मंदिर के बाहर बकरे की हुई बलि तलवार के वार काट दिया सिर तड़प-तड़प मर गया बकरा खून बिखरा फिर पेड़ पर लटका दिया उल्टा उतारी खाल मास के टुकड़े-टुकड़े पकाया आग पर खा गए खास दया न हया बोले जयकारे क्रूर हत्यारे।
बकरे की बलि
-लक्ष्मीनारायण खत्री
-लक्ष्मीनारायण खत्री
