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तंबाकू के कारण हरियाणा में हर साल 28 हजार मौतें

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06 Aug, 17 08:01
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तंबाकू के कारण हरियाणा में हर साल 28 हजार मौतें हिसार.देशभर में तंबाकू व धूम्रपान की प्रभावी रोकथाम के लिए मीडिया ही नही हर व्यक्ति को व्यक्तिगत व सार्वजनिक स्थल, शिक्षण संस्थाअेां पर आकर पहल करने की महती आवश्यकता है। प्रदेश में करीब 28 हजार लोग प्रतिवर्ष तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादेां से सेवन अपनी जान गंवा रहे है और प्रतिदिन 116 से अधिक बच्चे तंबाकू सेवन की शुरुआत कर रहे है। हरियाणा में 23.7 प्रतिशत (43 लाख) लोग किसी न किसी रुप में तंबाकू उत्पादों का सेवन करते है। जिसमें 35 लाख लोग धम्रपान करते है। जो कि बेहत चिंता का विषय है। यह जानकारी होटल लजीज में तंबाकू नियंत्रण एवं मीडिया की भूमिका पर संबध हैल्थ फाउंडेशन, फोर्टिस फाउंडेशन, वायस ऑफ टोबेको विक्टिमस की ओर से आयेाजित एक दिवसीय कार्यशाला में सामने आई। प्रदेश में कोटपा अधिनियम (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) की पालना होने से प्रतिवर्ष हजारेां की संख्या में हो रही जनहानि को रोका जा सकता है।

रेडि़येशन आंकोलॉजिस्ट डा.अरुण कुमार अग्रवाल ने कहा कि तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों में विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ होतें है। जो कि बेहद नुकसानदायक होते है। सिगरेट के धुंए में करीब 7 हजार प्रकार के रासायनिक तत्व हेाते है, जिसमें से 200 प्राण घातक होते है। इसमें से 70 इतने घातक रासायनिक तत्व हेाते है जो कि कैंसर के कारक है।

डा.अरुण कुमार बतातें है कि 90 प्रतिशत लंग कैंसर तथा मुंह के कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू ही है। तंबाकू सेवन शुगर, हार्ट अटेक, रक्तचाप, मुंह, गला एंव फेफड़े का कैंसर, आंखों की रोशनी चले जाना, गैंग्रीन, नपुसंकता,हाथ पैरों में विकृति, नपुसंकता सहित अनेक प्रकार की बीमारियेां का जन्मदाता है। उन्होने बताया कि तंबाकू का सेवन किसी भी रुप में लोगों के लिये हानिकारक है, सरकारी विभागों एवं आमजन को इस पर रोकथाम के लिये आगे आना चाहिये। इसके लिये कोटपा कानून की कडाई से पालना होनी चाहिए। वंही खासतौर पर महिलाअेां में गर्भपात, जन्म के समय बच्चे का वनज कम होना, मृत बच्चे का जन्म, गर्भाश्य के मुख का कैंसर इत्यादि हो सकतें है।
न्यूरो सर्जन डा.उमेश कालरा ने कहा कि हिसार में तंबाकू उत्पादेां के बढ़ते प्रभाव के चलते कोटपा कानून का प्रभावी पालना बेहद जरुरी है। तंबाकू उत्पादों के सेवन से जब कैंसर होता है तो एक व्यक्ति नही बल्कि पूरे परिवार भी बुरी तरह से प्रभावित होता है।

