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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने रौपा पौधा-बांधा परिण्डा

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06 Jun 20
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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने रौपा पौधा-बांधा परिण्डा

कोटा |   विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कोटा स्थित अपने निज आवास पर पौधारोपण किया तथा पक्षियों के लिए परिण्डा भी बांधा। उन्होंने इस अवसर पर आमजन से प्रकृति के संरक्षण के संकल्प को सुदृढ़ करने का आग्रह भी किया। 

लोकसभा अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि यह दिवस प्रकृति एवं मानव सभ्यता के गहरे नाते का प्रतीक है। प्रकृति ही मनुष्य तथा सभी जीव-जन्तुओं के लिए जीवित रहने के लिए आहार और ऊर्जा का स्रोत है। सरल शब्दों में प्रकृति ही हमारे अस्तित्व का आधार है। पीड़ाजनक यह है कि मनुष्य प्रकृति के तय नियमों की अवेहलना लगातार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में प्रकृति ने मनुष्य को इस गलती के प्रति चेताया भी है। धरती निरंतर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही है जो संकेत है कि प्रकृति के साथ रिश्तों की डोर कमजोर होने का दुष्परिणाम मानव सभ्यता को ही वहन करना होगा। 

उन्होंने कहा कि एक वायरस के चलते वर्तमान में मानव सभ्यता संकट के ऐसे दौर से गुजर रही है जिसके बारे में न पहले सुना गया और न ही किसी ने देखा। कहीं न कहीं इसके लिए भी प्राकृतिक असंुतलन ही जिम्मेदार है। इस वायरस ने हमें हमारे घरों में कैद रहने को मजबूर कर दिया। 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस आपदा ने हमें प्रकृति के साथ नया रिश्ता स्थापित करने का अवसर प्रदान किया है। मानव की गतिविधियां नियंत्रित हुई तो प्रकृति को भी स्वयं के उपचार का अवसर प्राप्त हुआ। नदियों का पानी की स्थितियों में सुधार, दूरस्थ स्थानों से पहाड़ों का दिखाई देना, वातावरण में जहरीली गैसों में कमी इसके अनेकों उदाहरण में शामिल हैं। ऐसे समाचारों ने मन को सुकून भी दिया।

बिरला ने कहा कि अब जब हम एक बार पुनः अपने जीवन को गति देने के प्रयास कर रहे हैं तो हमें प्रकृति के संरक्षण की दिशा में भी गंभीरता से विचार करना होगा। हमारी प्रगति के लिए हम प्रकृति को अवनति की दिशा में नहीं ले जा सकते। धरा को स्वच्छ व हरा-भरा बनाना तथा अपनी भावी पीढ़ियों के लिए हंसती-खिलखिलाती पृथ्वी छोड़कर जाना हमारा सामुहिक उत्तरदायित्व है।

उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस वह अवसर है जब हम प्रकृति का आभार प्रकट करते हुए, उसके संरक्षण के अपने संकल्प दोहराएं। हमें अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध बनाने तथा जीव-जंतुओं के सहअस्तित्व का सम्मान करते हुए उनको भी पुष्पित-पल्लवित होने का अवसर प्रदान करने के प्रति समर्पित रहना होगा।

 


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