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पशुओं में लम्पी वायरस के नियंत्रण हेतु टीकाकरण का शुभारंभ

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25 May 23
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पशुओं में लम्पी वायरस के नियंत्रण हेतु टीकाकरण का शुभारंभ

उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर एवं पशुपालन विभाग, उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में स्मार्ट गांव मदार एवं ब्राह्मणों की हुन्दर में एक दिवसीय पशुधन स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति डाॅ. अजित कुमार कनार्टक, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के मुख्य आतिथ्य में किया गया। उन्होनें अपने उद्बोधन में कहा कि स्मार्ट विलेज मदार एवं ब्राम्हणों की हुन्दर में विश्वविद्यालय द्वारा किये गये सफल कार्याें को देखते हुये माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया। इसके साथ ही बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवीन कृषि प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को अपनाने की अपील की। इस अवसर पर उन्होनें लम्पी वायरस के नियंत्रण हेतु टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया तथा 98 पशुपालकों को मिनरल मिक्चर वितरीत किया।
कार्यक्रम के आरम्भ में निदेशक प्रसार शिक्षा, डाॅ. आर.ए. कौशिक ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुये अपने उद्बोधन में कहा कि स्मार्ट गांव मदार एवं ब्राम्हणों की हुन्दर को माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा एक वर्ष की अवधि और बढ़ा दी गयी ताकि गांव का सर्वांगीण विकास हो सके।
डाॅ. शक्ति सिंह, संयुक्त निदेशक, पशु पालन विभाग, उदयपुर ने बताया कि ग्रीष्मकाल में पशुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाये एवं उन्हें किस प्रकार से उचित वातावरण उपलब्ध कराया जाये ताकि पशुओं के स्वास्थ्य को स्वस्थ रखा जा सके। इसके साथ ही उन्होनें यह भी बताया कि ग्रीष्मकाल में पशुओं में होने वाली बिमारियों हेतु उचित टीकाकरण करवाना अनिवार्य हैं। डाॅ सिंह ने बताया कि गत वर्ष भी लम्पी वायरस पर नियंत्रण किया गया था इस वर्ष भी इस रोग से बचाव हेतु विभाग द्वारा घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। इनके साथ ही डाॅ. ओ.पी साहु, पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु पालन विभाग, उदयपुर ने बताया कि इन पशुओं में होने वाले बाह्य एवं आन्तरिक परजीवीयों को नियंत्रण करने हेतु संक्षिप्त जानकारी प्रदान की।
शिविर में डाॅ. पी. भटनागर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव ने बताया कि पशु बांझपन का उपचार किया जाने की आवश्यकता है व इस समस्या के निदान हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा परियोजना चलाई जा रही है।
डाॅ. सिद्धार्थ मिश्रा, विभागाध्यक्ष, पशु उत्पादन विभाग, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर ने पशु प्रबन्धन पर प्रकाश डालते हुये बताया कि बकरियों के नस्ल सुधार हेतु सिरोही नस्ल के बकरे वितरित किया जाना प्रस्तावित है ताकि नस्लों में सुधार कर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
डाॅ. दत्रादेय, पशु चिकित्सक, बड़गांव, उदयपुर ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये पशुओं में होने वाले रोगों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी इसके साथ ही पशुओं में होने वाले रोगों रोकथाम हेतु आवश्यक दिशानिर्देश भी दिये। साथ ही बताया कि शिविर में 320 बड़े पशुओं का उपचार किया गया एवं 148 छोटे पशुओं को कृमिनाशी दवाई पिलाई गयी जिससे 215 पशु पालाकों को लाभान्वित किया गया।
डाॅ. आर.एस. राठौड़, स्मार्ट विलेज समन्वयक, मप्रकृप्रौविवि, उदयपुर ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं अन्त में सभी प्रधारे आगन्तुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
 


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