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विशेष टिप्पणी :लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान में भाजपा चुस्त और कांग्रेस सुस्त

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01 Apr 24
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गोपेन्द्र नाथ भट्ट

विशेष टिप्पणी :लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान में भाजपा चुस्त और कांग्रेस सुस्त

 

लोकसभा आम चुनाव के लिए देश के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान में भाजपा की तैयारियां और चुनाव प्रचार अन्य दलों की तैयारियों के मुकाबले अधिक चुस्त और व्यवस्थित हैं तथा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तैयारियां भाजपा की अपेक्षाकृत सुस्त और अव्यवस्थित दिखाई दे रही हैं।

 

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की मंगलवार को जयपुर शहर,जयपुर ग्रामीण और अलवर लोकसभा सीटों के मतदाताओं को साधने तथा प्रदेश में भाजपा के चुनाव अभियान की शुरुआत करने के लिए होने वाली राजस्थान यात्रा से पहले उनके चाणक्य केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान में भाजपा की चुनावी व्यूह रचना और तैयारियों का जायजा लेने के लिए प्रदेश में दो दिन का दौरा किया तथा सीकर में सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती के समर्थन में रोड शो और जोधपुर में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की नामांकन रैली को संबोधित करने के साथ ही जयपुर और जोधपुर में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा एवं पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी, पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों का जायजा लिया।

 

सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने प्रदेश भाजपा को सख्त हिदायत दी है कि वे नरेन्द्र मोदी को तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनाने और प्रदेश में भाजपा की विजय तिकड़ी बनाने के लिए इस बार भी प्रदेश की 25 में से 25 सीटों पर विजयश्री का वरण करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखें।

 

भाजपा इस बार राजस्थान की सभी 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि पिछली बार उसने नागौर की सीट रालोपा के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल को समझौता में दी थी।हनुमान बेनीवाल किसान आंदोलन के मुद्दे पर भाजपा से अलग हो गए और इस बार इंडिया गठबन्धन के साथ चुनाव मैदान में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई ज्योति मिर्धा के सामने उतर रहे है। 

 

इधर कांग्रेस इस बार 22 लोकसभा सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है और उसने नागौर में हनुमान बेनीवाल के साथ ही सीकर में वामपंथी माकपा के अमराराम को गठबंधन का उम्मीदवार बनाया है। साथ ही कांग्रेस दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल वागड़ क्षेत्र में बांसवाड़ा-डूंगरपुर सीट पर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्र जीत सिंह मालविया को चुनाव में पटकनी देने के लिए भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप) के साथ समझौता करने का इरादा रख रही है लेकिन मालविया के बागीदौरा विधायक पद से इस्तीफा देने से खाली हुई सीट पर भी बाप के दावे के कारण अभी बात सिरे पर नही पहुंची है।  इस कारण कांग्रेस की चुनावी तैयारियां अभी व्यवस्थित नही हो पाई है।

हालांकि कांग्रेस ने 06 अप्रेल को पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र को सार्वजनिक रैली में जारी करने का मन बना कर जयपुर में एक बड़ी रैली का आयोजन रखा है जिसमें कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भाग लेने आ रहे है। कांग्रेस इस रैली के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है।

 

कांग्रेस का इरादा इस बार भाजपा को राजस्थान में क्लीन स्वीप करने से वंचित कर  लोकसभा चुनाव में दो चुनावों के सूखे को दूर करना तथा अपना विजयी खाता खोलना है। इसलिए कांग्रेस ने प्रदेश की दो सीटें इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों को देकर वोटों के विभाजन को रोकना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और उसके गठबन्धन के साथी दल नागौर, सीकर और बांसवाड़ा-डूंगरपुर सीट पर भाजपा को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में है। साथ ही भाजपा के ही बागी चुरु, बाडमेर, कोटा,

चितौड़गढ़ आदि लोकसभा सीटों पर भाजपा को कड़े संघर्ष में ले आए है। हालांकि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की मध्यस्तता से चितौड़गढ़ में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के असंतोष के स्वर थमने से प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी का मार्ग सुगम हुआ है।

टिकट नहीं मिलने से असंतुष्ट भाजपा के चुरु सांसद राहुल कसवां और कोटा में पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इसके अलावा अन्य कुछ लोकसभा सीटों पर कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले तथा उपरी रसुकात से टिकट हासिल करने वाले नेताओं से आरएसएस एवं पार्टी कार्यकर्ता खुश नही बताए जा रहे है। भीलवाड़ा सीट से पिछले चुनाव में सबसे अधिक मतों के अंतराल से जीतने वाले वैश्य समुदाय के भाजपा सांसद सुभाष बहेडिया का परफॉर्मेंस के आधार पर स्वयं पार्टी की ओर से टिकट कटने के बावजूद वहां कांग्रेस द्वारा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और ब्राह्मण चेहरे डॉ सी पी जोशी को अपना प्रत्याक्षी बनाने से इस सीट पर भी जोरदार मुकाबला तय दिख रहा है क्योंकि भीलवाड़ा की जनता सी पी जोशी द्वारा चंबल से पानी लाने और सड़कों के विकास आदि कार्यों को अभी भूली नही हैं। भीलवाड़ा में वोटरों के होठो पर चंबल का पानी और जुबां पर राम का नाम, धारा 370 तथा समान नागरिकता क़ानून जैसे जुमले सुने जा रहे है।

 

देखना है राजस्थान में लोकसभा चुनाव के लिए अभी तक दिख रही भाजपा की चुस्ती और कांग्रेस की सुस्ती आने वाले वक्त में क्या गुल खिलायेगी?

 

 


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