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राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर वेबीनार का आयोजन

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06 Mar 21
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर वेबीनार का आयोजन

भारतीय शिक्षण मण्डल और नीति आयोग के साथ मिलकर पेसिफिक विश्वविद्यालय ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर वेबीनार का आयोजन किया जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. भगवती प्रकाश, कुलपति गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, तथा मुख्य वक्ता प्रो. अनिल कोठारी थे। वेबीनार का अध्यक्षीय अभिभा६ाण पेसिफिक विश्व विद्यालय के अध्यक्ष प्रो. के.के. दवे राष्ट्रीय ने दिया। प्रो. महिमा बिडला, डीन फैकल्टी ऑफ मैनेजमेन्ट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा की प्रस्तावना प्रस्तुत की। डॉ. शिवोहम सिंह ने इस वेबीनार का संचालन किया। उन्होंने वर्तमान भारत में 34 साल पुरानी शिक्षा नीति जो कि बदलते परिदृ८य के साथ प्रभावहीन हो गई थी कि स्थान पर एक बहु वि६ायक दृ६अकोण की प्रासंगिकता पर केन्दि्रत शिक्षा नीति की आव८यकता को बताया।

इस वेबीनार में पेसिफिक विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों के 132 फैकल्टी मेम्बरर्स ने भाग लिया।

नई शिक्षा नीति पर चर्चा को प्रारंभ करते हुए प्रो. महिमा बिडला ने कहा कि भारत विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है तथा यह नीति इस ओर एक बडा कदम साबित होगी। हमें इसके क्रियान्वयन के लिए प्रयास तेज करने होंगे, जिससे सर्वे भवन्तु सुखिनः का बोध विश्व में होगा। भारत में तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी इत्यादि बडे एवं बहु-विषयक विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय रहे हैं। नई शिक्षा नीति में उच्चतर शिक्षा संस्थानों को बडे एवं विविध विषयों वाले विश्वविद्यालय एवं कॉलेज में रूपांतरित करना प्रस्तावित है।

भारत रोजगार एवं रोजगारपरक क्षमता की दुधारी तलवार पर खडा है। एक ओर जहां बेरोजगारी दर 6.6 फीसदी (सितंबर, 2020) है, वहीं दूसरी ओर इंडिया स्किल रिपोर्ट-2020 के अनुसार देश में मात्र् 46.21 फीसदी युवा ही रोजगारपरक क्षमताओं से युक्त हैं। मैनपावर टैलेन्ट सर्वे-2018 के अनुसार भारत में प्रतिभा कमी की दर 56 फीसदी है, जबकि चीन (13 प्रतिशत), ब्रिटेन 19 प्रतिशत, अमेरिका 46 प्रतिशत, जर्मनी 51 प्रतिशत तथा जापान 89 प्रतिशत में दक्षता की कमी है। स्पष्ट है कि जैसा कौशल, कंपनियों को चाहिए। उपलब्ध नहीं है। यदि भारत के युवा वांछित दक्षता प्राप्त कर ले, तो न केवल देश के अंदर बल्कि विदेशों में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर है, क्यं कि वाछित दक्षताओं की कमी जापान, जर्मनी, अमेरिका में भी है। इस दुष्चक्र से देश को निकालने के लिए शिक्षा नीति में वोकेश्नल एज्युकेशन को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। वोकेशनल एज्युकेशन को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल किया जाएगा। अभी तक कहीं न कहीं वोकेशनल विषयों को मुख्य धारा के अकादमिक विषयों की तुलना में कमतर समझे जाने की धारणा बनी हुई है, और इसी का परिणाम है कि दक्षिण कोरिया, जर्मनी, अमेरिका के विद्यार्थी वोकेशनल एज्युकेशन से समृद्ध है, जबकि भारत में यह 5 फिसदी ही है। नई नीति में वर्ष 2025 तक 50 फिसदी विद्यार्थियों को वोकेशनल एज्युकेशन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

भारत शोध एवं नवाचार के क्षेत्र् में राष्ट्रीयडीपी का 0.69 फीसदी खर्च करता है, जबकि अमेरिका (2.8 प्रतिशत), इजराइल (4.3 प्रतिशत) दक्षिण कोरिया (4.2 प्रतिशत) एवं चीन 2.1 निवेश कर रहे हैं। वर्ल्ड इंटिलेक्चुअल प्रोपर्टी ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 47,000 पेटेंट दर्ज करवाए, जबकि चीन, अमेरिका, कही ज्यादा आगे थे। नई शिक्षा नीति ने शोध एवं नवाचार की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए नेशनल रिसर्च फाउण्डेशन के गठन की अनुशंसा की, जिसका अनुमानित बजट लगभग 50,000 करोड रूपये होगा।

नई शिक्षा नीति अपनी पूर्ववर्ती नीतियों से इस मायने में भी विशेष है कि इसके अनेक प्रावधानों पर भारत सरकार पहले ही काफी काम कर चुकी है। 21वीं शताब्दी भारत के समग्र उत्थान की शताब्दी होगी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने इसकी सुदृढ आधारशिला स्थापित कर दी है।

प्रो. अनिल कोठारी ने नये पाठ्यक्रमों, मल्टी डिसीप्लीन, मल्टी टास्किंग तथा मल्टी लैंगवेज की महत्ता पर जोर दिया। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के बौद्धिक तथा भारत केन्दि्रत अनुसंधान की आव८यकता समझाई।

प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा राष्ट्रीय ने देश में शिक्षा पर होने वाले निवेश को बढाने की महत्ती आव८यकता तथा इसके उद्योगों व अर्थव्यवस्था पर होने वाले दूरगामी परिणामों परिचर्चा की। समाज में मानव मूल्यों की स्थापना करने वाली बोध कथाओं व संस्कृत के अथाह ज्ञान भण्डार की आधुनिक काल में उपयोग समझाया। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर लाने की प्रतिबद्धता तथा चुनौतियों का सामना करने के लिए शक्षकों में सामर्थ्य विकास करने के लिए प्रशिक्षण को जरूरी बताया।

नई शिक्षा नीति का उदेश्य छात्रें की सोच ओर रचनात्मक क्षमता को बढाकर सीखने की प्रक्रिया को ओर अधिक कुशल बनाना। नई शिक्षा नीति में स्कूल स्तर के साथ साथ उच्च शिक्षा में कई बदलाव शामिल है।

प्रो. के.के. दवे राष्ट्रीय ने पेसिफिक विश्वविद्यालय में शोध एवं अनुसंधान को बढावा देने वाली व रोजगार परक शिक्षा के बारे में बताया। उन्होंने मल्टीपल एन्ट्री तथा मल्टीपल एक्जिट के सिस्टम को भी समझाया। उन्होंने 2030 तक सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत के लक्ष्य पर ले जाने के लिए शिक्षकों की आव८यकता तथा प्रशिक्षण की उपयोगिता पर बल दिया। प्रो. अनुराग मेहता राष्ट्रीय ने अतिथितियों ने धन्यवाद प्रस्तावित किया।


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