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कविता-वोट का अनुष्ठान

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18 Sep 20
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-लक्ष्मीनारायण खत्री

कविता-वोट का अनुष्ठान

लोकतंत्र का 

पर्व आया 

आजादी से 

वोट देने का 

अधिकार पाया।

लोभ लालच से 

कोसों दूर 

भ्रष्टाचार को 

करते हैं चूर।

ईमानदार सेवाभावी 

नेता चुनेंगे 

घर-घर खुशी का 

नया युग रचेंगे।

उठे जागे बन-ठन 

निकले करने मतदान 

यही है हमारे 

भविष्य का अनुष्ठान।


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