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हृदय रोगों के लिए आधुनिक जीवनशेली भी जिम्मेदार - डॉ. कासलीवाल

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19 Nov 22
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हृदय रोगों के लिए आधुनिक जीवनशेली भी जिम्मेदार - डॉ. कासलीवाल

उदयपुर। हमारा हृदय दिन-रात बिना रूके लगातार काम करता रहता है लेकिन हम हार्ट की हेल्थ को लेकर जागरूक नहीं है। भारत में हृदय से संबंधित बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या में हर साल चौंकाने वाली वृद्धि हो रही है और कई कम उम्र के लोगों की जागरूकता के अभाव में असमय मृत्यु हो जाती है। सही समय पर हृदय रोग से प्रभावित लोगों को जांच और इलाज मिल जाए तो कई लोगों की जिन्दगी बचायी जा सकती है। हृदय रोग विशेषज्ञों के राष्ट्रीय महासम्मेलन में नवीन तकनीकों के प्रयोग और जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जा रहा है। पांचवे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त राजेन्द्र भट्ट और वि६ाष्ट अतिथि आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व नियन्त्र्क डॉ. लाखन पोसवाल, आयोजन चेयरमैन डॉ. अमित खण्डेलवाल ने दीप प्रज्जवलन करके किया। पहले दिन हार्ट डिजिज की जांचों और महत्वपूर्ण उपचार तकनीकों पर विशेष रूप से चर्चा की गयी। कार्डियोलॉजी के क्षेत्र् में वि६ाष्ट योगदान करने वाले चिकित्सकों डॉ. रवि आर. कासलीवाल, डॉ. संदीप मिश्रा, डॉ. संजय महरोत्र और डॉ. मोहित गुप्ता का यहां पर सम्मान किया गया । दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन हार्ट एंड रिदम सोसायटी की ओर से किया जा रहा है जिसमें अकेडमिक पार्टनर एपीआई चेप्टर उदयपुर तथा पारस हॉस्पिटल उदयपुर हैं।


मुख्य अतिथि राजेन्द्र भट्ट ने कहा कि शहरी क्षेत्र् में तो लोग समय के साथ जागरूक हो रहे हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रें में हृदय संबंधी समस्या को हार्ट अटैक माना जाता है और लोग उपचार के लिए आगे आने से भी डरते हैं। चिकित्सकों द्वारा इस तरह के सम्मेलन जागरूकता लाने के लिए बडा व सफल कदम साबित होंगे। वि६ाष्ट अतिथि डॉ. लाखन पोसवाल ने कहा कि हृदय रोग से प्रभावित मरीजों में पुरानी उपचार विधियों की तुलना में नयी तकनीकें अधिक प्रभावी व सफल साबित हो रही है इस कारण जटिल मामलों में भी मरीज की जिन्दगी बचाने में सफलता मिल रही है।

आयोजन चेयरमैन डॉ. अमित खण्डेलवाल ने बताया कि हृदय रोग विशेषज्ञों के पास अक्सर मरीज तभी आते हैं जब समस्या बडा रूप ले चुकी होती है। मरीजों की समस्या और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखकर स्वस्थ हृदय के लिए कार्डियोलॉजी में नवाचारों को सार्वजनिक करना थीम सम्मेलन का आयेाजन किया जा रहा है। सम्मेलन के पहले दिन साइंटिफिक से६ान की शुरूआत हृदय रोग की सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण जांचों ईसीजी और ईको से संबंधित प्र६नोत्तरी से हुई । हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्राॅल से प्रभावित मरीजों की विभिन्न स्वास्थ्य परिस्थितियों में सफल उपचार विधियों और इन समस्याओं से बचने के लिए उपाय पर विचार रखे गये। हृदय की गति असामान्य होने के कारण और इस स्थिति में स्ट्रोक में बचाव के उपाय, स्ट्रोक के उपचार में एट्ररियल फिब्ररीले६ान का उपयोग पर वार्ता के साथ विशेषज्ञों ने अन्य नवीन तकनीकों पर प्रका६ा डाला । बैचेनी व हार्ट अटैक के केसेज में मरीज की काउंसलिंग, जांचे और नवीन दवाओं के चयन और उपयोग के साथ- साथ नये स्टेण्ड उपयोग पर विचार रखे गये ।

डॉ. अमित ने बताया कि अधिक उम्र तथा अन्य बीमारियों से प्रभावित मरीजों में जटिल हार्ट अटैक के मामलो में एंजियोप्लास्टी की जा सकती है या नहीं और किन मरीजों में एंजियोप्लास्टी उपचार के छोडकर दूसरा उपचार अपनाया जाए इस पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। हार्ट फैल्योर की स्थिति में पुरानी उपचार तकनीकों की तुलना में नये तरीकों को अपनाने पर जोर दिया गया। जब हृदय शरीर में सही प्रवाह से रक्त नहीं भेज पाता है इस स्थिति में हार्ट फैल्योर का डर रहता है, ऐसे में किस तरह से बचाव किया जाए और हार्ट फैल्योर के शुरूआती लक्षणों को पहचान कर मरीज को बडी समस्या से बचाने की टिप्स विशेषज्ञों ने दी।

प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. आर. कासलीवाल ने पिछले वर्षों में बडी हृदय रोग की समस्या पर विचार रखते हुए कहा कि इसके लिए काफी हद तक हमारी आधुनिक जीवनशेली भी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अगर साधारण व स्वस्थ जीवन६ौली को अपनाया जाए तो बीमारियों से बचा जा सकता है साथ समय - समय पर डॉक्टर से कन्सल्ट करके जांचें भी करवानी चाहिए । उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि जब भी कोई मरीज किसी अन्य समस्या को लेकर आता है तो उस डॉक्टर की जिम्मेदारी है कि वो उसे हृदय का महत्व समझाते हुए उसे स्वस्थ रखने की टिप्स दे। पहले दिन डॉ. कपिल कुमावत, और खुश कुमार भगत ने भी हृदय रोगों और उनके उपचार में नवीन तकनीकों के उपयोग पर अपने अनुभव व विचार साझा किये।


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