संस्कार, कर्म में बदल जाते हैं। यही कर्म हमारा भाग्य बनाते हैं। मीडिया के भाई-बहन जब अपनी सोच को बदल देंगे तो वह जो लिखेंगे, समाचार पेश करेंगे तो समाज में श्रेष्ठ कंटेंट ही जाएगा। घर में जो धन आए वह दुआओं वाला हो। दूसरों को सुकून और शक्ति के संकल्पों को देने वाला ही धन लाएं।  

हर घंटे एक मिनट निकालकर श्रेष्ठ संकल्प करें-
शिवानी दीदी ने कहा कि कार्य के दौरान बीच-बीच में हर घंटे एक मिनट रुककर अपनेआप को याद दिलाएं कि मैं एक शक्तिशाली आत्मा हूं। जब यह संकल्प बार-बार दिन में दोहराएंगे तो वह हमारा संस्कार बन जाएगा। संकल्प से सिद्धी होती है। जब संकल्प को बार-बार दोहराएंगे तो सिद्ध होना ही है। यदि हम बार-बार डिप्रेस के संकल्प को दोहराएंगे तो वह भी हमारा संस्कार बन जाता है। मीडिया में जब बार-बार हम जो न्यूज़ या समाचार देखते हैं तो वह हमारे संकल्पों में आता है और संस्कार बनने लगता है। टेक्नोलॉजी के इस दौर में सबसे बड़ा संग का रंग है- फोन में कुछ न कुछ देखना और सुनना। अब हमारे जीवन में सबसे ज्यादा फोन का रंग लगने लगा है।

राजयोग की कराई गहन अनुभूति-
उन्होंने राजयोग ध्यान में शांति की गहन अनुभूति कराते हुए कहा कि रोज सुबह उठते ही कुछ समय ध्यान करें और संकल्प करें कि मैं एक चमकता हुआ सितारा हूं। मैं शांत हूं, स्थिर हूं। मैं शक्तिशाली आत्मा हूं। मैं परमात्मा का फरिश्ता हूं। सृष्टि के इस परिवर्तन के कार्य में मैं आत्मा अपने संस्कार परिवर्तन से सतयुगी सृष्टि का आहृान करती हूं। मैं सतयुगी आत्मा, शक्तिशाली आत्मा हूं।
अंडमान एंड निकोबार दीप से आए सांसद कुलदीप राय शर्मा ने कहा कि मीडिया सबसे बड़ी ताकत है।  प्राकृतिक आपदा में मीडिया महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। इसलिए मीडिया की बड़ी जिम्मेदारी है। ब्रह्माकुमारीज़ में दिए जा रहे ज्ञान और शिक्षा को मीडियाकर्मी अपने जीवन में अपनाएंगे तो निश्चित रूप से उनके अपने जीवन और पत्रकारिता में बदलाव आएगा।

आज भी अच्छा कंटेंट पसंद किया जाता है-
छग रायपुर से आए कुशाभाऊ ठाकरे जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. मानसिंह परमार ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ समाज में आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से मानवीय मूल्यों को बढ़ा रहा है। यहां हमें इंटरा पर्सनल कम्युनिकेशन सिखाया जाता है, जहां हम खुद को परमात्मा से जोड़ते हैं। मिशन पत्रकारिता को जोड़कर हम भविष्य की पत्रकारिता में कार्य करेंगे तो हम कुछ अच्छा कर पाएंगे। एक समय था जब दूरदर्शन पर रामायण सीरियल आता था तो देश में कर्फ्यू सा लग जाता था। मतलब लोग सकारात्मक और अच्छा कंटेंट पसंद करते हैं। आज भी यदि हम अच्छा कंटेंट देंगे तो देखने वाले लोग हैं।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-
- ब्रह्माकुमारीज़ के कार्यकारी सचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि हम अपने मूल्य और संस्कारों को भूल गए हैं। इससे हमारी सोच और कर्मों में गिरावट आ गई है। अब परमात्मा आकर हमें राजयोग की शिक्षा दे रहे हैं। वह स्वर्णिम दुनिया में जाने की राह बता रहे हैं।
- मुंबई से आए सीनियर मैनेजमेंट कंसल्टेंट ओमवीर सिंह सैनी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ के ज्ञान और अध्यात्म को जीवन में अपनाने से पत्रकारों की खुद की स्थिति के साथ पत्रकारिता की दिशा बदल सकती है।
 - इंदौर से आए रेडियो सरगम के निदेशक वरिष्ठ पत्रकार आशीष गुप्ता ने कहा कि आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अध्यात्म की जरूरत है। हम विज्ञान में कितने भी आगे बढ़ जाएं लेकिन अध्यात्म के बिना सब अधूरा है।
- जोनल को-ऑर्डिनेटर बीके सरला आनंद बहन भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन गुजरात जोन की जोनल को-ऑर्डिनेटर बीके नंदिनी ने किया। मैसूर से आए जानकी टीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर महादेव स्वामी, भागलपुर से आए इग्नू के असिस्टेंड डायरेक्टर डॉ. कमलेश मीना ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समापन पर सभी अतिथियों का सम्मान किया गया। आभार सिद्धपुर से आईं सबजोन को-ऑर्डिनेटर बीके विजया बहन ने माना। शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्यान में बालक-बालिकाओं ने जोरदार प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।


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