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विश्व पटल पर कंटेम्पोरेरी आर्टिस्ट सौरभ की कला का परचम

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15 Apr 21
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विश्व पटल पर कंटेम्पोरेरी आर्टिस्ट सौरभ की कला का परचम

भीलवाड़ा- (वर्ल्ड आर्ट डे 15 April 2021) | हर साल 15 अप्रैल को दुनियाभर में वर्ल्ड आर्ट डे मनाया जाता है। सौरभ ने भी अपनी नायाब कलाकृति से इस इंटरनेशनल आर्ट डे को अपने अलग अंदाज में प्रस्तुत किया है। सौरभ भट्ट ने वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में शास्त्री नगर स्थित एक निजी फार्म हॉउस की तीन विशालकाय दिवारों पर 300 स्क्वायर फ़ीट से ज़्यादा करीब 43,200 स्क्वायर इंच की दीवार पर अपनी नायाब कलाकृति का प्रदर्शन किया है। जो की कला के क्षेत्र में एक वर्ल्ड रेकॉर्ड से कम नहीं है। सौरभ ने इस विशालकाय कलाकृति को आर्ट स्टूडेंट राहुल के साथ मात्र 10 दिनों की कड़ी मेहनत से पूर्ण कर दिखलाया है। सौरभ ने इन दीवारों पर कुछ ऐसा चित्रण किया है मनो दीवारें कई अर्से पुरानी और जली हुई हैं। भट्ट की यह कलाकृति दर्शको के लिए ही नहीं बल्कि  स्टूडेंट्स के साथ कला प्रेमियों, कलाकरों और कंटेम्परेरी आर्ट वर्ल्ड में भी सबसे उच्च स्तर की कलाकृति मानी जा सकती है। इस नायाब कलाकृति में टूटी और जलती दीवारों को देखा जा सकता है, जो कला के क्षेत्र में नवीन परिवर्तन को दर्शाती है। ईंटों और पत्थरों की दीवारों पर चूने और सीमेंट की परत, कला में ऊपरी दिखावे को दर्शाती है अंदर से निकली ईंटें और पत्थर सच्ची और रचनात्मक कला को दर्शाते हैं।  इस कलाकृति से भट्ट यह सन्देश भी देना चाहते हैं कि बाह्य ब्रह्माण्ड की बजाय कलाकार आतंरिक ब्रह्माण्ड की खोज में कार्य करे तो कलाकृति और भी रचनात्मक बन सकती है। सौरभ भट्ट अपनी इस विशालकाय कलाकृति को अपने गुरु कलाविद रमेश गर्ग, अमित गंजू और नवीना गंजू सहित वर्ल्ड फ़ेमस आर्टिस्ट लियोनार्डो डा विन्ची को डेडिकेट करना चाहते हैं। आज ही के दिन 15 अप्रैल सन 1452 में लियोनार्डो डा विन्ची का जन्म हुआ और देश में उनकी कला को एक अलग पहचान मिली। सौरभ ने राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 96 से अधिक सोलो और ग्रुप कला प्रदर्शनियों में अपनी कला का परचम लहराया है। भट्ट की कलाकृतियां कालिदास, राजा रवि वर्मा आदरांजलि, और कई एनुअल आर्ट एक्सहिबिशन में भी सेलेक्ट हो चुकी हैं। उनकी कला ब्राज़ील, ब्रिटैन, डेनमार्क, भूटान, हिमालय, दोजुला, बैंकॉक, थाईलैंड, नेपाल, सहित मुंबई की जहाँगीर आर्ट गैलरी, नेहरू आर्ट सेंटर, दिल्ली ललित कला अकादमी, और राजस्थान ललित कला अकादेमी में भी प्रदर्शित की जा चुकी है। उनकी 40 वर्ष की इस कलात्मक जर्नी को बहुत ही बारीकी से ऑब्ज़र्व किया है और समय समय पर अपनी अनोखी कलाकृतियों से कलाकारों और कला प्रेमियों को आकर्षित भी किया है। अपनी सम्पूर्ण कलात्मक जीवन का श्रेय सौरभ अपने गुरुओं सहित पिता श्री गौवर्धन लाल भट्ट, स्वर्गीय माताश्री श्रीमती कौशल्या भट्ट, बहन डॉ. कुसुम सहित सम्पूर्ण परिवार को देते हैं। गुरुओं की सिखलाई शिक्षा और माँ-बाप के आशीर्वाद से सौरभ आज इस मुकाम पर हैं जहाँ हर व्यक्ति का सपना होता है। 
सौरभ बताते हैं कि कला को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को सम्पूर्ण विश्व में खास तरीके से मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो कला में रुचि रखते हैं और अपनी कला का प्रदर्शन भी करना चाहते हैं। इसी खास मौके पर वह एक दूसरे को कला के प्रति अपनी नायाब कलाकृतियों का प्रदर्शन कर सभी कलाप्रेमियों और नए उभरते कलाकारों को जागरूक भी करते हैं। वर्ल्ड आर्ट डे को मनाने का खास मकसद लोगों को कला के प्रति बढ़ावा देना है. इतना ही नहीं, इस दिन जगह जगह प्रदर्शनी और सेमिनार का आयोजन कर कलाकारों के टैलेंट को भी देखने का मौका मिलता है। हर साल इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता है. इस दिन लोग अलग अलग जगहों पर प्रदर्शनी लगाते हैं. कला प्रेमी इस दिन को उत्सव के रूप में मनाते हैं. इस अवसर पर यूनिस्को के द्वारा कार्यशालाओं, वाद-विवाद कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में भाग लेने की लोगों से अपील की जाती है. दुनियाभर इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए कला प्रेमी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
"सफलता के लिए ढेर सारे कौशल और उन सबमें निपूर्णता की आवश्यकता हर्गिज नहीं होती। बल्कि सफलता के लिए सिर्फ एक लक्ष्य और उस पर लगातार काम की जरूरत होती है।" -सौरभ की कलम से...


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