संबध हैल्थ फाउंडेशन के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर डा.सोमिल रस्तोगी ने बताया कि बच्चों को तंबाकू उपयेाग से दूर रखने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानून कोटपा का प्रभावी अनुपालन जरुरी है। इसके लिए देश में तंबाकू निंयत्रण कानून कोटपा (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) के अनुच्छेद 4 में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान की रोक, अनुच्छेद 5 में तंबाकू पदार्थों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर प्रतिबंध, अनुच्छेद 6 अ में अवयस्केां को और उनके द्वारा तंबाकू की बिक्री पर रोक, अनुच्छेद ब में सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे भीतर व बाहर तंबाकू की बिक्री का निषेध, अनुच्छेद 7 में सभी प्रकार के तंबाकू पदार्थों के पैकेट पर अनिवार्य निर्दिष्ट सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी का प्रावधान है। इसके साथ ही किशोर न्याय अधिनियम (जे.जे.एक्ट) अनुच्छेद 77 में अवयस्कों को तंबाकू/मादक पदार्थ देने पर एक लाख रुपए का दंड तथा 7 साल की कैद का प्रावधान है।
वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस (वीओटीवी) की डायरेक्टर आशिमा सरीन ने कहा कि तंबाकू मुक्त हरियाणा अभियान के तहत पुलिस को कोटपा (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) पर प्रशिक्षण दिया गया है। जिसके तहत पुलिस ने गुड़गांव, फरीदाबाद, पंचकुला, अंबाला व झज्झर में कोटपा के तहत चालान की कार्यवाही की जा रही है। इसमें सार्वजनिक स्थानेां पर केाटपा अधिनियम का उल्लंघन करने वालों पर कार्यवाही की गई।
आशिमा सरीन ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार भी भारत में 3500 लोग रोज तम्बाकू सेवन से असमय मर जाते है और साल भर में करीब 12,00,000 लोग मृत्यु को प्राप्त करते है। तंबाकू असंचारी रोगों का प्रमुख कारण है। औसतन धम्रपान करने वाले व्यक्ति की आयु धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में 22 से 26 प्रतिशत तक घट जाती है।
वे बतातें है कि तंबाकू नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को तंबाकू व धुम्रपान उत्पादों पर शत प्रतिशत टैक्स वृद्वि, कोटपा कानून की कड़ाई से पालना, शिक्षण संस्थाअेां व सार्वजनिक स्थलों पर पूरी तरह से तंबाकू व गुटखा उत्पादों के प्रयोग व विक्रय पर रोक लगने से युवाओं को मौत के मुंह से बचाया जा सकता है।
तंबाकू व धूम्रपान की प्रभावी रोकथाम के लिए मीडिया के साथ साथ आमजन को भी इस प्रकार के गंभीर मुददों पर काम करने की आवश्यकता है, ताकि सभी के सकारात्मक प्रयास से इन पर रोक संभव है। खासतौर पर युवावर्ग को इससे बचाने की जरुरत है। घरों में बढती उम्र के युवाओं पर नजर रखी जाये ताकि वे इस प्रकार के नशों से दूर रहे। उन्होने कहा कि कोटपा एक्ट की पालना प्रशासन के साथ साथ आमजन को भी करनी होगी, तभी तंबाकू पर रोक संभव है।

उन्होने कहा कि तंबाकू से मरने वालों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है,जो कि चिंता का विषय है। इन मौतों को रोका जा सकता है। इसमें मीडिया की अहम् भूमिका है,परंतु आमजन को भी जागरुक होकर इस प्रकार की मुहिम में साथ देना होगा तभी समाज से इस प्रकार की बुराई को दूर किया जा सकता है। तंबाकू से परहेज कर अकाल मौत से बचा जा सकता है। इससे पीडि़त व्यक्ति व उनके परिजनों को न केवल शारिरीक,मानसिक,आर्थिक नुकसान का भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

ये है सार्वजनिक स्थल
सरकारी कार्यालयों, मनोंरजन केन्द्रों, पुस्तकालयों, अस्पताल, स्टेडियम, होटल, शांपिग मॉल, कॉफी हाउस, निजी कार्यालय, न्यायालय परिसर, रेल्वे स्टेशन, बस स्टेण्ड, सभागार, सार्वजनिक परिवहन, शैक्षणिक संस्थान, टी स्टाल, ढाबे व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान व तम्बाकू का सेवन पूर्णतः निशेध है।
इस दौरान संबध हैल्थ फाउंडेशन के कोर्डिनेटर जे.पी भी उपस्थित रहे।
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यह खबर निम???न श???रेणियों पर भी है: Health Plus , Editors Choice
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