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हिन्दी दिवस पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

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16 Sep 19
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भाषा देश की पहचान होती है- सेवक

हिन्दी दिवस पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

जैसलमेर  । हिन्दी दिवस के अवसर पर स्थानीय जिला पुस्तकालय में विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ अधिवक्ता व रम्मत खिलाडी राणीदान सेवक की अध्यक्षता एवं प्रो. बालकृष्ण जगाणी के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

    हिन्दी भाषा के महत्व व राष्ट्र निर्माण में भाषा की भूमिका पर चर्चा करते हुए राणीदान सेवक ने कहा कि भाषा उस देश की पहचान होती है तथा बिना भाषा राष्ट्र गूंगा होता है आज पूरे विश्व में हिन्दी भारत की भाषा के रूप में पहचान बना रही है। प्रो. जगाणी ने कहा कि हिन्दी भाषा राजनीति का शिकार हो उतर-दक्षिण में बंट गई जबकि अभिव्यक्ति व संपर्क भाषा के रूप हिन्दी श्रेष्ठ माध्यम बन सकती है जगाणी ने कहा कि कोई भी भाषा किसी दूसरी भाषा का विरोध नही बल्कि सहयोगी होती है।

    डॉ. अशोग गाडी ने अभियान चलाकर हिन्दी के प्रसार व उपयोग की बात कही वही राकेश आचार्य ने कहा कि हिन्दी श्रृंगार की भाषा है।

    कवि कमल छंगाणी ने ’महासागर महाकाव्य है हिन्दी’ कविता के माध्यम से हिन्दी के महत्व को बताया वही युवा फतेह सिंह ने वर्तमान में नारी अत्याचार व रेप की घटनााओं को इंगित करते हुए ’’राखी की लाज रखना’’ कविता प्रस्तुत की।

    कवि राम लखारा ’विपुल’ की कविता हिन्दी है अरमान हिन्दी जनमन गाज के माध्यम से हिन्दी की महिमा परिभाषित की। लखारा ने अपनी अन्य रचनाओं से भी गोष्ठी को आंनदित किया। लक्ष्मण पुरोहित ने कहा कि हमे गैर हिन्दी भाषियो पर हिन्दी थोपने के बजाय स्वीकार्यता के प्रयास करने चाहिये। नन्दकिशोर दवे ने हिन्दी की पीडा कविता के जरिये भाषा का दर्द रेखांकित किया वही विजय कुमार व्यास ने हिन्दी को विज्ञान की भाषा बनाने की वकालत की।

    कवि आनन्द जगाणी ने वर्तमान समय में हिन्दी के बढते प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि धीरे धीरे हिन्दी अपनी स्वीकार्यता बढा रही है जगाणी ने इसे रोजगार की भाषाा बनाने पर जोर दिया।

    हास्य कवि गिरधर भाटिया ने कहा कि हिन्दी में शब्दो को आत्मसाठ करने की शक्ति है। भाटिया ने अपनी हास्य कुण्डलियां प्रस्तुत की।

    नरेन्द्र वासु ने कहा कि हिन्दी सम्फ की श्रेष्ठ भाषा बन सकती है जो पूरे राष्ट्र की सभी भाषाओं के साथ मिल कर देश को एकता की डोर में बांध सकती है।

    कथाकार ओम प्रकाश भाटिया ने कहा कि भाषा के विकास ने शासन की इच्छाशक्ति भी महत्वपूर्ण होती है उन्होने कहा कि हिन्दी का भविष्य उज्जवल व सम्मान जनक है भाटिया की कविता खुलकर मिलना मिलकर खिलना यार तुम्हारा कहां गया’ सराही गई।

    संचालक व वरिष्ठ कवि मांगीलाल सेवक ने कहा कि हिन्दी हमें जोडने का काम करती है सेवक की कविता ’’हिन्दी को हदय में बसाओं भाई’’ प्रस्तुत की।

    अन्त में पुस्तकालयध्यक्ष आनन्द पंवार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रारम्भ में कवियों द्वारा जैसलमेर के पूर्व विधायक गोवर्धन कल्ला, रम्मत कलाकार वासुदेव बिस्सा, नवल पुरोहित व शिक्षक रसाल पुरोहित के निधन पर मौन रखकर श्रृंद्वाजली दी गई।

 


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