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आतंकियों की पहचान सोशल मीडिया पर संभव

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19 Sep 18
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आतंकियों की पहचान सोशल मीडिया पर संभव द वा¨शगटन । वैज्ञानिकों ने सोशल मीडिया पर आईएस जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े चरमपंथियों की पहचान का तरीका ढूंढ़ निकालने का दावा किया है जिससे अपने सोशल मीडिया खातों पर आपत्तिजनक चीजें लिखने, बोलने या साझा करने से पहले ही उनकी पहचान मुमकिन हो सकेगी।सोशल मीडिया उपभोक्ताओं को परेशान करने, नए सदस्यों की भर्ती करने और ¨हसा भड़काने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ऑनलाइन चरमपंथी समूहों की संख्या और उनका आकार बढ़ रहा है। प्रमुख सोशल मीडिया साइट इस प्रवृति से मुकाबला करने की दिशा में काम कर रही हैं। वह इन खातों की पहचान के लिए उपयोक्ताओं की ओर से किसी पोस्ट को ‘‘रिपोर्ट’ करने पर बहुत हद तक निर्भर रहती हैं। साल 2016 में ट्विटर ने बताया था कि उसने आईएस से जुड़े 3,60,000 खातों को बंद किया है। एक बार कोई खाता इस्तेमाल से रोक दिए जाने के बाद उस उपयोक्ता द्वारा कोई नया खाता खोलने या बहुत सारे खाते संचालित करने की गुंजाइश कम रहती है। मैसेच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के तौहीद जमां ने कहा, सोशल मीडिया चरमपंथी संगठनों के लिए ताकतवर मंच बन गया है, चाहे यह आईएस हो या ेत राष्ट्रवादी ‘‘ऑल्ट-राइट’ ग्रुप हो। जमां ने कहा, यह समूह नफरत से भरे दुष्प्रचार फैलाने, ¨हसा भड़काने और आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए सोशल नेटवकरें का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह आम लोगों के लिए खतरा बन गया है। शोधकर्ताओं ने करीब 5,000 ऐसे ‘‘सीड’ उपयोक्ताओं से ट्विटर के आंकड़े इकट्ठा किए, जिनसे आईएस के सदस्य परिचित थे या जो आईएस के कई ज्ञात सदस्यों से मित्र या फॉलोवर के तौर पर जुड़े थे। उन्होंने खबरों, ब्लॉग, कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों की ओर से जारी की गई रिपोटरें और ¨थक टैंक के जरिए उनके नाम हासिल किए। इन उपयोक्ताओं की टाइमलाइन से 48 लाख ट्वीटों के विषय-वस्तु की समीक्षा करने के अतिरिक्त उन्होंने खातों के निलंबन का भी पता लगाया।
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